संत इग्नासियुस के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें : फादर फ्लोरेंस

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31 गुम 1 में मंच में बैठे अतिथि | Prabhat Khabar Network

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गुमला के संत इग्नासियुस प्लस टू हाईस्कूल में संत इग्नासियुस लोयोला का पर्व दिवस धूमधाम से मनाया गया। छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

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गुमला: संत इग्नासियुस प्लस टू हाईस्कूल गुमला में शुक्रवार को संत इग्नासियुस लोयोला का पर्व दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया. इस अवसर पर स्कूल परिसर स्थित स्वर्गीय फादर पीपी वनफल सभागार में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि संत इग्नासियुस के रेक्टर फादर फ्लोरेंस कुजूर, प्रधानाध्यापक फादर मनोहर खोया, एराउज के निदेशक फादर एल्फिज केरकेट्टा, फादर कुलवंत मिंज, फादर अगुस्टीन सहित अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से संत इग्नासियुस लोयोला के प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया.

मौके पर मुख्य अतिथि संत इग्नासियुस के रेक्टर फादर फ्लोरेंस कुजूर ने अपने संदेश में विद्यार्थियों से संत इग्नासियुस के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने व ईश्वर के प्रति कृतज्ञ बने रहने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि संत इग्नासियुस का जीवन हम सबों के लिए प्रेरणादायी है. वे हर चीज को बेहतर तरीके से करने के लिए सोचते थे और इसके लिए वे मेहनत भी करते थे.

संत इग्नासियुस लोयोला हमेशा ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहे. संत बनने से पहले जब वे एक सैनिक थे. वैश्विक युद्ध के बीच पंपलोना के सैनिक बनकर उन्होंने अपने देश के लिए लड़ाई लड़ी. लेकिन लड़ाई के बीच गंभीर रूप से घायल हो गये. यहीं से उनके महान संत बनने की गाथा भी शुरू हुई थी. इलाज के दौरान महान संतों और ख्रीस्त की जीवनी पढ़ने के बाद उनके मन में हिंसा के प्रति घृणा होने लगी.

उन्होंने ईश्वर से इसका पाश्चताप किया. उन्होंने ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट किया. उन्होंने एक नये जीवन की शुरूआत की और ईश्वर के प्रति कृतज्ञ रहते हुए मानव सेवा में अपना जीवन गुजार दिया. उन्होंने विद्यार्थियों को संत इग्नासियुस लोयोला से प्रेरणा लेकर मानव सेवा के लिए प्रेरित किया.

इससे पूर्व संत इग्नासियुस प्राइमरी सेक्शन, हाईस्कूल व इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुती दी गयी. मौके पर संत इग्नासियुस के बर्सर फादर जयवंत सोरेंग, फादर प्रफुल्ल एक्का, नेम्हा रेणुका मिंज, कुलदीप प्रताप बा, रश्मि प्रभा प्रसाद, जस्टिन टोप्पो, सिमोन कुजूर, पूनम टोप्पो, राजेश कुमार राय, जेवियर डुंगडुंग, हीरालाल नाग, नीलम प्रकाश लकड़ा, विंदेश्वर कुमार, कपिल जोस एक्का, अजमीर किंडो, अरविंद केरकेट्टा, अनमोल टोपनो, विक्रम प्रसाद साहू, अनुभा कुजूर, मधु किरण कुजूर, पवन किंडो, सुरेश बेक, संतोष्ज्ञ कुमार साहू, शशि लकड़ा, सीमा एक्का, अनामिका खलखो, ज्ञानलता लकड़ा, दिव्य किशोरी कुल्लू, दिव्य गुलाब टोप्पो, रश्मि तिर्की, प्रियंका लकड़ा, मनोज कुजूर, सुमित कुमार सिंह, बसंत साहू, अमित प्रभा एक्का, अंजली मेरी केरकेट्टा, फरहन अरजू, अमोर तिर्की, जाफर इमाम, शिवकुमार साहू, मुकेश ठाकुर, श्याम सुंदर ठाकुर, नजारियुस कुजूर, पात्रिक केरकेट्टा, ज्योति लकड़ा, भलेरिया खाखा, विनोद लकड़ा, विजय तिर्की, फ्रांसिस्का एक्का सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी मौजूद थे. जीवन में सही चयन करने के लिए अपने अंदर की आवाज को सुनें : फादर मनोहर खोया स्कूल के प्रधानाध्यापक फादर मनोहर खोया ने विद्यार्थियों से कहा कि हम अपने जीवन में सही चयन करने के लिए अपने अंदर की भी आवाज को सुने. जिससे हम सही निर्णय ले सके. हम हमेशा दुनियावी मोह माया में फंसे रहते हैं और अपने अंतर्रात्मा की की आवाज नहीं सुन पाते हैं. संत इग्नासियुस लोयोला ने अपने अंतर्रात्मा की आवाज सुनी और वे हिंसा को छोड़कर योद्धा से एक संत बनें. उनका का आदर्श वाक्य था कि ईश्वर की महत्तर महिमा के लिए. मतलब, हम जो भी करें. ईश्वर की महत्तर महिमा के लिए करें. जिस प्रकार संत इग्नासियुस ने अपने हर काम को ईमानदारी पूर्वक ईश्वर की महत्तर महिमा के लिए किया और एक महान संत बनें. आप भी संत इग्नासियुस की भांति ही किसी भी काम को पूरे समर्पण की भावना से करें. मेहनत करें, लगन से पढ़ें और शिक्षकों का सम्मान करें : फादर कुलवंत फादर कुलवंत मिंज ने अपने संदेश में विद्यार्थियों व शिक्षकों से संत इग्नासियुस स्कूल में अपने छात्र जीवन की यादों को साझा किया. उन्होंने कहा कि वे इसी विद्यालय के छात्र रहे हैं. शिक्षार्जन के दौरान शिक्षकों का भरपूर सहयोग मिला. उनके मार्गदर्शन के बदौलत आज वे रोम में कार्यरत हैं. उन्होंने कहा कि खुशी है कि जिस विद्यालय में वे एक छात्र थे. आज उसी विद्यालय में अतिथि के रूप में है. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यहां शिक्षक हर तरह से विद्यार्थियों का जीवन उज्ज्वल बनाने के लिए प्रयासरत रहते हैं. यही इस विद्यालय की खासियत है. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मेहनत करें. लगन से पढ़े और शिक्षकों का आदर-सम्मान करें. आपको अपने जीवन में सफलता जरूर मिलेगी.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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