गावां सीएचसी पहुंची जांच टीम, पूछताछ में उजागर हुई गड़बड़ी

Updated at : 02 Jul 2024 12:24 AM (IST)
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गावां सीएचसी पहुंची जांच टीम, पूछताछ में उजागर हुई गड़बड़ी

गावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गड़बड़ी मिलने के बाद सोमवार को उपायुक्त द्वारा गठित टीम गावां पहुंची. टीम में जिला लेखा पदाधिकारी अनंत कुमार मिश्रा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रेखा झा, जिला लेखा प्रबंधक सुमित कुमार, लेखा पाल एनटीइपी रविकांत सिन्हा, एसीएमओ परमेश्वर मिश्रा व जिला सलाहकार कुणाल भारती शामिल थे.

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सीएस ने पकड़ी थी वित्तीय अनियमितता, जर्जर कमरे से मिली थी दवा

गावां. गावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गड़बड़ी मिलने के बाद सोमवार को उपायुक्त द्वारा गठित टीम गावां पहुंची. टीम में जिला लेखा पदाधिकारी अनंत कुमार मिश्रा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रेखा झा, जिला लेखा प्रबंधक सुमित कुमार, लेखा पाल एनटीइपी रविकांत सिन्हा, एसीएमओ परमेश्वर मिश्रा व जिला सलाहकार कुणाल भारती शामिल थे. जांच टीम के आते ही परिसर में हड़कंप मच गया. शनिवार को ही एक आदेश जारी कर सोमवार को सभी कर्मियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था. इसलिए सभी कर्मी कार्यालय में पूर्व से ही सहमे बैठे थे. टीम ने सभी कर्मियों से अलग-अलग पूछताछ की.

निवर्तमान चिकित्सा पदाधिकारी व बीपीएम से अलग से हुई पूछताछ

वहीं, निवर्तमान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ चंद्रमोहन कुमार व बीपीएम प्रमोद बरनवाल से अलग कमरे में पूछताछ की गयी. पूछताछ में परत दर परत गड़बड़ी की पोल खुलती जा रही है. हालांकि, इस संबंध में जांच कर रहे पदाधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज करते रहे. कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही सही जानकारी दे पायेंगे. टीम ने अस्पताल के सभी रजिस्टर, स्टॉक, दवा भंडार व कंप्यूटर आदि के रिकॉर्ड का बारीकी से निरीक्षण किया. शुक्रवार को तिसरी के चिकित्सक डॉ देवव्रत को जांच करने की जिम्मेवारी सौंपी गयी थी. उन्होंने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया था. वहीं, कई कमरों में भी ताले लगा दिये थे. बारी-बारी से सभी दस्तावेजों की जांच की गयी.

पूछताछ में कर्मी बदलते रहे बयान

टीम ने आयुष्मान केंद्र को देख रहे कर्मी मनीष कुमार से प्रतिदिन हो रहे मरीजों के इलाज का रजिस्टर दिखाने को कहा. इसमें काफी त्रुटि पायी गयी. उसने कहा कि वह केवल दवा रिसीव करते थे. दवा कहां जा रहा था उसे पता नहीं है. उसके पास कोई लिखित नहीं है. प्रभारी का जो आदेश होता था, वैसा हम करते थे. उसने कहा कि मुझे दवा रिसीव करने की जिम्मेदारी दी गयी थी. नियम के अनुसार आयुष्मान की दवा आदि इंडोर में होना चाहिए, लेकिन वहां कुछ भी नहीं था. ना ही वहां कोई स्टॉक रजिस्टर मिला. इस पर जांच टीम ने आपत्ति जतायी. आयुष्मान के कार्यालय में कुछ ऐसे भी स्लाइन व दवा मिले जो सरकारी स्तर पर पर्याप्त मात्रा में सप्लाई की जाती है. विभाग के पास कोई कमी नहीं है. फिर भी बाहर की खरीदी गयी दवा पायी गयी. सीएस के जांच के बाद किसी भी मरीज का इलाज या इंट्री आयुष्मान केंद्र में नहीं हुआ था. कार्यालय का रजिस्टर त्रुटिपूर्ण था, जिसे टीम ने जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया. फार्मासिस्ट राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि हम सिर्फ मरीजों को दवा देते थे. जिसे मनीष कुमार रिसीव कराते थे. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह मिली की रिसीव करने से पूर्व दवा लिस्ट के अनुसार आया है या नहीं, इसका मिलान तक नहीं होता था. कार्यालय कर्मी बार-बार अपना बयान बदल रहे थे. टीम ने एक घंटे का समय देकर लिखित बयान लिया. बताया गया कि दिये गये बयान के आधार पर जांच की जाएगी.

बंद पड़े कमरे की भी हुई जांच

टीम के खंडहरनुमा कर्मचारी भवन में रखी गयी दवा की जांच की गयी. उक्त भवन में दवा रखे जाने की शिकायत के बाद गावां सीओ अविनाश रंजन ने उसमें ताला जड़ दिया था. कमरे में भारी मात्रा में बेबी किट व अन्य दवाइयां मिली. बेबी किट कब आया है इसकी जानकारी कर्मी नहीं दे पा रहे थे. दूसरे कमरे में कई दवायें खुली पायी गयी. वहीं, दवा को जैसे तैसे खुले कार्टन में रखकर कमरे में बिखरा दिया गया था. इस संबंध में जब प्रधान लिपिक प्रभात कुमार से पूछताछ की गयी, तो उसने जवाब दिया कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ चंद्रमोहन कुमार के आदेश पर दवा को उस कमरे में रखे थे. टीम ने निरीक्षण के बाद फिर से कमरे में ताला लगवा दिया. कहा कि सभी दवाओं की मिलान करवायी जाएगा. संभावना जतायी जा रही है कि आगे भी जांच व पूछताछ किया जायेगा.

वित्तीय गड़बड़ी की बात आ रही है सामने

मालूम रहे कि सीएस सीपी मिश्रा ने स्वास्थ्य केंद्र में निरीक्षण के दौरान काफी गड़बड़ी को पकड़ी थी. उन्होंने डॉ चंद्रमोहन के प्रतिनियोजन को रद्द कर राजधनवार में योगदान देने का निर्देश दिया था. बाद में एक खंडहरनुमा कर्मचारी आवास में दवा रखने की बात सामने आयी थी. इसमें सीओ अविनाश रंजन के आदेश पर ताला लगा दिया गया था. बाद में जिलास्तर पर जांच टीम गठित की गयी.

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