MahaShivratri 2021 : गुमला के टांगीनाथ धाम की है अपनी महता, शिवरात्रि के दिन हजारों श्रद्धालु करेंगे जलाभिषेक

MahaShivratri 2021, Jharkhand News, Gumla News, गुमला न्यूज : गुमला शहर से 70 किमी दूर डुमरी प्रखंड के मझगांव में टांगीनाथ धाम है. यहां कई पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर है. यहां की कलाकृतियां व नक्कासी 9वीं शताब्दी की है. टांगीनाथ धाम में यत्र-तत्र सैंकड़ों की संख्या में शिवलिंग है. यह मंदिर शाश्वत है. स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने टांगीनाथ धाम की रचना किये थे. यहां की बनावट, शिवलिंग व अन्य स्रोतों को देखने से स्पष्ट होता है कि इसे आम आदमी नहीं बना सकता है. त्रिशूल आज भी साक्षात है. त्रिशूल जमीन के नीचे कितना गड़ा है. यह कोई नहीं जानता है, लेकिन कहा जाता है कि 5 फीट से नीचे है. जमीन के ऊपर स्थित त्रिशूल के अग्र भाग में कभी जंग नहीं लगता है.
MahaShivratri 2021, Jharkhand News, Gumla News, गुमला न्यूज (दुर्जय पासवान) : गुमला शहर से 70 किमी दूर डुमरी प्रखंड के मझगांव में टांगीनाथ धाम है. यहां कई पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर है. यहां की कलाकृतियां व नक्कासी 9वीं शताब्दी की है. टांगीनाथ धाम में साक्षात भगवान शिव निवास करते हैं. वर्ष 1989 में पुरातत्व विभाग ने टांगीनाथ धाम के रहस्य से पर्दा हटाने के लिए अध्ययन किया था. जमीन की खुदाई की गयी थी. सोना और चांदी के आभूषण सहित कई बहुमूल्य समान मिले थे, लेकिन कतिपय कारणों से खुदाई पर रोक लगा दिया गया. इसके बाद टांगीनाथ धाम के पुरातात्विक धरोहर को खंगालने के लिए किसी ने पहल नहीं की. ऐसे खुदाई में जो बहुमूल्य सामग्री मिले थे. उसे डुमरी थाना के मालखाना में रखा गया है.
टांगीनाथ धाम में यत्र-तत्र सैंकड़ों की संख्या में शिवलिंग है. यह मंदिर शाश्वत है. स्वयं विश्वकर्मा भगवान ने टांगीनाथ धाम की रचना किये थे. यहां की बनावट, शिवलिंग व अन्य स्रोतों को देखने से स्पष्ट होता है कि इसे आम आदमी नहीं बना सकता है. त्रिशूल आज भी साक्षात है. त्रिशूल जमीन के नीचे कितना गड़ा है. यह कोई नहीं जानता है, लेकिन कहा जाता है कि 5 फीट से नीचे है. जमीन के ऊपर स्थित त्रिशूल के अग्र भाग में कभी जंग नहीं लगता है.
मुख्य पुजारी बैगा राम पुजार ने कहा कि टांगीनाथ धाम में 35 से 40 हजार श्रद्धालु पूजा करने आते हैं. महाशिवरात्रि की पूरी तैयारी हो गयी है. गुरुवार की सुबह 4 से 5 बजे तक पूजा के लिए मंदिर के पट खुले रहेंगे. 5 बजे शिव बारात निकाली जायेगी. मंदिरों का रंगरोगन कर सुंदर ढंग से सजाया गया है. श्रद्धालुओं के पूजा- पाठ को लेकर किसी प्रकार की परेशानी ना हो. इसका भी ख्याल रखा गया है. पूजा करने के लिए महिला और पुरुष के लिए अलग- अलग बैरिकेडिंग बनाया गया है. सभी श्रद्धालुओं को मास्क लगाना अनिवार्य है.
उन्होंने कहा कि गुरुवार की अहले सुबह शिव मंदिर का पट श्रद्धालुओं के पूजा- पाठ के लिए खोल दिये जायेंगे. जहां श्रद्धालु सुबह से शाम 5 बजे तक पूजा- अर्चना कर पायेंगे. शाम 5 बजे से शिव बारात निकाली जायेगी. जहां शिव शृंगार किया जायेगा. उसके बाद शिव पूजा होगी. इसके बाद शिव विवाह के बाद नगर भ्रमण का आयोजन किया गया है.
गुमला शहर से 28 किमी दूर घाघरा प्रखंड में देवाकी बाबाधाम है. यहां भगवान शिव का वाश है. केराझारिया नदी के तट पर देवाकी बाबाधाम है. यहां अति प्राचीन शिव मंदिर है. इस मंदिर से हिंदुओं की आस्था जुड़ी हुई है. जनश्रुति के अनुसार, महाभारत काल में पांडव के अज्ञातवाश के समय भगवान श्रीकृष्ण द्वारा पांच शिवलिंग की स्थापना की गयी थी. इसमें से एक शिवलिंग देवाकीधाम में है. इसलिए इस स्थल का नाम श्रीकृष्ण की मां देवकी के नाम पर देवाकी धाम पड़ा.
पांडवों के अज्ञातवाश के समाप्ति के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने देवाकीधाम में ही शंख बजाये थे. महाशिवरात्रि में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है. दिल से मांगी मुराद पूरी होती है. इसलिए यहां झारखंड के अलावा ओड़िशा, छत्तीसगढ़ व बिहार राज्य के श्रद्धालु पूजा करने आते हैं. देवाकी धाम घाघरा प्रखंड से तीन, गुमला शहर से 28, लोहरदगा से 28, सिमडेगा से 105 व रांची से 105 किमी दूर है.
देवाकी धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि महाशिवरात्रि को लेकर देवाकी बाबा धाम में साफ- सफाई से लेकर सभी तरह की व्यवस्था पूरी कर ली गयी है. श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी. इसका पूरा ख्याल रखा जायेगा. भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के मंदिर को फूलों से सजाया जायेगा. कोविड-19 को देखते हुए मेला का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है.
आवश्यकता के अनुसार दुकान लगाया जा रहा है. दुकानदार दुकान लगाने को लेकर तैयारी कर रहे हैं. पुजारी पूसा भगत ने कहा कि देवाकीधाम में करीब 10 हजार श्रद्धालु पूजा करने आते हैं. सुबह 5 बजे मंदिर का पट खुल जायेगा. श्रद्धालू कतार में खड़ा होकर जलाभिषेक कर सकेंगे.
Posted By : Samir Ranjan.
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