आदिवासियों की जीवन शैली व परंपरा आज भी प्रासंगिक

Updated at : 09 Aug 2025 11:25 PM (IST)
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आदिवासियों की जीवन शैली व परंपरा आज भी प्रासंगिक

विश्व आदिवासी दिवस पर सरना सम्मेलन मैदान में कार्यक्रम आयोजित

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गुमला. विश्व आदिवासी दिवस पर शनिवार को सरना सम्मेलन मैदान (केओ कॉलेज के समीप) पालकोट रोड गुमला में कार्यक्रम हुआ. इसमें आदिवासी समुदाय के हजारों लोग शामिल हुए. कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना के साथ हुआ. मौके पर दिशोम गुरु पूर्व सीएम शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी गयी. इसके बाद आदिवासियों की वर्तमान परिदृश्य व पांचवीं अनुसूची व पड़हा स्वशासन व्यवस्था पर परिचर्चा की गयी तथा आदिवासियों की कला, संस्कृति, परंपरा, भाषा, सभ्यता, जल, जंगल व जमीन को संरक्षित करने का संकल्प लिया गया. मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ के प्रोफेसर रामचंद्र उरांव ने कहा कि आज सिर्फ गुमला या झारखंड राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है. इसमें आदिवासी समुदाय के लोग अपनी आदिवासियत को जी रहे हैं. अपनी भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज व जीवन जीने की शैली को दोहरा रहे हैं कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे. कहा कि हम विश्व आदिवासी दिवस को आदिवासियत को बचाने का संकल्प दिवस के रूप में देख सकते हैं. यह विश्व को एक संदेश है कि जो आदिवासी प्रकृति के साथ सामंजस्य बना कर करोड़ों सालों से रहते आ रहे हैं. कहा कि आदिवासियों की जीवनशैली व परंपराएं आज भी प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि आज के समय में वैश्विक समस्या है. पूरा विश्व जलवायु परिवर्त्तन, जमीनों का क्षरण जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण प्रकृति के साथ खिलवाड़ है. यदि प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद कर दिया जाये, तो विश्व इन समस्याओं से निजात पा सकता है. इस बात को सभी को समझने और प्रकृति के अनुसार जीवन जीने की आवश्यकता है. संचालन डॉक्टर तेतरू उरांव ने किया. कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, कला संस्कृति समेत विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया गया. इस दौरान नृत्य व गीत की प्रस्तुत किया गया. मौके पर अध्यक्ष नेल्सन भगत, जगरनाथ उरांव, डीएओ विजय कुजूर, पूर्व डीडीसी पुनई उरांव, पूर्व डीडीसी डॉ परमेश्वर भगत, विनोद मिंज, प्रो प्रेमचंद उरांव, ह्यूमैन राइट बिहार सरकार के वीरेंद्र एक्का, राजी पड़हा के दीवान विश्वनाथ उरांव, सोनो मिंज, शांति मिंज, राष्ट्रीय प्रचारिका चिंतामनी उरांव, हिरोमनी बिलुंग, खड़िया समाज के जयराम उरांव, फौदा उरांव, केंद्रीय काथलिक सभा के अध्यक्ष सेतकुमार एक्का, फादर मनोहर खोया, फादर एल्फिज केरकेट्टा, फादर मूनसन बिलुंग, फादर कुलदीप, लोहरमैन उरांव, जीतेश मिंज, सोमा खड़िया, देवेंद्र लाल उरांव, शांति बिलुंग, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चैतू उरांव, सीता देची, जोवाकिम लकड़ा, कृष्णा भगत, मिस वर्ल्ड चंद्रमुनी कुजूर, मिस यूनिवर्स हीरामुनी कुजूर, महेंद्र जैक्सन आदि मौजूद थे.

पूर्वजों की परंपरा को जीवित रखने का संकल्प लें : डॉ पार्वती तिर्की

विशिष्ट अतिथि युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025 से सम्मानित डॉक्टर पार्वती तिर्की (असिस्टेंट प्रोफेसर राम लखन सिंह यादव कॉलेज, रांची) ने समाज के लोगों से अपनी आदिवासियत को बचाये रखने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि खुशी है कि आज विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर हम सभी एक जगह पर एकत्रित होकर अपने समाज के लिए चिंतन-मनन कर रहे हैं. हमारी भाषा, वेशभूषा और परंपरा हमारे पूर्वजों की देन है. कहा कि संकल्प लें कि हम अपने पूर्वजों की इस देन को हमेशा जीवित रखेंगे. हमारी भाषा, वेशभूषा और परंपरा ही हमारा अस्तित्व है, इसे बचाये रखने के लिए युवा वर्ग बढ़-चढ़ कर अपना योगदान दें. कार्यक्रम को लोहरमईन उरांव, नेल्सन भगत, अजीत कुमार हांसदा, चिंतामनी उरांव, प्रेमचंद उरांव, सोनू मिंज आदि ने भी संबोधित किया.

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