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IED ब्लास्ट में गुमला के किसान रामदेव की हुई थी मौत, अब परिवार आर्थिक संकट में जी रहा,नहीं ले रहा कोई सुध

Updated at : 17 Jul 2022 10:00 PM (IST)
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IED ब्लास्ट में गुमला के किसान रामदेव की हुई थी मौत, अब परिवार आर्थिक संकट में जी रहा,नहीं ले रहा कोई सुध

वर्ष 2021 के जुलाई माह में भाकपा माओवादी के खिलाफ गुमला में पुलिस सर्च ऑपरेशन चला रही थी. पुलिस के दबाव में किसान रामदेव मुंडा जंगल में रास्ता दिखा रहा था. तभी आइइडी ब्लास्ट हुआ और उसकी मौत हो गयी. उसके बाद रामदेव के परिवार के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गयी है. पर, कोई सुध नहीं ले रहा है.

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Jharkhand News: गुमला जिले के कुरूमगढ़ थाना स्थित केरागानी जंगल में एक साल पहले (14 जुलाई, 2021) भाकपा माओवादी द्वारा जंगल में बिछाये गये IED ब्लास्ट में बारडीह गांव के किसान रामदेव मुंडा (40 वर्ष) की मौत हो गयी थी. रामदेव की मौत के बाद नक्सली घटना को देखते हुए प्रशासन ने मृतक के बड़े बेटे को सरकारी नौकरी, मुआवजा और परिवार को सरकारी सुविधा देने का वादा किया था. लेकिन, गुमला प्रशासन द्वारा मात्र 20 हजार रुपये रामदेव के अंतिम संस्कार, पत्नी को विधवा पेंशन एवं राशन कार्ड बनवा कर दिया. लेकिन, अभी तक बेटे को सरकारी नौकरी नहीं मिली है. न ही किसी प्रकार का नकद मुआवजा राशि दी गयी. परिवार के लोग पुलिस अधिकारियों से मिलते हैं या फोन करते हैं तो सिर्फ आश्वासन मिल रहा है. परिवार का जीविका कैसे चलेगा. इसकी चिंता किसी को नहीं है. अभी परिजन आर्थिक संकट में जी रहे हैं.

पत्नी को हुआ कैंसर, बच्चों की पढ़ाई पर संकट

पत्नी फुलमनी देवी को मार्च 2022 में कैंसर हो गया है. उसका बाल झड़ रहा है. उसके पास इलाज के लिए भी पैसा नहीं है. लाखों रुपये इलाज में खर्च है. तीन बेटे सूरज मुंडा इंटर पास कर गया. नामांकन के लिए पैसा नहीं है. मंझला बेटा अमरदीप मुंडा सखुवापानी स्कूल में नौवीं कक्षा व छोटा बेटा राजदीप मुंडा लुथेरान स्कूल गुमला में आठवीं कक्षा में पढ़ता है. परंतु इन दोनों बच्चों के स्कूल में पढ़ाने के लिए पैसा नहीं है. रामदेव जब जीवित थे तो गांव में खेतीबारी कर बच्चों को पढ़ाने के अलावा घर की जीविका चलाते थे. परंतु उनकी मौत से परिवार संकट में आ गया. रिश्तेदारों से मदद लेकर परिवार की जीविका चल रही है. खाने-पीने में रिश्तेदार मदद कर रहे हैं.

प्रशासन मदद करें, नहीं तो मैं बीमारी से मर जाऊंगी : पत्नी

मृतक रामदेव मुंडा की पत्नी फुलमनी देवी ने कहा कि पति की मौत के बाद परिवार में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. जीविका के लिए गुमला शहर के चेटर टुकूटोली में रिश्तेदार के घर में रह रहे हैं. 2021 के दिसंबर में बीमार हुई तो डॉक्टर से इलाज कराया. मुंह से खून निकल रहा था. डॉक्टरी इलाज के बाद कुछ दिन मुंह से खून निकलना बंद हो गया. मार्च 2022 में पुन: इलाज करायी तो कैंसर के लक्षण मिला. रांची रिम्स भेजा गया. रिम्स में जांच करायी तो कैंसर निकला. परंतु, संकट यह है कि अब इलाज कैसे कराये. घर में खाने के लिए पैसा नहीं है तो इलाज के लिए कहां से लाये. अगर प्रशासन मदद नहीं करेगा तो बीमारी से मैं मर जाऊंगी. उन्होंने पति की मौत के एवज में बेटे सूरज मुंडा को सरकारी नौकरी देने की मांग की. जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके.

