बेसहारा छोड़ दिया है पिता को

गुमला : सिसई प्रखंड स्थित पंडरानी गांव के तेम्बा उरांव, उम्र 62 वर्ष, को इंदिरा आवास व वृद्धावस्था पेंशन के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है. किसी को उसके बुढ़ापे पर तरस नहीं आ रहा है. उसके जवान बेटे पकलू उरांव व गंदुर उरांव पहले ही उसे छोड़ कर दूसरे राज्य चले […]
गुमला : सिसई प्रखंड स्थित पंडरानी गांव के तेम्बा उरांव, उम्र 62 वर्ष, को इंदिरा आवास व वृद्धावस्था पेंशन के लिए सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है. किसी को उसके बुढ़ापे पर तरस नहीं आ रहा है. उसके जवान बेटे पकलू उरांव व गंदुर उरांव पहले ही उसे छोड़ कर दूसरे राज्य चले गये हैं, जहां वे अपनी पत्नी व बच्चों के साथ आराम की जिंदगी जी रहे हैं.
तेम्बा की पत्नी बुटन देवी की वर्ष 2013 के नवंबर माह में निधन हो गया है. तेम्बा का कहना है कि पत्नी की मौत के बाद वह एकदम अकेला हो गया है. गांव में मिट्टी का घर है. प्रशासन से उसे काफी उम्मीद है. उम्मीद के साथ बीडीओ के पास इंदिरा आवास व पेंशन के लिए आवेदन दिया था. लेकिन अभी तक स्वीकृत नहीं हुआ. शनिवार को डीसी वीणा श्रीवास्तव से मिल कर अपना दुखड़ा सुनाने आये थे. लेकिन डीसी भी नहीं मिलीं. उन्होंने कहा कि इस बुढ़ापे में अब चला भी नहीं जाता है. लाठी टेक कर पंडरानी से गुमला आये. लेकिन खाली हाथ लौट रहे हैं.
मजदूरी करने के लिए शरीर में ताकत नहीं बची : तेम्बा वर्ष 1989 से 1995 तक आरइओ विभाग में अनुबंध पर काम किया. यहां भी उसके साथ छल किया गया. अनुबंध का पैसा उसे नहीं मिला. जबकि वर्ष 2012 में डीडीसी ने पैसा देने का निर्देश दिया था. आरइओ से काम छोड़ने के बाद किसी प्रकार मजदूरी कर अभी तक जी रहा है. तेम्बा ने कहा कि अब शरीर में इतनी ताकत नहीं बचा है कि वह मजदूरी कर पेट पाल सके. घर में बैठा रहता है. कोई आ कर कुछ खाने को दे जाता है.
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