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आदिवासी समाज ने हर्षोल्लास के साथ मनाया सोहराय का सकरात पर्व

बेंझातुनज में तीरंदाजी प्रतियोगिता और सांस्कृतिक अनुष्ठान

बोआरीजोर संथाली टोला में आदिवासी समुदाय ने सोहराय का सकरात पर्व बड़ी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया. परंपरा के अनुसार पर्व की शुरुआत बेंझातुनज में जोग मांझी नारायण बेसरा द्वारा तीर चला कर निशाना साधने से हुई. इस अवसर पर प्रवासी डॉक्टर धुनी सोरेन ने भी तीर चलाया और इसके बाद बारी-बारी से सभी ग्रामीणों ने निशाना साधा. डॉक्टर धुनी सोरेन ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि महिला, पुरुष और बच्चे साप्ताहिक रूप से मांझी स्थान पर पूजा अर्चना करें तथा अपनी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखें. सोहराय का सकरात पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस पर्व को दो दिनों तक मनाया जाता है. पहला दिन हाकु-काटकोम कहलाता है, जब लोग तालाब में मछली पकड़ते हैं और मांस, मछली तथा अन्य पकवान बनाकर भोजन करते हैं. दूसरे दिन स्नान कर अपने इष्ट देवता की पूजा की जाती है, पूर्वजों को याद किया जाता है और नए बर्तन एवं चूल्हे पर भोजन तैयार किया जाता है.

सिंदरा परंपरा और सम्मान समारोह

शिकार की खोज में ग्रामीण पहाड़, जंगल और खेत-खलियान जाते हैं. आदिवासी समुदाय इसे सिंदरा कहता है. बेंझातुनज में सफलतापूर्वक निशाना साधने वाले ताला सोरेन को ग्रामीणों ने सम्मान स्वरूप कंधे पर उठाकर सम्मानित किया. इस अवसर पर मुंशी सोरेन, बुधराम मुर्मू, बबलू मरांडी, अनिल मरांडी, नट्टूलाल सोरेन, सनीराम मुर्मू सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.

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