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तेलेस्फोर पी टोप्पो ने अपने गांव व परिवार के लिए कुछ नहीं किया, पर ईसाई समाज को दी मजबूती

Updated at : 04 Oct 2023 10:16 PM (IST)
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तेलेस्फोर पी टोप्पो ने अपने गांव व परिवार के लिए कुछ नहीं किया, पर ईसाई समाज को दी मजबूती

लिवंस ने अपने जीवन काल में कहा था कि छोटानागपुर में एक अनुशासित व सुसंगठित कलीसिया की स्थापना हो. पूर्व कार्डिनल तेलेस्फोर ने लिवंस के इस सपने को साकार करने के उद्देश्य से आर्चबिशप जीवन की यात्रा शुरू की थी.

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गुमला, दुर्जय पासवान : हीरा बरवे के नाम से प्रसिद्ध चैनपुर प्रखंड (गुमला) के झड़गांव में 15 अक्तूबर 1939 को जन्मे पूर्व कार्डिनल तेलेस्फोर प्लासिदियुस टोप्पो आज हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने अपने जीवन में कलीसिया के विकास के लिए काम किया. कलीसिया के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया. कार्डिनल रहते तेलेस्फोर पी टोप्पो अपने गांव व परिवार के लिए कुछ नहीं कर सके, परंतु, इसाई समाज को उन्होंने मजबूती दी, जिसका असर है आज के दिन में गुमला धर्मप्रांत सबसे मजबूत धर्मप्रांतों में से एक है. 21 अक्तूबर 2003 को जब वे कार्डिनल बने थे, तो पूरे झारखंड के कलीसिया समुदाय के लोग झूम उठे थे. क्योंकि वे इस माटी गुमला के रहने वाले थे. 1985 ई को जब छोटानागपुर के प्रेरित फादर कोंसटंट लिवंस का शतवर्षीय जुबली समारोह मनाया जा रहा था. इस घड़ी में आर्च बिशप के रूप में तेलेस्फोर का रांची आगमन हुआ था. लिवंस ने अपने जीवन काल में कहा था कि छोटानागपुर में एक अनुशासित व सुसंगठित कलीसिया की स्थापना हो. पूर्व कार्डिनल तेलेस्फोर ने लिवंस के इस सपने को साकार करने के उद्देश्य से आर्चबिशप जीवन की यात्रा शुरू की थी. उन्होंने महाधर्माध्यक्ष बन कर कलीसिया को संगठित करने का काम किया था. पूर्व कार्डिनल ने गुमला, सिमडेगा, खूंटी, रांची में तेजी से कलीसिया का विस्तार किये थे.

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  • गुमला, सिमडेगा, खूंटी व रांची में कलीसिया मजबूत है, तो यह पूर्व कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो की देन

बहुजन हिताय बहुजन सुखाय से ही विकास संभव

ईसाइयों के धर्मगुरु पूर्व कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो 2011 को गुमला पहुंचे थे. उस समय वे अपने पैतृक गांव झरगांव (चैनपुर प्रखंड) गये थे. जहां बहन मरियम टोप्पो के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद गुमला पहुंच कर बिशप हाउस में विश्राम के दौरान प्रभात खबर से एक खास इंटरव्यू में उन्होंने झारखंड के परिपेक्षय पर लंबी बात की थी.

पद्मश्री डॉ रामदयाल मुंडा के निधन से झारखंड की संस्कृति पर क्या असर पड़ेगा?

डॉ मुंडा जैसे शिक्षाविद् इस झारखंड प्रदेश में कोई नहीं है. वे भगवान के वरदान थे. उनके निधन से भारी क्षति हुई है. नि:संदेह झारखंड की संस्कृति पर इसका असर पड़ेगा. क्योंकि उनकी कमी को पूरा नहीं किया जा सकता है. लेकिन मुंडा के सपनों को अब हम झारखंडियों को अक्षुण्ण बना कर रखने की जरूरत है.

झारखंड प्रदेश के हालात, मिली-जुली सरकार व भ्रष्टाचार से विकास में हो रही बाधा को आप किस नजरिये से देखते हैं?

विकास हो रहा है, लेकिन जिस गति से विकास होना चाहिए. वह गति अभी तक पकड़ नहीं पायी है. सही बात है, मिल-जुली सरकार से प्रदेश के हालात ठीक नहीं है. न्याय के बिना शांति नहीं और शांति के बिना न्याय नहीं मिल सकता. झारखंड प्रदेश के संपूर्ण विकास के लिए स्थायी सरकार का होना जरूरी है.

दो-तीन वर्षों से देखा जा रहा है कि लुटेरे, चोर व बदमाशों के निशाने पर चर्च रहा है, इसकी वजह क्या है?

अशिक्षित व बुरे लत में फंसे लोग ऐसा कर रहे हैं. चर्च प्रार्थना घर है, जहां स्वास्थ्य, शिक्षा व विकास पर जोर दिया जाता है. लोगों को जागरूक करने का काम किया जाता है.

गुमला, लोहरदगा व सिमडेगा जिले में नशापान व नक्सलवाद विकास में बड़ा बाधक है. इसे कैसे दूर किया जा सकता है?

इसके लिए जागरूकता जरूरी है. गुमला धर्मप्रांत में नशापान के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. पहले देश के विकास में कास्ट सिस्टम सबसे बड़ी बाधा थी. अभी भी काफी हद तक यह सिस्टम है. लेकिन नशापान व नक्सलवाद भी इसमें जुड़ गया है. वर्ष 2012 में 31 जनवरी से लेकर आठ फरवरी तक बेंगलुरू में इन विषयों ने शिविर हुआ था. इसमें देशभर के बिशप व इसाई धर्मगुरु शिरकत किये थे. इन बुराइयों से कैसे दूर रह सकते हैं. इस पर मंथन हुआ था.

Also Read: एशिया के पहले आदिवासी बिशप कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो का गुमला के इस गांव में हुआ था जन्म स्व तेलेस्फोर पी टोप्पो का संक्षिप्त जीवन परिचय
  • नाम : तेलेस्फोर प्लासिदियुस टोप्पो

  • जन्म तिथि : 15 अक्तूबर 1939

  • जन्म स्थान : झड़गांव, चैनपुर पारिश (गुमला धर्मप्रांत)

  • प्राथमिक शिक्षा : झड़गांव अपर प्राइमरी बारवे नगर

  • मैट्रिक : लिवंस बरवे उच्च विद्यालय चैनपुर

  • इंटर व बीए : संत जेवियर कॉलेज, रांची

  • एमए : रांची विश्वविद्यालय, रांची

  • दर्शन शास्त्र : संत अलबर्ट सेमिनरी रांची

  • ईश शास्त्र : पेंटिकिल अर्बन विश्वविद्यालय रोम, इटली

  • पुरोहित के रूप में अभिषेक : तीन मई 1969 हिमेलरिड, स्विट्जरलैंड

  • नियुक्ति : सहायक शिक्षक संत जोसेफ उवि तोरपा

  • संस्थापक डायरेक्टर : लिवंस वोकेशनल केंद्र तोरपा

  • बिशप : दुमका में आठ जून 1978 ई

  • सहायक बिशप : रांची में आठ नवंबर 1984 ई

  • आर्च बिशप : सात अगस्त 1985 ई

  • कार्डिनल : 21 अक्तूबर 2003 ई से 2018 तक

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