शराबबंदी के बावजूद धड़ल्ले से बिक रही है शहर में शराब

Published at :23 Jan 2018 5:11 AM (IST)
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शराबबंदी के बावजूद धड़ल्ले से बिक रही है शहर में शराब

जब सरकार ही बेच रही शराब, तो फिर कैसे हो शराबबंदी गुमला में शराब की बोतल प्रिंट रेट से अधिक में बिक रही गुमला : घरेलू कलह व अपराध की जड़ शराब है. ऐसा सभी कहते हैं. पुलिस भी इसी तर्क को मानती है. अगर शराब न हो, तो घरेलू कलह व अपराध कम होगा. […]

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जब सरकार ही बेच रही शराब, तो फिर कैसे हो शराबबंदी
गुमला में शराब की बोतल प्रिंट रेट से अधिक में बिक रही
गुमला : घरेलू कलह व अपराध की जड़ शराब है. ऐसा सभी कहते हैं. पुलिस भी इसी तर्क को मानती है. अगर शराब न हो, तो घरेलू कलह व अपराध कम होगा. इसलिए गुमला पुलिस की मुहिम शराबबंदी है. शराब की बिक्री बंद होगी, तो कोई इसका सेवन नहीं करेगा और जब कोई सेवन नहीं करेगा, तो नशे में होने वाले अपराध पर अंकुश लगेगा. इसी सोच के साथ गुमला जिले के सभी 15 थानों में शराबबंदी मुहिम चल रही है.
थाना प्रभारी खुद इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं. इधर, कुछ दिनों में पुलिस शराब की कई भट्ठियों को नष्ट कर चुकी है. हजारों लीटर शराब नष्ट की है. पुलिस के लगातार अभियान से सड़क के किनारे व बाजार में शराब बेचने वालों में हड़कंप है. कई लोगों ने शराब बेचना छोड़ दूसरा धंधा कर लिया है.
पुलिस की यह मुहिम कहीं न कहीं कुछ हद तक सफल मानी जा रही है. लेकिन अभी भी बड़ा सवाल है कि पुलिस जब शराब बेचना बंद करा रही है, तो फिर होटलों में क्यों बिक रही है. वह भी सरकारी शराब.
गुमला जिले में पांच स्थानों पर सरकारी शराब की दुकान है. गुमला के लक्ष्मण नगर, पालकोट, बसिया, भरनो व घाघरा प्रखंड में एक-एक सरकारी दुकान है. हर रोज लाखों रुपये की शराब बिक रही है.
पीने वाले मान नहीं रहे. पुलिस देसी शराब बंद करा रही है, तो लोग विदेशी पी रहे हैं. अब हम बात करें सरकारी दुकान में शराब खरीदने की. यहां बिना नियम-कानून के शराब बिक रही है. प्रिंट दर से ज्यादा पैसा लिया जा रहा है. ऊपर से कम उम्र के बच्चे भी शराब लेने दुकान पहुंच जाते हैं. प्रिंट रेट की बात करें. कुछ दिन पहले डीसी श्रवण साय ने बैठक ली थी, जिसमें उन्होंने उत्पाद विभाग को कहा था कि नियम के तहत शराब बेचे.
प्रिंट रेट से ज्यादा न लें. लेकिन प्रभात खबर गुमला कार्यालय को कुछ शराब शौकिन लोगों ने फोन कर बताया कि शराब की बोतल में कुछ और रेट लिखा है, लेकिन उत्पाद विभाग वसूल कुछ और रहा है.
उत्पाद अधीक्षक रंजन जी से फोन पर बात हुई. उन्होंने बताया कि पुराना स्टॉक व नये स्टॉक में रेट का अंतर है. उन्होंने होटलों में सरकारी शराब बिकने के सवाल पर कहा : गुमला में तो मीडिया को पैसा पहुंच रहा है. कोई हमें सूचना दें, तो हम कार्रवाई करें.
उत्पाद अधीक्षक की बात कई सवाल खड़े कर रहे हैं. वे खुद काे बेदाग और मीडिया को दागदार बता रहे हैं. अधीक्षक ने यह भी बताया. गुमला में एक ही गोदाम है, जहां देसी व विदेशी शराब रखी जाती है. अब यहां सवाल यह है कि पुलिस की शराबबंदी मुहिम का क्या होगा. जब जिले की पांच दुकानों में ही शराब बिक रही है, वह भी आदिवासी बहुल गुमला जिले में, जिसके कई इलाकों में शराब बेचने पर पाबंदी है.
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