गुमला में धान की फसल तैयार, पर जंगली हाथियों से सुरक्षा और निबटने की कोई तैयारी नहीं

Updated at : 08 Nov 2023 1:43 PM (IST)
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गुमला में धान की फसल तैयार, पर जंगली हाथियों से सुरक्षा और निबटने की कोई तैयारी नहीं

गुमला में जिस कदर हाथी उत्पात मचाते हैं. हर साल भारी नुकसान होता है. हाथी सैकड़ों घरों को तोड़ घर में रखे अनाज खाते हैं. साथ ही फसलों को रौंद भी देते हैं.

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दुर्जय पासवान, गुमला :

गुमला जिले में धान की फसल तैयार है. कटनी भी शुरू हो गयी है. कई जगह धान काट कर सुखाया जा रहा है. धान की फसल तैयार व कटनी के साथ ही समझ लें कि गुमला में हाथियों के प्रवेश का मौसम शुरू हो गया है. छत्तीसगढ़ राज्य व बेतला जंगल से हाथियों का झुंड गुमला में घुसता है. बड़े पैमाने पर हाथियों का झुंड उत्पात मचाता है. यहां तक कि लोगों की भी जान ले लेता है. परंतु, इन हाथियों से सुरक्षा व निबटने की तैयारी नजर नहीं आ रही है. हाथी प्रभावित गांवों में अब तक टॉर्च, बम पटाखा व मशाल का वितरण नहीं किया गया है, जिससे हाथियों के गांव में घुसने पर खदेड़ा जा सके.

क्योंकि, गुमला में जिस कदर हाथी उत्पात मचाते हैं. हर साल भारी नुकसान होता है. हाथी सैकड़ों घरों को तोड़ घर में रखे अनाज खाते हैं. साथ ही फसलों को रौंद भी देते हैं. ऐसे में इन हाथियों से बचने के लिए प्रशासन को प्लानिंग करनी चाहिए. ऐसे, जारी प्रखंड के इलाके में हाथियों का प्रवेश शुरू हो गया है. हाथी जारी के बाद डुमरी, चैनपुर, गुमला समेत कई इलाकों में घूमेंगे व उत्पात मचायेंगे. वहीं बेतला के जंगल से बिशुनपुर व डुमरी के रास्ते हाथी गुमला में प्रवेश करते हैं. वहीं कुछ हाथी ओड़िशा से भी सिमडेगा होते हुए बसिया, कामडारा व पालकोट में प्रवेश करते हैं.

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बेतला से अधिक गुमला में घुसते हैं हाथी:

गुमला जिला छत्तीगसढ़ राज्य से सटा होने के कारण कई हाथी डुमरी, चैनपुर, अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड व रायडीह के इलाके में घुसते हैं. बिशुनपुर प्रखंड से नजदीक में बेतला जंगल है, जहां से अधिक हाथी घुसते हैं. पालकोट वन्य प्राणी आश्रयणी में भी हाथी हैं, जो जंगल से भटकने के बाद गांव में घुसते हैं और उत्पात मचाते हैं. गुमला जिला चारों ओर जंगल व पहाड़ से घिरा है. यह हाथियों के रहने के लिए उपयुक्त स्थल है.

हाथियों से प्रभावित गांव :

भरनो प्रखंड के करंज, तेतरबीरा, मालादोन, करौंदाजोर, डुड़िया, लोंडरा, जारी प्रखंड के सीसीकरमटोली, भिखमपुर, श्रीनगर, डुमरी प्रखंड के जैरागी, रायडीह प्रखंड के पीबो, सुरसांग, कोंडरा, केमटे, टुडुरमा, बांसडीह, परसा, उपरखटंगा, बिशुनपुर प्रखंड के गुरदरी, कुजामपाट, बनारी, घाघरा, सिसई के नगर, चटी डांड़ टोली, बसिया के मोरेंग, निनई, घाघरा प्रखंड सलामी, बिरवानी, पालकोट प्रखंड के अधिकांश गांव, कामडारा के पोकला गांव, गुमला के पूर्वी क्षेत्र मुरकुंडा, वृंदा में हाथियों का उत्पात अधिक है. ये सभी गांव जंगल व पहाड़ों से सटे हैं.

धान व देसी शराब रखे घरों को बनाते हैं निशाना:

जंगल से भटकने के बाद हाथी अक्सर वैसे ही घरों को नुकसान पहुंचाते हैं. जिन घरों में हड़िया व देसी शराब बनता है. धान रखे घरों को भी निशाना बनाते हैं. हाथियों में सूंघने की क्षमता अधिक है. जिन घरों से हड़िया, दारू व धान की सुगंध आती है. हाथी उन घरों को ध्वस्त कर अनाज खा जाते हैं. इस दौरान जो भी सामने आता हैं, उन्हें मार देते हैं.

हाथियों से कैसे बचा जाये :

वन विभाग के अनुसार जब जंगली हाथी गांव में घुस जाये, तो मशाल जला कर हाथी को भगाने का प्रयास करना चाहिए. पटाखें से भी हाथी भाग जाते हैं. हाथी को भगाते समय सावधानी बरतनी जरूरी है, नहीं तो बड़ी घटना घट सकती है.

जंगल से हाथियों के गांवों में घुसने के बाद उससे बचाव जरूरी है. वन विभाग गुमला इस पर ध्यान दें. हाथी जब गांव में घुसे, तो हाथियों को सुरक्षित जंगल व उनके ठिकानों तक पहुंचाने का प्रयास हो. हाथी प्रभावित गांवों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. साथ ही अगर कहीं कोई नुकसान हो, तो तुरंत मुआवजा की व्यवस्था करें.

भूषण तिर्की (विधायक)

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