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Giridih News :सांप्रदायिक सौहार्द और अटूट आस्था का केंद्र है लंगटा बाबा का समाधि स्थल

Giridih News :जमुआ-देवघर मुख्य मार्ग पर खरगडीहा पौष पूर्णिमा पर शनिवार को संत लंगटा बाबा की 116वीं वर्षगांठ मनायी जायेगी. यह आयोजन स्थानीय जमुआ पुलिस प्रशासन, बाबा के भक्त, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक आयोजन है.

आयोजन में लंगटा बाबा की समाधि स्थल पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. खरगडीहा स्थित लंगटा बाबा समाधि सांप्रदायिक सौहार्द और अटूट आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. यह समाधि स्थल ना केवल हिंदुओं बल्कि मुस्लिम समुदाय के लिए भी आस्था का केंद्र है. इसे झारखंड व बिहार के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है. यहां सभी धर्मों के लोग मन्नतें मांगने आते हैं. लंगटा बाबा (मूल नाम लंगेश्वरी बाबा) 1870 के दशक में नागा साधुओं की एक टोली के साथ खरगडीहा आये थे. जब बाकी साधु चले गये, तो वे खरगडीहा थाना परिसर के पास ही रुक गये और अपनी धुनी रमायी. उन्होंने वर्ष 1910 में समाधि ली थी.

हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक

यह स्थल हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है. यहां समाधि पर चादरपोशी करने की परंपरा है. परंपरा के अनुसार समाधि पर पहली चादर जमुआ थाना के थाना प्रभारी द्वारा चढ़ायी जाती है. यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है. जब बाबा की समाधि पर तत्कालीन थानेदार बहाउद्दीन खान ने पहली चादर चढ़ायी थी. यहां प्रत्येक वर्ष पौष पूर्णिमा के दिन यहां बाबा का वार्षिक समाधि पर्व मनाया जाता है. इस अवसर पर एक विशाल मेला लगता है और हजारों की संख्या में श्रद्धालु चादरपोशी करने यहां पहुंचते हैं.

पहली चादर चढ़ाते हैं जमुआ के थानेदार

भक्तों काे विश्वास है कि यहां बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. बाबा को पीड़ित मानवता का उद्धारक माना जाता है. उनके जीवन से जुड़ी कई कहानियां हैं, जिनमें बीमार जानवरों और मनुष्यों को उनके आशीर्वाद से ठीक होते दिखाया गया है. मेले के दौरान प्रशासन सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम करता है. राजनेता, न्यायाधीश और अधिकारी भी बाबा का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं. पुलिस और प्रशासन ने मेला को लेकर विशेष सुरक्षा, सीसीटीवी और नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था की गयी है.

हर साल लगता है मेला

हर साल इस अवसर पर यहां मेला लगता है. मेले में आनेवाली भारी भीड़ देखकर पता चलता है कि मानवता की सेवा करनेवाले संत आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं. मेला सामाजिक समरसता का भी संदेश देते हैं. जमुआ थानेदार विभूति देव बाबा की समाधि स्थल पर शनिवार की सुबह 3.15 बजे पहली चादर रखेंगे. इसके बाद खोरीमहुआ के एसडीएम, एसडीपीओ, जमुआ पुलिस निरीक्षक बाबा की समाधि पर चादर पोशी करेंगे. इसके बाद बाबा के भक्तों के लिए दरवाजा खोल दिया जाएगा. ल्हे सुबह 3:30 बजे से दोपहर 01 बजे तक हिंदु भक्त एवं 1:15 बजे से शाम 5 बजे तक मुस्लिम समाज के लोग यहां चादरपोशी करते हैं

पुलिस अधिकारी व जवानों किये गये हैं तैनात

जमुआ के पुलिस इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार दास, थाना प्रभारी विभूति देव, जमुआ के बीडीओ अमलजी, सीओ नरेश कुमार वर्मा ने बाबा के भक्तों से अपील की है कि वे चादरपोशी के क्रम में सोने-चांदी के जेवरात पहनकर नहीं आये. कहा कि बाबा परिसर में अधिक भीड़ को देखते हुए एक दर्जन चौक-चौराहों और मोड़ पर पुलिस पदाधिकारी के साथ साथ पुलिस बल की तैनाती की गयी है. इधर, टफकॉन परिवार ने जलीय सूर्यमंदिर परिसर में निःशुल्क चाय-पानी का स्टॉल लगायेगा.

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