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बसखोरिया गांव आज भी विकास से वंचित, मूलभूत सुविधाओं की कमी से ग्रामीण त्रस्त

Updated at : 06 Nov 2025 11:22 PM (IST)
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बसखोरिया गांव आज भी विकास से वंचित, मूलभूत सुविधाओं की कमी से ग्रामीण त्रस्त

बरसात में टापू में बदल जाता है गांव, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का अभाव

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विकास की बात चाहे केंद्र सरकार से हो या राज्य सरकार से, लेकिन बसखोरिया गांव आज भी आधुनिक सुविधाओं से दूर है. बसंतराय प्रखंड मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर दूर बाघाकोल पंचायत के अंतर्गत यह गांव सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव की कुल आबादी लगभग 800 है और यह मुख्य रूप से मांझी समुदाय का बसोबास है. ग्रामीण आज भी पगडंडी के सहारे प्रखंड मुख्यालय तक आते-जाते हैं. बरसात के मौसम में यह रास्ता बहुतेरे स्थानों पर कट जाते हैं और गांव टापू में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों का जीवन कठिन हो जाता है. स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव यहाँ की सबसे बड़ी समस्या है. गंभीर रूप से बीमार होने पर या प्रसूति के समय महिलाओं को खाट पर लादकर प्रखंड मुख्यालय लाया जाता है. शिक्षा व्यवस्था भी अत्यंत सीमित है. गांव के स्कूल में केवल एक पारा शिक्षक द्वारा पठन-पाठन किया जा रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. ग्रामीण मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन अधिकांश लोग भूमिहीन हैं. इस कारण कई जरूरतमंद ग्रामीण प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. वृद्धा पेंशन और अन्य सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ भी कई लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है. स्थानीय ग्रामीण नरी मांझी, लेमो मांझी, जगदीश मांझी, छेदी रामू मांझी और अन्य ने बताया कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन आज तक विकास कार्यों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. बरसात के दिनों में ग्रामीणों को जरूरी सामान और दवाइयां बाजार से लाने में कठिनाई होती है. गांव के मुखिया शंभू मांझी ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए जमीन की कमी एक बड़ी बाधा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सड़क निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध करायी जाये, तो निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जा सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं की लाभकारी पहल गांव तक पहुंचने में देरी ने उनकी जिंदगी को कठिन बना दिया है. ग्रामीणों की यह पीड़ा प्रशासन और सरकार के लिए चेतावनी है कि विकास की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रह जाएं, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप में ग्रामीणों तक पहुंचाया जाये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANJEET KUMAR

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