9 साल से गुमला के बीर उरांव की बिस्तर पर कट रही है जिंदगी, इलाज के लिए नहीं हैं पैसे

Jharkhand News, Gumla News : गुमला के डुमरडीह गांव निवासी बीर उरांव का पैर दिनों- दिन खराब हो रहा है. इलाज के लिए पैसा नहीं है. घर की स्थिति खराब है. राशन कार्ड नहीं है. न ही बीर को विकलांग पेंशन मिलता है. घर भी कच्ची मिट्टी का है. घर में शौचालय भी नहीं बना है. बीर ने कहा कि किसी प्रकार जी रहे हैं. सबसे ज्यादा संकट लॉकडाउन में हुआ. किसी प्रकार की कहीं से कोई मदद नहीं मिली. मैं लाचार हूं. ऐसे में बेटी की परवरिश भी चिंता सता रही है.
Jharkhand News, Gumla News, गुमला (दुर्जय पासवान) : गुमला के डुमरडीह गांव निवासी 45 वर्षीय बीर उरांव की जिंदगी विस्तर में कट रही है. दोनों पैर खराब है. चलने में लाचार है. इस कारण वह विस्तर पर ही पड़ा रहता है. शौच करने के लिए घसीटते हुए घर से बाहर निकलता है या फिर उसकी बेटी उसे सहारा देकर खेत ले जाती है. पति बीर की इस हालत पर पत्नी मजदूरी करने दूसरे राज्य चल गयी है. घर में बीर और उसकी 10 वर्षीय बेटी है. बीर की यह हालत हिमाचल प्रदेश में मजदूरी करने के दौरान 6 तल्ला भवन से नीचे गिरने से हो गया.
डुमरडीह गांव निवासी बीर उरांव का पैर दिनों- दिन खराब हो रहा है. इलाज के लिए पैसा नहीं है. घर की स्थिति खराब है. राशन कार्ड नहीं है. न ही बीर को विकलांग पेंशन मिलता है. घर भी कच्ची मिट्टी का है. घर में शौचालय भी नहीं बना है. बीर ने कहा कि किसी प्रकार जी रहे हैं. सबसे ज्यादा संकट लॉकडाउन में हुआ. किसी प्रकार की कहीं से कोई मदद नहीं मिली. मैं लाचार हूं. ऐसे में बेटी की परवरिश भी चिंता सता रही है.
बीर उरांव जब कमाने में असमर्थ हो गया, तो घर में खाने- पीने के लाले पड़ने लगे. इस संकट को देखते हुए बीर की पत्नी मजदूरी करने के लिए दूसरे राज्य पलायन कर गयी. बीर ने बताया कि साल में कुछ दिनों के लिए उसकी पत्नी गांव आती है. मजदूरी से कमाया हुआ पैसा देती है. जिससे किसी प्रकार घर का जीविका चल रहा है. कुछ बहुत खेत है. जिसे दूसरे किसान को साझा देकर बरसात में धान की खेती कराया हूं. इससे कुछ महीनों के लिए खाने पीने की समस्या नहीं रहती, लेकिन चावल खत्म होते ही संकट उत्पन्न हो जाती है.
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बीर उरांव हिमाचल प्रदेश में मजदूरी करता था. 9 साल पहले वह मजदूरी करने के दौरान 6 तल्ला भवन से नीचे गिर गया था, जिससे उसका दोनों पैर खराब हो गया. इलाज में घर का सारा पैसा खत्म हो गया. कंपनी के लोगों ने भी कुछ मदद की. चोट से उबरकर जिंदा तो बचा, लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ और दिव्यांग हो गया. बीर ने गुमला प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है. जिससे उसका इलाज हो सके और बेटी की परवरिश अच्छी से हो.
इस संबंध में समाजसेवी महेंद्र उरांव ने कहा कि पिछले 9 साल से बीर उरांव बिस्तर पर पड़ा है. स्थानीय प्रशासन समेत राज्य सरकार बीर उरांव की सहायत करे. प्रशासन को चाहिए कि एक बार पीड़ित परिवार से मिलकर राशन कार्ड, पीएम आवास, शौचालय और पेंशन बनवाने का सार्थक पहल करे, ताकि बीर उरांव समेत उसके परिवार का जीवन यापन ठीक से हो सके.
Posted By : Samir Ranjan.
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