प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुनी बात, तो गुमला में हेलता के ग्रामीणों ने बनायी 3 किमी कच्ची सड़क

गुमला के बिशुनपुर प्रखंड स्थित हेलता क्षेत्र में पक्की सड़क नहीं होने से परेशान ग्रामीणों ने श्रमदान कर 3 किमी कच्ची सड़क बना दी. गांव तक जाने के लिए कोई सड़क नहीं था. पगडंडियों के सहारे ग्रामीण आवागमन करने को मजबूर थे. प्रशासन समेत जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगायी गयी थी.
Jharkhand News (बसंत साहू, बिशुनपुर, गुमला) : गुमला में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुनी बात, तो ग्रामीणों ने खुद अपने बूते तीन किमी कच्ची सड़क बना डाली. मामला बिशुनपुर प्रखंड के हेलता स्थित डीपाडीह करमटोली की है. सैकड़ों ग्रामीणों ने जेहन बैजनाथ मोड़ से लेकर गांव तक श्रमदान से तीन किलोमीटर कच्ची सड़क बनायी. अगर प्रशासन इसी सड़क को बनाती, तो लागत लाखों रुपये में होती, लेकिन गांव के लोगों ने सरकार का पैसा बचाते हुए खुद सड़क बनायी.
ग्रामीण रेजिना किंडो ने बताया कि हमलोगों का गांव पहुंचने का एकमात्र कच्ची मिट्टी की सड़क है. बरसात के दिनों में पानी से उक्त सड़क में गड्ढे बन जाते हैं जिससे पैदल गांव पहुंचना दूभर हो जाता है. वहीं, चंद्रमुन्नी उरांव ने कहा कि हमलोगों की समस्या तब और बढ़ जाती है, जब गांव में किसी भी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ती है और उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की जरूरत पड़ती है.
ग्राम प्रधान बंधन उरांव ने बताया कि गांव की पहुंच पथ खराब होने के कारण परेशानी तो काफी होती है, लेकिन गांव के कई लाभुकों को पीएम आवास का लाभ भी मिला है. गांव तक गाड़ी नहीं आने की स्थिति में वे सभी अपना घर नहीं बना पा रहे हैं. उक्त लोगों ने बताया कि मनरेगा से मिट्टी मोरम रोड के लिए बीडीओ को आवेदन दिया गया है. लेकिन, समस्याओं को देखते हुए हमलोगों ने गांव में बैठक कर आपसी सहयोग से सड़क में मिट्टी भरकर ठीक करने का प्रयास किया है.
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मौके पर सतीद उरांव, चंद्रमुनी उरांव, अनसतसिया उरांव, पिरिसिला तिर्की, अनिमा खेरवार, हेमनती खेरवार, कुर्सेला कुजूर, कलिसता उरांव, सरहूलीया लोहरा, तेज नारायण भगत, संजय बाड़ा विरेंद्र बाड़ा, विजय बड़ा, राजेश बाड़ा, विकटोर केरकेट्टा, रोपना उरांव, बिगन खेरवार, वाल्टर कुजूर, शीरील उरांव, महावीर उरांव, अमृत बाड़ा सहित गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने श्रमदान किया.
इस संबंध में बीडीओ छंदा भट्टाचार्य ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा आवेदन प्राप्त हुआ है, लेकिन मनरेगा के माध्यम से मिट्टी- मोरम रोड बनाने से ग्रामीणों को भविष्य के लिए लाभ नहीं होगी. क्योंकि बरसात आते ही सड़क की स्थिति जस की तस हो जायेगी. मैं ग्रामीणों से बैठक कर एनओसी प्राप्त करने के उपरांत उक्त सड़क को DMFT फंड से पक्की सड़क निर्माण कराने का हर संभव प्रयास करेंगं, ताकि ग्रामीणों को लंबे समय तक अच्छी सड़क का लाभ मिल सके.
Posted By : Samir Ranjan.
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