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Giridih News :आध्यात्मिक रंगों में सराबोर होती है मधुबन की होली

Updated at : 25 Feb 2026 11:05 PM (IST)
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Giridih News :आध्यात्मिक रंगों में सराबोर होती है मधुबन की होली

Giridih News :सामान्यतः होली शब्द सुनते ही मन में रंग, गुलाल और उमंग की छवि उभर आती है, लेकिन मधुबन की होली इन सबसे बिल्कुल अलग और विशिष्ट होती है. यहां होली रंगों की नहीं, बल्कि भक्ति, साधना और आध्यात्मिकता की होती है.

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जैन धर्म के पवित्र तीर्थक्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध यहां 24 में से 20 तीर्थंकरों ने निर्वाण प्राप्त किया था. यही कारण है कि फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर यहां आध्यात्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. होली के पावन पर्व पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में जैन धर्मावलंबी पारसनाथ की पवित्र धरती पर पहुंचते हैं. श्रद्धालु यहां आकर भक्ति के रंग में रंग जाते हैं. स्थिति यह है कि महीनों पहले से ही धर्मशालाओं और अतिथि गृहों के अधिकांश कमरे आरक्षित हो चुके हैं. विभिन्न संस्थाओं द्वारा तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पूरा मधुबन आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर है.

मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और सजावट

होली पर मधुबन स्थित मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं. जैन श्वेतांबर सोसाइटी परिसर स्थित भोमिया जी मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया-संवारा जाता है. मंदिर परिसर में रंग-रोगन, तोरणद्वार और भव्य पंडाल का निर्माण किया जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा की रात्रि में भव्य जागरण होता है. इसमें कोलकाता सहित विभिन्न राज्यों से भजन मंडलियां पहुंचती हैं. पूरी रात भक्ति गीतों और स्तुति से वातावरण गूंजायमान रहता है. भजन संध्या के उपरांत मधुबन के अलावे विभिन्न प्रांतों से आये श्रद्धालु बाबा भोमिया को गुलाल अर्पित कर होली मनाते हैं. यहां होली का स्वरूप पूर्णतः आध्यात्मिक होता है, जिसमें रंगों की जगह श्रद्धा और साधना का महत्व है.

संस्थाओं में होंगे धार्मिक कार्यक्रम

श्री दिगंबर जैन तेरहपंथी कोठी, मध्यलोक, गुणायतन सहित अन्य संस्थाओं में भी विशेष प्रवचन, सामूहिक पूजा आदि का आयोजन होता है. श्रद्धालु पर्वत वंदना कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं. बताया जाता है कि सभी प्रमुख धर्मशालाओं के कमरे महीनों पहले ही बुक हो चुके हैं.

बाजार में बढ़ी रौनक

होली को लेकर मधुबन बाजार में सप्ताह भर पहले से चहल-पहल बढ़ जाती है. शाम होते ही बाजार की रौनक देखते ही बनती है. गलियों में तीर्थयात्रियों की आवाजाही बढ़ने से पूरा क्षेत्र जीवंत हो उठता है. स्थानीय दुकानदारों को इस पर्व से काफी उम्मीदें रहती हैं. वे सामानों का पहले से स्टॉक कर लेते हैं. सुबह से देर रात तक दुकानें खुली रहती हैं. श्रद्धालु यहां से स्मृति-चिह्न खरीदकर ले जाना पसंद करते हैं.

पर्वत वंदना के लिए विशेष व्यवस्था

पर्वत वंदना की समुचित व्यवस्था की गयी है. जो तीर्थयात्री पैदल पर्वतारोहण करने में असमर्थ होते हैं, उनके लिए डोली सेवा उपलब्ध रहती है. सैकड़ों की संख्या में डोली मजदूर देर रात से ही संस्थाओं के आसपास मौजूद रहते हैं और श्रद्धालुओं को सुरक्षित पर्वत वंदना कराते हैं. होली के समय तीर्थ यात्रियों की संख्या बढ़ने से डोली कर्मियों की आय में भी वृद्धि की उम्मीद रहती है. इसके अतिरिक्त तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए बाइक सेवा भी उपलब्ध है, जिससे वे कम समय में विभिन्न स्थलों के दर्शन कर सकें. प्रशासन ल स्थानीय संस्थाएं भीड़ को व्यवस्थित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं.

आध्यात्मिक उत्सव का है अनूठा स्वरूप

मधुबन की होली यह संदेश देती है कि उत्सव केवल रंगों और उल्लास का नाम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और साधना का माध्यम भी हो सकता है. यहां की होली भक्ति, शांति और आत्मिक आनंद का अनुपम संगम है, जो इसे देशभर में विशिष्ट पहचान दिलाता है. इस प्रकार मधुबन में होली का पर्व आध्यात्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था तीनों के लिए महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है.

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PRADEEP KUMAR

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By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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