गर्मी में नदी लगभग सूख जाती है, लेकिन बरसात में नदी का रौद्र रूप देखने को मिलता है. नदी का दोनों किनारा पानी से लबालब भर जाता है, वहीं बहाव भी तेज होता है. अधिक वर्षा होने की स्थिति में नदी से बाहर खेतों तक पानी पहुंच जाता है, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचता है. तेज धार में जहां नदी घुमावदार है, वहां खेतों को बहाकर अपने साथ ले जाती है.
नदी की चौड़ाई बढ़ गयी
उक्त स्थानों में एक दर्जन से अधिक स्थान ऐसे हैं जहां हर वर्ष खेत नदी में विलीन हो जाते हैं. इन स्थानों में नदी का पाट भी काफी चौड़ा हो गया है, वहीं कटाव का सिलसिला लगातार जारी है. घुमावदार स्थानों में जिन किसानों का खेत है, वह नदी में समाने का सिलसिला लगातार जारी है. काफी संख्या में किसानों का खेत पूरी तरह नदी में समा चुका है. क्षेत्र के किसान वर्षों से लगातार नदी के तटों पर सरकार से गार्डवाल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन इस पर कोई पहल नहीं हो रही है. इससे किसानों में मायूसी देखी जा रही है. ग्रामीण सुरेंद्र यादव, मुखदेव यादव, श्यामसुंदर यादव, श्रवण यादव आदि का कहना है कि नावाडीह-पथडीहा में लगभग सौ बीघा जमीन नदी में बह चुकी है. माल्डा के किसान राजेंद्र पांडेय, गावां के डोमी सिंह, पसनौर से रंजीत यादव, संन्यास कुमार सिंह आदि ने कहा कि विभाग को समय रहते इस दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए.
भाकपा माले करेगी आंदोलन : पूर्व विधायक
पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने कहा कि सकरी नदी के किनारे किसानों की दो सौ एकड़ से अधिक जमीन नदी में बह चुकी है. अपने कार्यकाल में कटाव रोधक गार्डवाल को ले उन्होंने विधानसभा में आवाज उठायी थी. बाद में क्षेत्र का टीम से सर्वे करवाया गया था. इसमें सकरी नदी के किनारे 16 किमी गार्डवाल की स्वीकृति हुई थी. वर्तमान में नीमाडीह, भागलपुर, विश्निटीकर, दहसरोनी, बेलाखुट्टा समेत माल्डा के कुछ स्थानों में गार्डवाल का निर्माण हुआ है. विभाग शेष स्थानों में भी गार्डवाल का निर्माण करवाये. अन्यथा भाकपा माले आंदोलन करेगी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

