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अपने ही बेटे की मां होने का सबूत मांग रहा सीडब्ल्यूसी, जानें क्या है पूरा मामला

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
अपने ही बेटे की मां होने का सबूत मांग रहा सीडब्ल्यूसी, जानें क्या है पूरा मामला.
अपने ही बेटे की मां होने का सबूत मांग रहा सीडब्ल्यूसी, जानें क्या है पूरा मामला.
प्रभात खबर

गुमला (दुर्जय पासवान) : मां कहती रही. मेरा बेटा आपके पास है. मुझे दे दीजिए. सीडब्ल्यूसी ने नियम-कानून का हवाला देते हुए कहा कि पहले सबूत लाओ. इसके बाद बेटा मिलेगा.

दरअसल, तीन माह पहले रेशमा इंदवार अपने आठ माह के बेटे कुलदीप मिंज ने सड़क पर छोड़ दिया था. पालकोट पुलिस ने रोते हुए बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौंपा था. तब से बच्चा सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में है.

तीन महीने बाद जब रेशमा को पता चला कि उसका बेटा सीडब्ल्यूसी के पास है, तो वह अपने बेटे को लेने पहुंच गयी. बेटे को देखने व उसे गोद में लेने को तड़प उठी. शुक्रवार सीडब्ल्यूसी कार्यालय पहुंची.

वह गुहार लगाते हुए बेटे की मांग की. जब सीडब्ल्यूसी द्वारा सबूत मांगा गया, तो रेशमा ने कहा कि अस्पताल में जन्म से लेकर अन्य कागज को उसके पति ने आग लगा दिया. इसकी वजह से अब उसके पास कोई सबूत नहीं है.

सड़क पर रोता मिला था बच्चा

आठ अक्टूबर, 2020 को गुमला जिला के पालकोट प्रखंड स्थित बिलिंगबीरा रोड से 8 माह का लावारिस बच्चा (लड़का) मिला था. वह रो रहा था. मां को खोज रहा था. राहगीरों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. पालकोट थाना की पुलिस देर शाम को बिलिंगबीरा रोड पहुंची और बच्चे को थाना ले आयी.

उसके माता-पिता की खोज की गयी. माता-पिता नहीं मिले, तो पालकोट पुलिस ने बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौंप दिया. अभी बच्चा सीडब्ल्यूसी के संरक्षण में है. सीडब्ल्यूसी को लावारिस हालत में मिले बच्चे का नाम तक नहीं मालूम था.

सीडब्ल्यूसी ने बच्चे का नाम अभिषेक कुमार रख दिया. अब जब बच्चे की मां रेशमा सीडब्ल्यूसी पहुंची, तो उसने बताया कि उसके बेटे का असली नाम कुलदीप मिंज है.

प्रमाण पत्र जाना जरूरी : सीडब्ल्यूसी

सीडब्ल्यूसी की सदस्य सुषमा देवी, संजय भगत व डॉ अशोक मिश्रा ने बताया कि बच्चा लावारिस हालत में मिला था. उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि बच्चा किसका है. कुछ दिन पहले एक बुजुर्ग व्यक्ति ने उसे अपना पोता बताया था.

अब रेशमा इंदवार उसे अपना बेटा बता रही है. प्राथमिक जांच में पता चला है कि जो वृद्ध बच्चे को लेने आया था, रेशमा उसी की बहू है. इससे यह तो कह सकते हैं कि बेटा रेशमा का ही है, लेकिन इसका उसे सबूत देना होगा. तभी बच्चे को उसके हवाले किया जा सकता है.

गुमला सदर अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ था. अस्पताल से प्रमाण पत्र मिलेगा. इसके बाद बच्चे को उसकी मां को सौंप दिया जायेगा. जिस समय बच्चा मिला था, उसकी उम्र आठ माह थी. अब वह 11 माह का हो गया है.

Posted By : Mithilesh Jha

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