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Monsoon 2020 : देवघर समेत झारखंड के इन 8 जिलों में सूखे के आसार

Updated at : 09 Jul 2020 5:44 PM (IST)
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Monsoon 2020 : देवघर समेत झारखंड के इन 8 जिलों में सूखे के आसार

Monsoon 2020 in Jharkhand : रांची : मॉनसून 2020 के दौरान अब तक हुई बारिश झारखंड के 8 जिलों में सूखे के संकेत दे रहे हैं. राज्य के इन जिलों में 19 फीसदी से 56 फीसदी तक कम वर्षा हुई है. सबसे बुरा हाल देवघर का है. मॉनसून के दौरान अब तक 56 फीसदी कम बारिश हुई है. झारखंड में कुछ दिनों पहले तक सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी, लेकिन 9 जुलाई को रांची स्थित मौसम केंद्र ने जो रिपोर्ट जारी की है, वह बता रहा है कि राज्य में अब तक हुई बारिश सामान्य बारिश की तुलना में 2 फीसदी कम है.

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रांची : मॉनसून 2020 के दौरान अब तक हुई बारिश झारखंड के 8 जिलों में सूखे के संकेत दे रहे हैं. राज्य के इन जिलों में 19 फीसदी से 56 फीसदी तक कम वर्षा हुई है. सबसे बुरा हाल देवघर का है. मॉनसून के दौरान अब तक 56 फीसदी कम बारिश हुई है. झारखंड में कुछ दिनों पहले तक सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी, लेकिन 9 जुलाई को रांची स्थित मौसम केंद्र ने जो रिपोर्ट जारी की है, वह बता रहा है कि राज्य में अब तक हुई बारिश सामान्य बारिश की तुलना में 2 फीसदी कम है.

झारखंड में अब तक 283.7 मिलीमीटर वर्षा हुई है, जबकि इस दौरान 288.1 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी. देवघर, गुमला, खूंटी, पाकुड़, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में 11 फीसदी से 56 फीसदी तक कम वर्षापात हुआ है. सबसे कम वर्षा देवघर में हुई है. यहां मॉनसून के दौरान 275.4 मिलीमीटर की जगह 122.2 मिमी वर्षा हुई है. यह सामान्य से 56 फीसदी कम है.

इसके बाद गुमला का नंबर है, जहां 47 फीसदी कम बरसा है मॉनसून. 1 जून से 9 जुलाई के बीच इस जिले में आमतौर पर 316.5 मिमी वर्षा होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 167 मिमी बारिश हुई. संथाल परगना के पाकुड़ और साहिबगंज में मॉनसून के दौरान होने वाली वर्षा में 40-40 फीसदी की कमी दर्ज की गयी. साहिबगंज में 378.7 मिमी की जगह सिर्फ 225.4 मिमी वर्षा हुई. पाकुड़ में 325.8 मिमी की जगह 197 मिमी वर्षा हुई है.

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खूंटी में भी मॉनसून की बेरुखी देखी गयी है. यहां सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई है. 1 जून से 9 जुलाई के बीच यहां 313.6 मिलीमीटर वर्षा होती रही है, लेकिन इस वरर्फ 217.9 मिमी वर्षा हुई. सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा जिले में भी मॉनसून कम ही बरसा है. सरायकेला-खरसावां में 302.1 मिमी की जगह 244.1 मिमी वर्षा हुई है, तो सिमडेगा में 349.9 मिमी की जगह 283.2 मिमी वर्षा हुई है.

कई और जिले हैं, जहां अभी तक मॉनसून की बारिश को सामान्य कह सकते हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यदि इसी तरह के हालात रहे, तो वहां भी सूखे के आसार बन सकते हैं. पश्चिमी सिंहभूम में अब तक 11 फीसदी कम वर्षा हुई है, तो धनबाद में 9 फीसदी, लोहरदगा में 8 फीसदी, जामताड़ा एवं रांची में 7-7 फीसदी और गिरिडीह में 6 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है.

कोडरमा, पूर्वी सिंहभूम, चतरा, दुमका और बोकारो जिला ऐसे हैं, जहां मॉनसून अब तक सामान्य है. सिर्फ कोडरमा और दुमका में मामूली कमी दर्ज की गयी है. कोडरमा में 3 फीसदी कम वर्षा हुई है, तो दुमका में एक फीसदी. पूर्वी सिंहभूम और चतरा में 2 फीसदी अधिक वर्षा हुई है, तो बोकारो में जितनी वर्षा होनी चाहिए थी, उतनी ही वर्षा हुई है. एक जून से 9 जुलाई के बीच बोकारो में 274 मिमी वर्षा होती है, लेकिन इस बार 274.5 मिमी वर्षा हुई है.

उधर, कम से कम 6 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गयी है. ये जिले हैं : पलामू, गढ़वा, लातेहार, रामगढ़, गोड्डा और हजारीबाग. इन जिलों में पलामू में अब तक सबसे ज्यादा 422.3 मिमी वर्षा हुई है. पलामू में इस अवधि में 195 मिमी वर्षा होती है. लेकिन इस बार यहां सामान्य से रिकॉर्ड 117 फीसदी अधिक बारिश हुई है. इसके पड़ोसी जिला गढ़वा में सामान्य से 70 फीसदी अधिक वर्षा हुई है. गढ़वा में 212.6 की जगह इस वर्ष 361.2 मिमी वर्षा दर्ज की गयी है.

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पलामू से सटे लातेहार जिला पर भी इस बार मॉनसून मेहरबान है. यहां सामान्य से 63 फीसदी अधिक वर्षा हुई है. इस जिले में जून से 9 जुलाई की अवधि में आमतौर पर 260.8 मिमी वर्षा होती थी, इस बार 425.2 मिमी बारिश हुई है. रामगढ़, गोड्डा और हजारीबाग में क्रमश: 15, 10 और 10 फीसदी अधिक वर्षा हुई है. इसे सामान्य वर्षापात ही माना जाता है. मॉनसून के दौरान 10 फीसदी तक की कमी या बेसी को सामान्य ही माना जाता है. लेकिन, यदि आगे भी इसी तरह कम वर्षा हुई, तो ये जिले भी सूखाग्रस्त की श्रेणी में आ सकते हैं.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में केंद्र सरकार को झारखंड के 10 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा था. इससे 12 लाख किसान प्रभावित हुए थे. तब 23 अगस्त तक राज्य में 754.3 मिमी की जगह 541.6 मिमी वर्षा हुई थी. यह सामान्य से 28 फीसदी कम था. फलस्वरूप राज्य को भारी जलसंकट का सामना करना पड़ा था. झारखंड के 24 जिलों में से मात्र 7 जिलों में सामान्य बारिश हुई थी, जबकि 16 जिलों में सामान्य से कम वर्षा हुई थी. गोड्डा को मॉनसून की सबसे ज्यादा बेरुखी झेलनी पड़ी थी. यहां मॉनसून 62 फीसदी कम बरसा था.

Posted By : Mithilesh Jha

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