किसान की मौत पूरे राज्य का मुद्दा बनेगा

Published at :09 Dec 2017 8:45 AM (IST)
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किसान की मौत पूरे राज्य का मुद्दा बनेगा

डीसी व एसपी को नहीं इसकी जिम्मेदारी, अब सीएम को लेनी होगी गुमला : सिसई प्रखंड के मुरगू पंचायत स्थित नकटीटोली कामता गांव के किसान बुद्दू उरांव की आत्महत्या पूरे राज्य का मुद्दा बनेगा. किसान की मौत की जिम्मेवारी डीसी व एसपी को नहीं, सीएम को लेनी होगी. कांग्रेस किसी भी स्थिति में चुप बैठने […]

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डीसी व एसपी को नहीं इसकी जिम्मेदारी, अब सीएम को लेनी होगी

गुमला : सिसई प्रखंड के मुरगू पंचायत स्थित नकटीटोली कामता गांव के किसान बुद्दू उरांव की आत्महत्या पूरे राज्य का मुद्दा बनेगा. किसान की मौत की जिम्मेवारी डीसी व एसपी को नहीं, सीएम को लेनी होगी.

कांग्रेस किसी भी स्थिति में चुप बैठने वाली नहीं है. किसान की जान बचायी जा सकती थी, लेकिन सरकार के सिस्टम की थोड़ी से चूक के कारण किसान बुद्दू को अपनी जान देनी पड़ी. ये बातें अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सह छत्तीसगढ़ के प्रभारी डॉक्टर अरुण उरांव ने कही. वे शुक्रवार को कामता गांव पहुंचे थे. उन्होंने किसान के परिवार से मुलाकात की. करीब एक घंटा तक वे पीड़ित परिवार से बात की और धान जलने से लेकर आत्महत्या व इसके बाद प्रशासन द्वारा मिली सुविधा की जानकारी ली. पीड़ित परिवार से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि झारखंड में कामता गांव के बुद्दू उरांव की मौत कोई पहली घटना नहीं है. राज्य में कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन सरकार इसकी जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है. सरकार से किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है, जिसके कारण किसान आत्महत्या को विवश हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब बुद्दू का धान व मड़ुवा जला और उसने मौखिक रूप से मदद मांगी. उस समय अगर प्रशासन थोड़ा सजग रहता, तो आज बुद्दू को अपनी जान नहीं देनी पड़ती. उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसो दिलाया है. अगर सरकार उनकी सुध नहीं लेती है, तो पूरे राज्य में आंदोलन होगा.

हिम्मत रखिए, हम

आपके साथ हैं

डॉ अरुण उरांव दिन के 10:30 बजे गांव पहुंचे. गांव पहुंचने पर पत्नी बुद्धनी देवी, लखनऊ से मजदूरी कर लौटे बेटा केश्वर उरांव, छोटा बेटा शनि उरांव, मृतक के बड़े भाई बहुरा उरांव व अन्य लोगों से बात की. किसान के परिजनों ने बताया कि अगर प्रशासन सूचना के बाद सहायता करता, तो आज बुद्दू नहीं मरता.

धान बेच कर पूंजी जमा की थी, फिर उसी पैसा से इस वर्ष खेती की था, लेकिन आग ने पूरे धान को जला दिया. इसपर अरुण उरांव ने कहा कि आप लोग हिम्मत रखिये, हम आपके साथ हैं. बुद्दू की मौत के जिम्मेवार लोगों को छोड़ा नहीं जायेगा.

स्पीकर दिनेश उरांव ही सरकार है

अरुण उरांव ने बातचीत में परिजनों से पूछा कि कौन-कौन मिलने आये थे. परिजनों ने बताया कि स्पीकर दिनेश उरांव आये थे. इसपर अरुण उरांव ने कहा कि स्पीकर इसी गांव के रहने वाले हैं. स्पीकर बड़ा पद है. दिनेश उरांव ही सरकार हैं. हमलोग अभी सरकार में नहीं है. आपका जो भी कल्याण करना है, सरकार को करना है. आपने जो आवेदन दिया है, उसपर क्या कार्रवाई हुई, उसे देखना पड़ेगा. बातचीत में अरुण उरांव ने नागपुरी भाषा में अपना परिचय दिया.

निबंधक पीड़ित किसान के परिवार से मिले

झारखंड राज्य कृषि विभाग के सचिव के निर्देश पर शुक्रवार को विभाग के निबंधक विजय कुमार ने मुरगू नकटी कामता गांव का दौरा किया. दौरे के क्रम में बुद्दू उरांव व बहुरा उरांव के खलिहान में जला धान का मुआयना किया. बुद्दू उरांव के परिवार से मुलाकात कर ढाढ़स बंधाया. सीएम राहत कोष से एक लाख रुपये व जला धान की क्षतिपूर्ति मुआवजा, विधवा पेंशन व पीएम आवास की स्वीकृति के लिए अनुशंसा करने की बात कही. उन्होंने कहा कि फसल बीमा हुआ होता, तो तुरंत फसल बीमा का चेक मिल जाता है. मौके पर अशोक कुमार, जितेंद्र सिंह, दामोदर सिंह व राजेंद्र राम गोप मौजूद थे.

धान बेच कर बेटे की शादी करेंगे

मृतक की पत्नी बुद्धनी देवी ने कहा कि छोटा बेटा शनि उरांव की शादी करनी है. उसके पिता मरने से पहले कह रहे थे कि किसी अच्छी लड़की को देख कर इसी साल शादी करा देंगे. इसके लिए वे पैसा भी जमा करने की बात कह रहे थे. उन्होंने कहा था कि इसबार अच्छी फसल हुई है. कुछ फसल को बेच कर बेटे की शादी धूमधाम से करेंगे, लेकिन बेटे की शादी की इच्छा लिये बुद्दू मर गये. इसपर अरुण उरांव ने कहा कि शनि की शादी में मैं हर संभव मदद करूंगा.

प्रखंड व अंचल प्रशासन सजग नहीं है

बुद्दू की जान बच सकती थी. अगर सिसई प्रखंड व अंचल प्रशासन सजग रहता. प्रशासन ने बुद्दू की जीते जी मदद नहीं की. लेकिन बुद्दू की मौत के बाद प्रशासन के सभी नियम-कानून बदल गये. पीड़ित परिवार को 200 किलो चावल दिया. इतना ही नहीं, अब सरकारी सहायता देने के लिए प्रशासन गांव की दौड़ लगा रहा है. सीओ सुमंत तिर्की सूझबूझ से काम लिया होता और घर की स्थिति को देखते हुए पहले ही सहायता कर देते, तो आज किसान की मौत नहीं होती और यह मुद्दा नहीं गरमाता.

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