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बिशुनपुर को चमरा लिंडा ने बनाया गढ़ इस बार फिर होगी भाजपा से टक्कर, जानें इस विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा

Updated at : 07 Nov 2019 6:15 AM (IST)
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बिशुनपुर को चमरा लिंडा ने बनाया गढ़ इस बार फिर होगी भाजपा से टक्कर, जानें इस विधानसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा

दुर्जय पासवान गुमला : 1977 में बिशुनपुर अनुसूचित जनजाति के कोटे से विधानसभा सीट बनी थी. तब से अब तक इस क्षेत्र की जनता ने नौ विधायक चुने. बिशुनपुर के पहले विधायक कांग्रेस के कार्तिक उरांव थे. इस सीट पर उरांव व भगत जाति के विधायकों का सबसे ज्यादा कब्जा रहा. लेकिन दो चुनावों से […]

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दुर्जय पासवान
गुमला : 1977 में बिशुनपुर अनुसूचित जनजाति के कोटे से विधानसभा सीट बनी थी. तब से अब तक इस क्षेत्र की जनता ने नौ विधायक चुने. बिशुनपुर के पहले विधायक कांग्रेस के कार्तिक उरांव थे.
इस सीट पर उरांव व भगत जाति के विधायकों का सबसे ज्यादा कब्जा रहा. लेकिन दो चुनावों से चमरा लिंडा यहां काबिज हैं. बिशुनपुर सीट पर चार बार कांग्रेस व तीन बार भाजपा के विधायक जीत चुके हैं. फिलहाल में यह सीट झामुमो के खाते में है. कांग्रेस के स्व भुखला भगत सबसे अधिक तीन बार विधायक चुने गये थे.
यहां से चमरा लिंडा दो बार विधायक रहे चुके हैं और इस बार के हैट्रिक की उम्मीद से चुनाव मैदान में उतरेंगे. बिशुनपुर सीट से अब तक एक भी महिला विधायक नहीं चुनी गयी है. जबकि कई महिला उम्मीदवार किस्मत अाजमा चुकी हैं. इस विधानसभा क्षेत्र के विकास की बात करें तो अब भी कई समस्याएं हैं. जिसका समाधान नहीं हो पाया है.
आज भी पलायन इस क्षेत्र की पहचान है. कहने को यह बॉक्साइड नगरी है. लेकिन इसका लाभ गरीबों से ज्यादा यहां के नेताओं व पूंजीपतियों को मिलता रहा है. इसी क्षेत्र में विकास भारती है. इसके बाद भी यहां से पलायन जारी है. गांवों की स्थिति खराब है. नक्सल यहां कुंडली मारकर बैठे हुए हैं. कई गांव में विधायक तो दूर यहां के प्रशासनिक पदाधिकारी भी नहीं गये हैं.
तीन महत्वपूर्ण कार्य जो हुए
आंजनधाम में सोलर सिस्टम पानी व शेड का निर्माण हुआ
विकास भारती में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र की स्थापना हुई
देवाकी व कुगांव को जोड़ने वाला पुल बना
तीन महत्वपूर्ण काम जो नहीं हुए
घाघरा के लरंगो दक्षिणी कोयल नदी में पुल का निर्माण नहीं हुआ
अल्युमिनियम कारखाना की स्थापना नहीं अभी तक नहीं
आदिम जनजातियों के पलायन रोकने की पहल नहीं की गयी
पिछले तीन चुनाव का रिकाॅर्ड
जीते : जीते : चंद्रेश उरांव (भाजपा), प्राप्त वोट : 24099
हारे : चमरा लिंडा (निर्दलीय), प्राप्त वोट : 23530
तीसरा स्थान : शिव कुमार भगत (कांग्रेस) : 21846
जीते : जीते : चमरा लिंडा (आरएकेपी), प्राप्त वोट : 44461
हारे : शिवकुमार भगत (कांग्रेस), प्राप्त वोट : 27751
तीसरा स्थान : भिखारी भगत, भाजपा, प्राप्त मत : 23470
जीते : जीते : चमरा लिंडा (झामुमो), प्राप्त वोट : 55851
हारे : समीर उरांव (भाजपा), प्राप्त वोट : 45008
तीसरा स्थान : अशोक उरांव, निर्दलीय, प्राप्त वोट: 11994
मैं काम करता हूं, इसलिए जनता मेरे साथ : चमरा
बिशुनपुर विधानसभा क्षेत्र के झामुमो विधायक चमरा लिंडा ने कहा कि मैं जनता के लिए काम करता हूं. उनके बीच रहता हूं. उनकी हर दुख तकलीफ को दूर करता हूं. इसलिए जनता मेरे साथ है. मैंने बिशुनपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़ने वाले सभी क्षेत्रों में काम किया है. जनता की मांग पर डीप बोरिंग, स्कूल भवन, धुमकुड़िया, पीसीसी सड़क, चबूतरा, अखड़ा का निर्माण कराया हूं.
चमरा जाति के नाम पर राजनीति करते हैं : अशोक
2014 में तीसरे नंबर पर रहे अशोक उरांव निर्दलीय लड़कर 11990 वोट लाये थे. इसबार वे भाजपा में व टिकट के दावेदार है. वर्तमान विधायक के कार्यकाल को फलॉप बताते हुए श्री उरांव ने कहा कि चमरा लिंडा 10 साल विधायक रहे. कभी क्षेत्र में नहीं िदखे. सिर्फ जाति की राजनीति करते हैं. स्कूल खोला, परंतु अध्यक्ष अपनी पत्नी को बनाया और अनट्रेंड टीचरों को रखा है. वह बिशुनपुर के स्थायी निवासी भी नहीं हैं.
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