अंडमान-निकोबार में 30 वर्षों से फंसे हैं फुचा महली, गुमला आने के लिए नहीं है पैसे, बेटे ने जिला प्रशासन से मदद की लगायी गुहार

Updated at : 02 Jul 2021 5:35 PM (IST)
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अंडमान-निकोबार में 30 वर्षों से फंसे हैं फुचा महली, गुमला आने के लिए नहीं है पैसे, बेटे ने जिला प्रशासन से मदद की लगायी गुहार

Jharkhand News (गुमला) : झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत गुमला प्रखंड के फोरी गांव निवासी फुचा महली (60 वर्ष) 30 वर्षों से अंडमान-निकोबार में फंसा हुआ है. जब वे 30 वर्ष के थे. तब रोजी-रोजगार की तलाश में अंडमान-निकोबार चले गये. अंडमान पहुंचने के बाद उन्हें आश्रय व खाने के लिए भोजन तो मिला, लेकिन मेहताना नहीं दिया गया. अभी भी वे एक घर में माली का काम कर रहे हैं. जहां उन्हें सिर्फ तीन वक्त का खाना व रहने के लिए एक कमरा मिला है.

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Jharkhand News (गुमला) : झारखंड के गुमला जिला अंतर्गत गुमला प्रखंड के फोरी गांव निवासी फुचा महली (60 वर्ष) 30 वर्षों से अंडमान-निकोबार में फंसा हुआ है. जब वे 30 वर्ष के थे. तब रोजी-रोजगार की तलाश में अंडमान-निकोबार चले गये. अंडमान पहुंचने के बाद उन्हें आश्रय व खाने के लिए भोजन तो मिला, लेकिन मेहताना नहीं दिया गया. अभी भी वे एक घर में माली का काम कर रहे हैं. जहां उन्हें सिर्फ तीन वक्त का खाना व रहने के लिए एक कमरा मिला है.

फुचा गुमला अपने परिवार के पास आना चाहते हैं, लेकिन उनके पास पैसे नहीं है. जिससे वे गुमला आ सके. इधर, फुचा महली की पत्नी लुंदी देवी (58 वर्ष) वर्षों से उनके आने का इंतजार कर रही है. 30 वर्षों से वह अपने पति से नहीं मिली है. एक बार वह अपने पति को देखना चाहती है. उसके पैर धोना चाहती है.

वहीं, फुचा का बेटा सिकंदर महली भी अपने पिता को देखना चाहता है. उसे गले लगाना चाहता है. उसका हाथ पकड़ना चाहता है. सिकंदर ने कहा कि जब मैं एक साल का था. तभी मेरे पिता रोजी-रोजगार की तलाश में अंडमान-निकोबार चले गये. इसके बाद से वापस नहीं आये.

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सिंकदर कहते हैं कि पिछले 30 वर्षों से पिता के आने का इंतजार कर रहा हूं. काफी खोजबीन के बाद पिता का पता चला है. उनसे फोन पर बात हुई है. मेरे पिता हमारे पास गुमला आना चाहते हैं, लेकिन हमलोग गरीब हैं. खेतीबारी कर किसी प्रकार जीविका चलाते हैं. हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम अंडमान-निकोबार जाकर अपने पिता को ला सके. बेटे ने गुमला प्रशासन से मदद की गुहार लगायी है.

अंडमान में फुचा है, ऐसा पता चला

समाजसेवी सरोज महली ने प्रभात खबर कार्यालय को फोन कर बताया कि फोरी गांव का फुचा महली जो अब वृद्ध हो चुके हैं. वे अंडमान-निकोबार में फंसे हुए हैं. वे गुमला आना चाहते हैं, लेकिन गरीबी व आर्थिक तंगी फुचा को उसके परिवार से मिलने में बाधा बनी हुई है.

अंडमान-निकोबार में रहने वाले विनोद कुमार से संपर्क करने से पता चला कि फोरी निवासी फुचा महली अंडमान-निकोबार में हैं. विनोद महली ने फोन पर बताया कि फुचा महली एक घर में माली का काम कर रहे हैं. वे अब वृद्ध हो चुके हैं. उनका पहचान पत्र व आधार कार्ड अंडमान-निकोबार का ही बन गया है, लेकिन अब वे अपने घर गुमला जाना चाहते हैं.

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Posted By : Samir Ranjan.

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