गरीबी से गयी बुधदेव मिर्धा की जान

Published at :02 Feb 2016 6:55 AM (IST)
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गरीबी से गयी बुधदेव मिर्धा की जान

बीपीएल श्रेणी में रहने के बावजूद नहीं मिला था लाल कार्ड और मनरेगा कार्ड महगामा के मोहनपुर गांव का रहने वाला था बुधदेव मिर्धा फूस के घर में गुजार दी जिंदगी , इंदिरा आवास का भी नहीं मिला लाभ महगामा : सरकार व व्यवस्था लाख विकास के बड़े-बड़े दावे करे. लेकिन सच्चाई यही है कि […]

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बीपीएल श्रेणी में रहने के बावजूद नहीं मिला था लाल कार्ड और मनरेगा कार्ड

महगामा के मोहनपुर गांव का रहने वाला था बुधदेव मिर्धा
फूस के घर में गुजार दी जिंदगी , इंदिरा आवास का भी नहीं मिला लाभ
महगामा : सरकार व व्यवस्था लाख विकास के बड़े-बड़े दावे करे. लेकिन सच्चाई यही है कि समाज में आज भी कई ऐसे परिवार हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी भी ठीक से नसीब नहीं हो पाती है. इसे विडंबना ही कहेंगे कि कोई चांद पर घर बनाने व बुलेट ट्रेन से सफर करने की बात सोच रहा है वहीं आज भी कई लोगों के लिये गरीबी किसी अभिषाप से कम नहीं. जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है और संपन्न लोग मलाई खा रहे हैं. आज भी गरीबी के कारण व पैसे के अभाव में लोगों की भूख व इलाज के अभाव में मौत हो रही है.
ऐसा ही एक वाक्या गोड्डा के महगामा प्रखंड में प्रकाश में आया है. जिसमे प्रखंड के मोहनपुर गांव का रहने वाले वृद्ध बुधदेव मिर्धा की मौत रविवार को हो गयी. बुधदेव करीब तीन माह से बीमार चल रहा था. इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गयी. बुधदेव के पास भोजन करने तक के पैसे नहीं थे. इलाज की बात तो दूर थी. मौत के बाद पड़ोसी इस बात की चर्चा कर रहे थे कि यदि सरकार तथा व्यवस्था ने मामले में पहल की होती तो शायद बुधदेव की जान नहीं जाती.
बुधदेव का जीवन
बुधदेव मिर्धा मोहनपुर का रहने वाला था. बीपीएल श्रेणी में रहने के बावजूद वह सरकारी योजनाओं से वंचित था. बुधदेव की पत्नी लखिया देवी तथा तीन पुत्र क्रमश:प्रदीप मिर्धा, अर्जुन मिर्धा तथा सुरेश मिर्धा बताया जाता है. पिता के साथ केवल सुरेश मिर्धा ही रहता है. बाकी दो भाई अगल-बगल अपने परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं. तीनों भाइयों की कमाई से बमुश्किल परिवार को दो वक्त की रोटी नसीब हो पाती है.
जानकारी के अनुसार बुधदेव मिर्धा नवंबर माह से ही बीमार चल रहा था. बीमारी का इलाज तथा पेट भर अनाज के अभाव में उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गयी. पुत्र सुरेश मिर्धा ने बताया कि हर दिन मजदूरी नहीं मिलता है.
कहीं काम मिल गया तो पहले भोजन की व्यवस्था करना पड़ता है, पैसे के अभाव में पिता का इलाज संभव नहीं हो सका. पंचायत सतिति सदस्य मो कुर्बान अंसारी ने कहा कि बुधदेव लगातार तीन माह से बीमार था. पैसे के अभाव में ना भोजन कर पाता था ना ही इलाज हो सका. इस कारण स्थिति बिगड़ती चली गयी.
बीपीएल श्रेणी में आने के बावजूद लाल कार्ड व मनरेगा कार्ड से था वंचित: बुधदेव मिर्धा का नाम बीपीएल में रहने के बावजूद अब तक अनाज के लिये लाल कार्ड नहीं मिल पाया था. इतना ही नहीं बुधदेव के साथ तीनों पुत्र के नाम अब तक मनरेगा कार्ड तक नहीं बना है.
मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि बुधदेव मिरधा का अंत्योदय कार्ड नहीं बना है. मनरेगा कार्ड नहीं था. पत्नी को विधवा पेंशन तथा परिवार को तत्काल पारिवारिक लाभ के तहत 20 हजार दिया जायेगा.
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