आदिवासी संस्कृति, परंपरा व सामाजिक एकता को मजबूत करता है ककड़ोलता : बंधन
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :04 Feb 2026 9:46 PM (IST)
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आदिवासी संस्कृति, परंपरा व सामाजिक एकता को मजबूत करता है ककड़ोलता : बंधन
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डुमरी. प्रखंड स्थित ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल सिरसी-ता नाले उर्फ ककड़ोलता परिसर में पांच फरवरी को आयोजित होने वाली सामूहिक प्रार्थना सह पूजा कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. इस पावन अवसर को लेकर क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल व्याप्त है. आदिवासी समाज के धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने बताया कि यह सामूहिक प्रार्थना सह पूजा कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा व सामाजिक एकता को मजबूत करने का काम करता है. इस वर्ष आयोजित सामूहिक प्रार्थना सह पूजा कार्यक्रम में बिहार से प्रमोद उरांव, पश्चिम बंगाल से भगवान दास मुंडा, छत्तीसगढ़ से मिटकू उरांव, असम से विश्वनाथ कुजूर, ओड़िशा से मनीलाल उरांव, नेपाल से पांचू उरांव, उत्तर प्रदेश से जितेंद्र उरांव, झारखंड से कमले उरांव, रवि तिग्गा, चिंतामणि उरांव, रंथू उरांव की अगुवाई में लगभग 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत गुरुवार सुबह नौ बजे से ककड़ोलता परिसर में विधिवत रूप से की जायेगी. पूजा-अर्चना का कार्य स्थानीय बैगा गहजू द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराया जायेगा. श्रद्धालुओं की सुविधा व सुचारु पूजा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन व आयोजन समिति की ओर से महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गयी है. सामूहिक पूजा के बाद श्रद्धालु धर्मकंडो, धर्म कुड़िया व डबनीचुवा जैसे पवित्र स्थलों की ओर प्रस्थान करते हैं. इन सभी स्थलों पर श्रद्धालु अपने पूर्वजों व समाज की सुख-शांति, आपसी भाईचारे और समृद्धि के लिए पूजा-पाठ व प्रार्थना करते हैं. मौके पर संजय उरांव, कमले किस्पोट्टा, चिंतामणि उरांव, सुशीला उरांव, रेणु तिर्की, संजय पहान, छटन उरांव, शीला उरांव, रतनी उरांव, अकलू भगत, जगरनाथ भगत, मनोज उरांव आदि मौजूद थे.
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