Giridih News : आस्था का प्रतीक है राजधनवार का राजघाट

Updated at : 06 Nov 2024 10:54 PM (IST)
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Giridih News : आस्था का प्रतीक है राजधनवार का राजघाट

Giridih News : भगवान भास्कर की उपासना का महापर्व छठ व राजधनवार का राजघाट अर्थात आस्था, श्रद्धा, भक्ति, सौंदर्य, भव्यता, प्रकाश और संयम की सतरंगी छटा. आस्था है कि इस घाट पर व्रत करने से हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है.

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सज-धजकर तैयार हुए घाट, तीन दिवसीय मेला शुरूभगवान भास्कर की उपासना का महापर्व छठ व राजधनवार का राजघाट अर्थात आस्था, श्रद्धा, भक्ति, सौंदर्य, भव्यता, प्रकाश और संयम की सतरंगी छटा. आस्था है कि इस घाट पर व्रत करने से हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है. इसलिए झारखंड, बिहार व बंगाल के कई जिलों से यहां लाखों लोग खींचे चले आते हैं. वैसे तो इस घाट पर राज परिवार के लोग सदियों से आस्था व श्रद्धा-भक्ति के साथ छठ व्रत करते आ रहे हैं, लेकिन जब से इसे सर्वजन के व्रत के लिए खोल दिया गया, तब से भव्यता बढ़ती गयी. पिछले लगभग चार दशक से श्रद्धालुओं ने घाट को सजाने-संवारने और छठ मेला लगाने की परिपाटी शुरू की जो कालांतर में साल-दर-साल बढ़ती ही चला गयी. नी सिर्फ राजघाट, बल्कि दीवानटोला घाट, नौलखा घाट इरगा नदी घाटी समेत राजधनवार में लगभग पांच किमी की परिधि में ऐसी सजावट होती है कि श्रद्धालुओं को किसी दूसरी दुनिया की अनुभूति करती है. विद्युत सज्जा ऐसी कि 72 घंटे तक रात-दिन का अंतर मिट सा जाता है. हर साल सजावट और श्रद्धालुओं के उमड़ते सैलाब का एक नया रिक़र्ड बनता है और अगले साल नये अलौकिक और अनूठे दृश्यों के साथ टूट भी जाता है.

भगवान भास्कर के दंड विधान का बना रहता है भय

भारी भीड़ के बावजूद लोग संयमित होते है, उन्हें भगवान भास्कर की निगेहबानी और दंड विधान का डर भी बना रहता है. हालांकि, अनुमंडल प्रशासन, प्रखंड, थाना व पूजा समिति सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करते हैं. वॉच टावर, सीसीटीवी, दंडाधिकारी, महिला-पुरुष पुलिस जवान व वॉलिंटियर आंगतुकों की गतिविधि पर नजर रखते हैं. इस वर्ष मेले अल्कोहल मीटर से नशा मापने की तथा नशा कर आने वालों पर कड़ी करवाई की भी व्यवस्था की गयी है. इस पावन मेले में आने वालों से सेवक बनकर व सात्विक रहकर आने और मेले का आनंद उठाने की अपील की गई है.

छठ मेला में श्रद्धालुओं के लिए कई अनुपम दृश्य

इस बार भी छठ मेला में श्रद्धालुओं के लिए कई अनुपम दृश्य प्रस्तुत है. खरना यानी बुधवार की शाम से ही राजधनवार का तीन दिवसीय छठ मेला शुरू हो गया है. नगर में प्रवेश करते ही सुंदर तोरणद्वार, नैसर्गिक सजावट और इंद्रधनुषी विद्युत सज्जा के कारण लोगों को किसी स्वप्न लोक में प्रवेश की अनुभूति हो रही है. लगभग आधे दर्जन विद्युत तोरण द्वार पार करने के बाद ज्यों-ज्यों राजघाट की ओर बढ़ेंगे मुग्धता बढ़ती ही जायेगी. राज कचहरी परिसर की सज्जा, विद्युतीय गेट, राम-हनुमान मिलाप, रामसेना का लंका प्रवेश, राम सेतु निर्माण, अशोक वाटिका में माता सीता से भेंट करते हनुमान, सीता की रखवाली करती राक्षशी त्रिजटा, रावण द्वारा भगवान शिव की पूजा, रामन का महल प्रवेश, कुंभकर्ण को जगाते राक्षस व पुष्पक विमान से श्री राम के साथ माता सीता की वापसी का जीवंत दृश्य एक बार भक्तों को त्रेता युग में होने का भ्रम पैदा कर रहा है. आगे बढ़ते ही घाट परिसर तक कॉरिडोर में सतरंगी रोशनी में नहाते दर्जनों कलात्मक तस्वीरें ठिठकने को विवश करती है. वहीं बगल मैदान में लगे तरह-तरह के झूले, खेल-तमाशे व मीना बाजार भी बच्चों व महिलाओं को रिझा रहे हैं. वहां से राजघाट की ओर बढ़ेंगे तो सतरंगी रोशनी में नहाती कलाकृतियां, मूर्तियां व तस्वीरें श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही हैं. राजघाट पहुंचने पर दोनों तट को जोड़ने के लिए बनाया गया वंदे भारत ट्रेन के मॉडल का पुल मेले का मुख्य आकर्षण बना हुआ है. इसी पुल से होकर लोग घाट के पूर्वी तट पर पहुंच रहे है, जहां साउथ इंडिया के एक प्राचीन मंदिर की तर्ज पर बनाया गया सूर्य मंदिर के रूप में विशाल सुंदर पंडाल में सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान भास्कर का श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं. सूर्य मंदिर के बगल में भी एक से बढ़ कर एक बंगाल का जादू बिखेरता कलात्मक व विद्युतीय दृश्य लोगों को आकर्षित कर रहा है. आयोजन की सफलता को लेकर पूजा समिति के संरक्षक अनूप संथालिया, अध्यक्ष जयप्रकाश गुप्ता, रोबिन साव, पंकज बर्णवाल, बालेश्वर मोदी, दयानंद साहू, अशोक साव, मुन्ना साव, सुधीर अग्रवाल, सुमन वर्मा, अरविंद साव, सक्षम सेठ, प्रवीण कुमार, विकेंद्र साव, अनमोल कुमार, नीरज कुमार, राहुल कुमार, सुनील पंडित, महेंद्र वर्मा, शंकर स्वर्णकार, दीपक सोनी, शंभु रजक, कृष्णा स्वर्णकार आदि दिन-रात लगे हुए हैं.

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