हनवारा थाना क्षेत्र के कुशमहारा गांव स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वृंदावन धाम के कथावाचक अभिषेक शास्त्री जी महाराज श्रीमद्भागवत मां काली के बारे में वर्णन किया. कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना संसार का सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म है, यह भगवान का वांग्मय स्वरूप है, जो जन्म जन्मांतर के पुण्य उदय होने पर प्राप्त होता है. हर मनुष्य को समाज में अच्छा काम करना चाहिए. भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि कर्म ही प्रधान है. बिना कर्म कुछ संभव नहीं होता है. जो मनुष्य अच्छा कर्म करता है, उसे अच्छा फल मिलता है. बुरे कर्म करने वाले को बुरा फल मिलता है. इसलिए सभी को अच्छा कर्म ही करना चाहिए. भागवत कथा सुनने से पाप नष्ट होता है. भागवत कथा एक ऐसा अमृत है कि इसका जितना भी पान किया जाये तब भी तृप्ति नहीं होती. कहा कि भक्ति के दो पुत्र हैं, एक ज्ञान दूसरा वैराग्य भक्ति बड़ी दुखी थी. उसके दोनों पुत्र वृद्धावस्था में आकर भी सोये पड़े हैं. वेद वेदांत का घोल किया गया, किंतु वे नहीं जागे. यह बड़ा विचित्र और सुक्ष्म विचार का विषय है. भक्ति बड़ी दुखी थी कि यदि वे नहीं जागे, तो यह संसार गर्त में चला जाएगा. भागवत कथा पौराणिक होती है. नारद जी ने भक्ति सूत्र की व्याख्या करते हुए भी भक्ति को प्रेमारूपा बताया है. कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया. श्रीमद्भगवत कथा का श्रवण करने के लिए के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी.
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