गुमला के 81 तालाब व बांध का अस्तित्व खतरे में, मत्स्य पालकों को हो रही परेशानी, नहीं ले रहा कोई सुध

Updated at : 03 Oct 2021 5:05 PM (IST)
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Karamtoli-pond-Gumla

तालाब (फाइल फोटो)

गुमला में मत्स्य विभाग के 81 तालाब व बांध का अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है. तालाब व बांध के जीर्णोद्धार नहीं होने से मत्स्य पालक किसानों को परेशानी हो रही है. वहीं, सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है. इसके बावजूद जिला प्रशासन व सरकार इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है.

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Jharkhand News (जगरनाथ पासवान, गुमला) : झारखंड के गुमला जिला में 81 ऐसे सरकारी तालाब व बांध हैं जिनका अस्तित्व खत्म होने के कगार पर है. इन 81 तालाब व बांध को बचाने के लिए 2017 में ही मत्स्य विभाग, गुमला द्वारा सरकार को पत्र लिखा गया था. लेकिन, उसपर पहल नहीं हुई. नतीजा, अब धीरे-धीरे 81 तालाब व बांध नक्शे से ही गायब हो रहे हैं.

इन 81 तालाब व बांधों में से कई का या तो अतिक्रमण कर लिया गया है या फिर विभागीय उदासीनता के कारण जीर्णोद्धार नहीं होने से सभी तालाब व बांध मिट्टी से भर गया या तालाब झाड़ियों का रूप ले लिया है. गुमला जिला के सरकारी तालाबों की बंदोबस्ती में हर साल लाखों रुपये राजस्व प्राप्त करने वाले जिला मत्स्य विभाग के पास सरकारी तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए फंड नहीं है.

जिले में अभी 365 सरकारी तालाब जीवित है. सभी सरकारी तालाब जिला मत्स्य विभाग, गुमला के अधीन है. मत्स्य विभाग द्वारा हर साल तालाबों की बंदोबस्ती की जाती है. जिससे विभाग को अच्छी-खासी राजस्व की प्राप्ति होती है. लेकिन, 365 तालाबों में कई तालाब ऐसे हैं जिसके जीर्णोद्धार की जरूरत है. जीर्णोद्धार के अभाव में उक्त तालाबों में मत्स्य पालकों को मत्स्य पालन में परेशानी हो रही है.

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बता दें कि जिले भर में सर्वाधिक सरकारी तालाब सदर प्रखंड गुमला में है. गुमला में 75 सरकारी तालाब है. वहीं, अन्य प्रखंडों की बात करें तो सिसई में 57, भरनो में 56, घाघरा में 41, पालकोट में 28, डुमरी में 22, बसिया में 22, बिशुनपुर में 18, कामडारा में 15, चैनपुर में 15, जारी में 11 एवं रायडीह प्रखंड में 5 सरकारी तालाब है. इन तालाबों में 150 तालाब एक एकड़ से कम भूमि पर है जबकि 215 तालाबों का क्षेत्रफल एक एकड़ से भी अधिक है. तालाबों का जीर्णोद्धार कराने में मत्स्य विभाग द्वारा रूचि नहीं लेने का मुख्य कारण है कि विभाग के पास फंड का अभाव है.

जीर्णोद्धार की मांग की गयी

मत्स्य विभाग सरकारी तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए भूमि संरक्षण विभाग, गुमला एवं जिला योजना विभाग पर आश्रित है. विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले 215 तालाबों की सूची भूमि संरक्षण विभाग एवं एक एकड़ से कम क्षेत्रफल वाले 150 तालाबों की सूची जिला योजना को सौंपा गया है. उक्त दोनों विभागों के पास तालाबों के जीर्णोद्धार की योजना होगी तो तालाबों का जीर्णोद्धार किया जायेगा.

जिले में घट गयी सरकारी तालाबों की संख्या

गुमला जिला में सरकारी तालाबों की संख्या घट गयी है. पूर्व में जिले में 500 से भी अधिक सरकारी तालाब था, लेकिन अब 365 सरकारी तालाब ही है. मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भरनो के एक एवं पालकोट के 7 सरकारी तालाबों पर स्थानीय लोगों द्वारा दावा करने के बाद उक्त तालाबों को सैरात से हटा दिया गया. इसके अलावा कई ऐसे तालाब भी है जो पूर्व में मत्स्य विभाग के ही अधीन था. लेकिन, जीर्णोद्धार के अभाव में वर्तमान में उक्त तालाबों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है. लेकिन, मत्स्य विभाग के पास भी ऐसे तालाबों का पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

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तालाब व बांध के नाम, जिनका अस्तित्व खत्म हो रहा है

गुमला जिला अंतर्गत हेसागुटू का कल्होटोली तालाब, लकैया तालाब, रेड़वा तालाब, ओकबा तालाब, ससिया तालाब, कुरूम बांध, जामडांग तालाब, जिरहुल तालाब वन व टू, अमलिया बांध, डाड़केसा बांध, मोरगांव का बोड़ोटोली बांध, पंडरानी तालाब, मझगांव तालाब, इरावाल तालाब, जैरागी तालाब, बंदुआ तालाब, नवाडीह तालाब, हुटाप तालाब, बड़ाकटरा तालाब, चुगलू में पांच तालाब, जिलिंगा बांध, केरकी वन व टू बांध, धनगांव तालाब, मुरूम सोकरा तालाब, मोकरो तालाब, सेमरटोली तालाब, गम्हरिया तालाब, कोयल नदी लांजी, कानाटोली तालाब, डुको बांध, ईचा तालाब, बुरहू तालाब, सरांगो वन व टू तालाब, कुगांव तालाब, मौनी तालाब, चेंगरी वन व टू तालाब, बेती बांध, कोटरी तालाब, पुटो तालाब, शिवराजपुर तालाब, कुगांव तालाब, जामगाई तालाब, नवाडीह तालाब, हालमाटी तालाब, चिरोडीह तालाब, हेलता केसर बांध, ओरया बांध, हेलता निरदाहा बांध, सातो बांध, बहागाड़ा तालाब, हेसराग बांध, रौन डोढ़ा पोखर, चापाटोली बांध, मोड़ टंगवा तालाब, चेड़ा तालाब, समदरी बेल बांध, अंकरी बांध सहित 81 तालाब व बांध है.

मत्स्य विभाग के पास तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए नहीं है फंड : DFO

इस संबंध में DFO दीपक कुमार सिंह ने कहा कि मत्स्य विभाग के पास तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए फंड नहीं है. इसलिए तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए प्रखंडवार तालाबों की सूची भूमि संरक्षण विभाग एवं जिला योजना को सौंपा गया है. ये दोनों विभाग अपने स्तर से देख लेंगे कि किस तालाब का जीर्णोद्धार करना है और किस तालाब का जीर्णोद्धार नहीं करना है.

Posted By : Samir Ranjan.

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