वंचितों की आवाज थे कर्पूरी ठाकुर : संतोष झा
Author Prabhat khabar news desk
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वंचितों की आवाज थे कर्पूरी ठाकुर : संतोष झा
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गुमला. सेव योर लाइफ संस्था के सचिव संतोष झा ने कहा है कि भारत की राजनीति में वंचितों के लिए आरक्षण के सूत्रधार जननायक कर्पूरी ठाकुर का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले के पितौंझिया जो आज कर्पूरी ग्राम के नाम से जाना जाता है. इस गांव से निकाल कर उन्होंने देश सेवा के लिए स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभायी. 26 महीना जेल में बितायें. 1952 में सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जाजपुर से पहली बार विधायक बन कर स्वतंत्र भारत में वंचितों के लिए आवाज उठायी. 1970-71 व 77-79 में जब वे मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने कई महत्वपूर्ण काम किये. जैसे वंचितों और महिलाओं के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण मैट्रिक की परीक्षा पास करने के लिए अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया. अंग्रेजी की अनिवार्यता के कारण ग्रामीण क्षेत्र के वंचित समाज के बच्चे अधिकांश हायर सेकेंडरी पास नहीं कर पाते थे और उच्चतम शिक्षा से वंचित युवा देश के अग्रणी श्रेणी में अपनी भूमिका नहीं निभा सकते थे और तो और बिहार में शराबबंदी की घोषणा की. उनका आरक्षण दिया जाना ही आगे बढ़ कर मंडल कमीशन के निर्माण का सूत्रधार बना. हम कह सकते हैं कि आज वंचित समाज को मिलने वाला आरक्षण कर्पूरी ठाकुर की देन है.
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