झारखंड : गुमला में सात साल से धूल फांक रहा खतियान की कॉपी देने वाला कंपैक्ट बॉक्स मशीन, लोग परेशान

Updated at : 26 Jun 2023 6:21 AM (IST)
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झारखंड : गुमला में सात साल से धूल फांक रहा खतियान की कॉपी देने वाला कंपैक्ट बॉक्स मशीन, लोग परेशान

गुमला में खतियान की कॉपी देने वाला कंपैक्ट बॉक्स मशीन पिछले सात साल से धूल फांक रहा है. यह मशीन उद्घाटन के बाद से शुरू नहीं हुई है. क्योंकि पुराने समाहरणालय भवन को पूर्व में ही कंडम घोषित किया जा चुका है. इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

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गुमला, अंकित चौरसिया : गुमला स्थित पुराने समाहरणालय भवन के जिला अभिलेखागार के रिकार्ड रूम में मॉडर्न रूम बनाया गया है, जहां कंपैक्ट बॉक्स मशीन लगायी गयी है. लेकिन बीते सात वर्ष से कंपैक्ट बॉक्स मशीन बेकार पड़ी है. यह मशीन उद्घाटन के बाद से शुरू नहीं हुई है. क्योंकि पुराने समाहरणालय भवन को पूर्व में ही कंडम घोषित किया जा चुका है. उक्त रिकार्ड रूम की दीवार व सिलिंग से पानी लिकेज हो रहा है, जिससे कंपैक्ट बॉक्स में जमीन संबंधी दस्तावेज नहीं रखा गया है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है. एक दिन में जिला अभिलेखागार में 100 से अधिक जमीन संबंधी दस्तावेजों के लिए आवेदन पड़ते हैं, परंतु ऑफलाइन होने से महज 20 लोगों का ही काम हो पाता है. इससे लोगों को खतियान व जमीन के अन्य कागजातों को निकालने में परेशानी होती है.

12 अप्रैल 2016 को हुआ था मॉडर्न रिकार्ड रूम का उद्घाटन

डिजिटल इंडिया लैंड रिकार्ड मॉडर्न लाइजेशन प्रोग्राम के तहत मॉडर्न रिकार्ड रूम का उद्घाटन 12 अप्रैल, 2016 में तत्कालीन राज्य ग्रामीण विकास मंत्री व तत्कालीन विधायकों द्वारा किया गया था. उस समय रिकार्ड रूम के शिलान्यास होने से लोगों में जमीन संबंधी दस्तावेज आसानी से मिलने की आस बढ़ी था. उस समय उक्त कार्यालय में ऑनलाइन कार्य के प्रति सजगता दिखाते हुए चार कंप्यूटर सिस्टम, एक फोटो कॉपी मशीन व केबिन बनाया गया था, जो इन सात सालों में धूल फांकने का काम कर रहा है.

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चालू होने पर लोगों को होता काफी फायदा

कंपैक्ट बॉक्स चालू रहने से एक ही क्लिक पर जमीन का खतियान कंप्यूटर स्क्रीन पर आ जायेगा, जिसे सर्टिफाइट कर आवेदक को कुछ ही देर में दिया जा सकता है. इससे लोगों को अभिलेखागार में महीनों चक्कर नहीं लगना पड़ता और समय की बचत होती. वहीं मॉडर्न रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों को कंप्यूटराइज्ड करने से छेड़छाड़ की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जायेगी और दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे. क्योंकि ऑफलाइन में खतियान बनाने के दौरान कई सौ वर्ष पूर्व के दस्तावेज है, जो पटलने पर फट जाते हैं.

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