अच्छी पहल. दो हजार एकड़ में खड़ी धान फसल बचाने में जुटे जमनी-पहाड़पुर के किसान
सिंचाई के अभाव में मुरझाने लगी धान की फसल को बचान के प्रयास में जमनी पहाड़पुर के ग्रामीण जुट गये हैं. नदी में मेढ़ बनाकर पांच मौजा की सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल को बचाने की कवायद शुरू हो गयी है.
गोड्डा : शासन-प्रशासन की उदासीन रवैये को देखते हुए जमनी पहाड़पुर के किसानों ने खेतों में सूख रही धान की फसल को बचाने में जुट गये हैं. श्रमदान कर ग्रामीण नदी में मेढ़ बनाकर खेतों में पानी पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. सिंचाई के आभाव में दो हजार एकड़ में लगी धान की फसल को जिंदा रखने की कवायद में किसान श्रमदान कर रहें हैं. पांच पंचायतों के करीब दस मौजा के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए जमनी पहाड़पुर के पास के नदी में मेढ़ बांधने का कार्य किसानों ने शुरू दिया है. पटवन की समस्या से परेशान किसानों ने खेतों तक नदी का पानी पहुंचाने का बीड़ा उठाया है.
नदी में करीब एक किमी मेढ़ बनाने की जुगत में किसानों द्वारा श्रमदान किया जा रहा है. कुदाल से प्रतिदिन सैंकड़ों किसान मेढ़ को बांधने में पसीना बहा रहें है. किसानों ने बताया कि एक बार करीब दस किमी मेढ़ बना देने से ही पटवन की समस्या दूर हो जायेगी, ऐसी बात नहीं है. नदी में पानी का धार से मेढ़ टूट जायेगा. मेढ़ को पुन: बांध कर पानी की धार को नहर की ओर मोड़ने का काम किसानों द्वारा प्रतिदिन किया जायेगा.
श्रमदान कर नदी में मेढ़ बनाते किसान व पानी के अभाव में मुरझाने लगी धान की फसल. फोटो। प्रभात खबर
10 माैजा के खेतों में लगी धान की फसल को मिलेगी सिंचाई की सुविधा
बालू उठाव से बनी परेशानी
किसानों ने बताया कि जमनी पहाड़पुर के आसपास के नदियों से अनवरत बालू उठाव के कारण सिंचाई की समस्या उत्पन्न हुई है. बालू का उठाव करने से पानी का रुख विपरीत दिशा में चला गया है. इस कारण परेशानी का सबब बन गया है.
इन पंचायतों के खेतों में पहुंचेगा पानी
किसानों ने बताया कि जमनी पहाड़पुर पंचायत, घाट पहाड़पुर पंचायत, भतडीहा पंचायत, मारखन पंचायत व कन्हवारा पंचायत के हजारों एकड़ खेती की जमीन तक नदी का पानी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है. इन पंचायतों के जमनी पहाड़पुर गांव, बनवीर टोला, नेमोतरी, घाट जमनी, हरिपूर, हरलाल टोला, हरिपुर-गरबन्ना, मोहनपुर, घाट जोगनाडीह, परसा सहित सैंकड़ों गांव के खेतों में लगा फसल पटवन के अभाव में मुरझाने लगी है. फसल को बचाने का एक प्रयास किया जा रहा है.
कुदाल व टोकरी के साथ सैकड़ों की संख्या में किसानों ने मिलकर बहाया पसीना
कझिया वीयर चालू नहीं रहने से बढ़ी परेशानी
किसानों ने बताया कि कझिया बीयर चालू नहीं रहने से पटवन की समस्या उत्पन्न हुई है. घाट जमनी के पास नहर है. मेढ़ को बांध कर नदी का पानी घाट जमनी के नहर में गिराने का कार्य किया जा रहा है. इस नहर से खेतों तक पानी पहुंच जायेगा. नहर से पानी लेकर किसान खेतों में पटवन कर सकेंगे.
इन किसानों की मेहनत लायेगी रंग
मेढ़ को बांधने में जुटे किसान शंभू कापरी, राजेश पंजियारा, वकील मांझी, अनिरुद्ध पंजियारा, गुरुदेव पंजियारा, प्रमोद पंजियारा, बिष्णु माल, जयकांत पंजियारा, गुही पंजियारा, सीतारात यादव, सिविल पंजियारा सहित क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की मेहनत रंग लायेगी.
क्या कहते हैं क्षेत्र के किसान
” किसानों को सिंचाई की समस्या बनी रहती है. सरकार द्वारा किसानों के हित में कोई कार्य नहीं किया जा रहा है. पटवन की समस्या हर वर्ष बनी रहती है.”
– शंभु कापरी
” पानी के अभाव में खेत में लगा फसल मर जाती है. धान नहीं उपजेगा तो परिवार को क्या खिलायेगें. पानी को खेत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.”
– राजेश पंजियारा
” बड़ी मुश्किलों से खेती कार्य हो पा रहा है. प्रयास है कि पटवन के अभाव में खेत में लगी फसल बरबाद ना हो. इसके लिये प्रयास की जा रही है.”
– सुधीर पंजियारा
” सिंचाई का रोना हर वर्ष लगा रहता है. एक किमी मेढ़ बांध कर खेतों को सिंचित करने का एक प्रयास सफल करने में किसान घंटों मेहनत कर रहे हैं.”
– चिंतामणी कापरी
