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Giridih News :केडिया धर्मशाला की जमीन पर बने पीएम आवास मामले पर सरकार ने मांगी रिपोर्ट

Updated at : 16 Oct 2025 10:50 PM (IST)
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Giridih News :केडिया धर्मशाला की जमीन पर बने पीएम आवास मामले पर सरकार ने मांगी रिपोर्ट

Giridih News :पचंबा में स्थित केडिया धर्मशाला की जमीन पर अवैध रूप से बने पीएम आवास के मामले में झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग ने रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट मांगे जाने के बाद एक बार फिर डेढ़ वर्षों के बाद गिरिडीह नगर निगम के अधिकारियों ने संचिका को खंगालना शुरू कर दिया है.

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पचंबा में स्थित केडिया धर्मशाला की जमीन पर अवैध रूप से बने पीएम आवास के मामले में झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग ने रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट मांगे जाने के बाद एक बार फिर डेढ़ वर्षों के बाद गिरिडीह नगर निगम के अधिकारियों ने संचिका को खंगालना शुरू कर दिया है. बताया जाता है कि वर्ष 2017-18 में गिरिडीह नगर निगम ने कृष्णा पांडेय, नीरज पांडेय और दिनेश पांडेय के नाम पर एक-एक प्रधानमंत्री आवास योजना निर्माण की स्वीकृति दी थी. लेकिन जिस स्थल पर आवास का निर्माण होना था, वहां पर न होकर केडिया धर्मशाला की जमीन पर कर दी गयी. इस मामले में गिरिडीह अंचल कार्यालय से जब जांच-रिपोर्ट मांगी गयी तो यह खुलासा हुआ कि कृष्णा पांडेय के पूर्वजों ने अपने खतियानी जमीन से ही केडिया जनकल्याण ट्रस्ट को जमीन बेची थी. 227 डिसमिल में से 155 डिसमिल जमीन ट्रस्ट के द्वारा खरीदी गयी, लेकिन पांडेय परिवार के द्वारा आवास का निर्माण अपने जमीन में न कराकर ट्रस्ट की 155 डिसमिल जमीन के हिस्से में कर दी गयी. ट्रस्ट के लोगों ने बताया कि खतियानी रैयतों के वंशजों की जमीन धर्मशाला के पश्चिमी भाग में है. लेकिन नगर निगम को गुमराह कर तीन-तीन आवास केडिया धर्मशाला के दक्षिणी हिस्से में ट्रस्ट की ही जमीन पर बनवा दी गयी. स्थिति यह है कि ट्रस्ट की ही जमीन पर पुन: खतियानी रैयतों के वंशजों के द्वारा कब्जा कर लिया गया है. इस मामले को लेकर अंचल कार्यालय ने अपनी रिपोर्ट दो-दो बार नगर निगम को सौंप दी है और वास्तविक स्थिति से विभाग को अवगत भी करा दिया गया. इसके बाद गिरिडीह नगर निगम ने खतियानी रैयतों के वंशजों को नोटिस भी जारी किया था. डेढ़ वर्ष पूर्व तीनों लाभुकों को नोटिस देते हुए नगर निगम ने रिकवरी का आदेश दिया और कहा कि यदि एक सप्ताह के अंदर राशि जमा नहीं की गयी तो विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी. बताया जाता है कि इस आदेश के बाद भी अब तक लाभुकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और पिछले डेढ़ वर्षों से संचिका दबी हुई है.

निदेशालय ने तीन दिनों के अंदर मांगी रिपोर्ट

इधर केडिया जनकल्याण ट्रस्ट के ट्रस्टी श्रवण केडिया के पत्राचार के बाद एक बार फिर झारखंड सरकार का नगर विकास एवं आवास विभाग ने सक्रियता दिखायी है. इस मामले पर गिरिडीह नगर निगम के उप नगर आयुक्त को पत्र लिखकर तीन दिनों में प्रतिवेदन की मांग की है. बता दें कि ट्रस्टी श्रवण केडिया ने केंद्रीय लोक शिकायत निवारण एवं अनुश्रवण प्रणाली में अपनी शिकायत दर्ज करायी है जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के चतुर्थ घटक से यह मामला जुड़ा हुआ है और केंद्रीय लोक शिकायत निवारण एवं अनुश्रवण प्रणाली के अंतर्गत पीजी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का पर्यवेक्षण कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा किया जा रहा है.

जमीन कब्जा कर धर्मशाला की जमीन बेचने की रची जा रही है साजिश

इस मामले को लेकर केडिया जनकल्याण ट्रस्ट से जुड़े लोगों में काफी आक्रोश देखा जा रहा है. सरकार को लिखे गये पत्र में कहा गया है कि एक साजिश के तहत ट्रस्ट की जमीन पर कब्जा जमाकर उसे बेचने की साजिश रची जा रही है. गिरिडीह डिस्ट्रिक्ट चैंबर ऑफ कॉमर्स के निर्मल झुनझुनवाला ने कहा कि केडिया धर्मशाला की खाली पड़ी जमीन पर पिछले कई वर्षों से एक दबंग परिवार की नजर है. पांच साल पूर्व धर्मशाला की बाउंड्रीवाल गिर जाने से विवाद और बढ़ गया है. जबरन बाउंड्री होने नहीं दिया जा रहा है और दूसरे ओर जमीन पर अवैध रूप से बने पीएम आवास के मामले में भी नगर निगम चुप्पी साधे हुए है. नगर निगम के पूर्व उपाध्यक्ष राकेश मोदी ने कहा कि पीएम आवास में गड़बड़ी पर कार्रवाई नहीं होना नगर निगम के क्रियाकलाप पर सवाल खड़ा करता है. इस मामले में लाभुकों से रिकवरी वसूल करने के साथ-साथ उन कर्मचारियों को भी चिन्हित कर कार्रवाई किया जाना चाहिए जिन लोगों ने दस्तावेजों में हेर-फेर की है. केडिया जनकल्याण ट्रस्ट के ट्रस्टी और कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा कि नगर निगम को भ्रमित कर पीएम आवास बनवाने वाले लाभुकों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए और धर्मशाला की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना चाहिए.

संचिका का अध्ययन किया जा रहा है, दोषियों पर होगी कार्रवाई : उप नगर आयुक्त

इधर गिरिडीह नगर निगम के उप नगर आयुक्त प्रशांत कुमार लायक ने कहा कि निदेशालय से पत्र आने के बाद संचिका फिर से निकाली गयी है. उन्होंने कहा कि संचिका के साथ-साथ दस्तावेजों का अध्ययन भी किया जा रहा है. इस मामले में रिकवरी का आदेश निर्गत किया गया था. लेकिन किन परिस्थितियों में रिकवरी नहीं हो पाया, इसकी जांच की जा रही है. उन्होंने कहा कि लाभुकों ने अपने पूर्वजों द्वारा बेची गयी जमीन पर ही प्रधानमंत्री आवास का निर्माण करा लिया है, जो गलत है. कहा कि इस मामले में शीघ्र ही कार्रवाई करने के उपरांत नगर विकास विभाग के निदेशालय को प्रतिवेदन भेजी जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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