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जबरन पुलिस हमें जंगल ले गयी थी, जिससे पिता की मौत हुई : पुत्र

मृतक रामदेव के पुत्र राजदीप मुंडा ने बताया कि 2021 के जुलाई माह में हमलोग घर पर थे. तभी सुरक्षा बल घर में घुस आये. सात-आठ युवकों को जबरन जंगल ले जा रही थी. तभी मेरे पिता रामदेव मुंडा व बड़े पिता रामलाल मुंडा भी बच्चों को पुलिस द्वारा जंगल ले जाने पर वे साथ में चल पड़े. पुलिस हमें जंगल ले गयी. ताकि जंगल का रास्ता बता सके. 13 जुलाई की दोपहर को जंगल में पुलिस ले गयी. रातभर जंगल में रखा. बिस्किट खाने को दिया. रातभर सो नहीं पाये. 14 जुलाई की सुबह पुन: रास्ता बताने के लिए पुलिस हमलोगों को जंगल के रास्ते ले जा रही थी. पुलिस फोर्स पीछे चल रही थी. जबकि गांव के लोगों को आगे-आगे चलने के लिए दबाव बना रहे थे. इसी दौरान केरागानी जंगल में मेरे पिता रामदेव मुंडा का पैर जंगल में बिछे आइइडी में पड़ गया. जिससे बम के साथ उड़ गये और उनकी मौत हो गयी थी. इस हादसे में हमलोग भी घायल हुए थे. परंतु इलाज के बाद हमलोग ठीक हो गये.

प्रशासन वादा से मुकरा, अबतक नहीं की मदद

घटना के बाद प्रशासन मामले को दबाने का प्रयास किया. गांव वालों को भनक तक नहीं लगने दी कि रामदेव मुंडा आइइडी बम से उड़ गया है. शव को छिपाकर गुमला लाया गया था. पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव पहुंचा तो गांव वालों को घटना की जानकारी हुई थी. उस समय ग्रामीण व जनप्रतिनिधि प्रशासन से मिलकर मदद मांगे थे. प्रशासन ने वादा किया था. पीड़ित परिवार को सरकारी नियम के तहत मदद मिलेगी. परंतु घटना के एक साल हो गया. प्रशासन ने मदद नहीं किया. सिर्फ आश्वासन मिल रहा है. अभी पीड़ित परिवार ऐसी संकट में है कि अगर मदद नहीं मिली तो फुलमनी के साथ कुछ भी हो सकता है. तीन भाइयों की पढ़ाई भी बंद हो सकती है.

15 लाख का इनामी नक्सली मारा गया था

14 जुलाई 2021 को बम ब्लास्ट में किसान रामदेव मुंडा की मौत हो गयी थी. कोबरा बटालियन का एक खोजी कुत्ता भी शहीद हुआ था. इसके बाद भी पुलिस का अभियान नहीं रूका था और 15 जुलाई 2021 को केरागानी जंगल में छिपकर बैठे 15 लाख के इनामी भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता बुद्धेश्वर उरांव को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था.

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परिवार के लोगों से मिलकर जानेंगे पूरी समस्या : एसपी

वहीं, एसपी डॉ एहतेशाम वकारीब ने कहा कि परिवार के लोगों से मैं एकबार मिल लेता हूं. क्या सरकारी सुविधा मिली है. इस जान लेता हूं. अभी क्या समस्या है. इसे समझ लेता हूं, ताकि परिवार की मदद की जा सके. वहीं, सिसई की प्रखंड प्रमुख मीना देवी ने प्रशासन से अनुरोध करते हुए कहा कि स्वर्गीय रामदेव मुंडा के परिवार की मदद करें. क्योंकि रामदेव की मौत के बाद परिवार संकट में जी रहे हैं. फुलमनी के कैंसर की बीमारी का इलाज जल्द हो. बेटों की पढ़ाई न रूके. इसके लिए पहल हो. बड़े बेटे को सरकारी नौकरी दी जाए.

रिपोर्ट : दुर्जय पासवान, गुमला.

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