Corona Lock Down : सदर अस्पताल पहुंचनेवाले मरीजों की तादाद में भारी गिरावट

Author : Pritish Sahay Published by : Prabhat Khabar Updated At : 24 Apr 2020 1:23 AM

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अभय वर्मा, गिरिडीह : देशव्यापी लॉकडाउन और ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण सदर अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या में करीब 80 प्रतिशत की गिरावट आयी है. पहले जहां करीब 350 मरीज आते थे, वहां औसतन अभी 75 मरीज आ रहे हैं. सिविल सर्जन डाॅ अवधेश कुमार सिन्हा ने बताया कि लॉकडाउन […]

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अभय वर्मा, गिरिडीह : देशव्यापी लॉकडाउन और ओपीडी सेवा बंद रहने के कारण सदर अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या में करीब 80 प्रतिशत की गिरावट आयी है. पहले जहां करीब 350 मरीज आते थे, वहां औसतन अभी 75 मरीज आ रहे हैं. सिविल सर्जन डाॅ अवधेश कुमार सिन्हा ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद ओपीडी सेवा बंद कर दी गयी है, लेकिन कोई मरीज आया तो उसे निराश नहीं लौटना पडता है. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग का सारा फोकस कोरोना वायरस की रोकथाम पर है. लॉकडाउन की घोषणा के बाद सदर अस्पताल में मलेरिया, कुष्ठ व टीबी पीडित लोगो के आने की संख्या भी काफी कम हो गयी है. सीएस ने कहा कि इन मरीजों के इलाज पर अब भी रोक नहीं है, पर आवागमन के साधन उपलब्ध ना होने के कारण इन रोग से पीड़ित लोग भी सदर अस्पताल तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.

मलेरिया जांच में भी आयी है भारी कमी : डॉ सत्यवतीजिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ सत्यवती हेम्ब्रम ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद मलेरिया जांच में भारी कमी आयी है. बताया कि फिलहाल क्वारंटाइन केंद्र पर ही मलेरिया जांच किट उपलब्ध करा दिया गया है. कहा कि बुखार की शिकायत के बाद क्वारंटाइन केंद्र में ही किट से मलेरिया की जांच की जाती है. बताया कि तालाबंदी से पूर्व मार्च माह में कुल 12038 लोगों की मलेरिया जांच की गयी थी, इनमें 45 लोगों में मलेरिया पाया गया था. कहा कि सदर अस्पताल में ऐसे मरीजों के आने की संख्या फिलहाल नगण्य है. 236 कुष्ठ रोगियों को दी जा रही है दवा : डॉ कालीदासजिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डाॅ कालीदास मुर्मू ने बताया कि तालाबंदी से पूर्व जिले के 236 कुष्ठ रोगियों को दवा दी जा रही थी, फिलहाल यह अब भी बरकरार है.

बताया कि कुष्ठ जांच के दौरान पूरे शरीर की जांच की जाती है, सोशल डिस्टेसिंग के निर्देश के कारण ऐसी जांच फिलहाल बंद कर दी गयी है. कहा कि पूर्व के चिह्नित रोगियों को केवल दवा दी जा रही है. नये टीबी मरीज की संख्या नगण्य : डॉ अरविंदजिला यक्ष्मा पदाधिकारी डाॅ अरविंद कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के कारण यक्ष्मा रोगियों के आने का सिलसिला फिलहाल थम गया है. कहा कि पूर्व से जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उन्हें सारी सुविधा दी जा रही है. उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र के संदिग्ध मरीज ही सदर अस्पताल आ रहे हैं. ऐसे मरीजों की संख्या रोजाना एक से दो रहती है.

उन्होंने बताया कि तालाबंदी की घोषणा के बाद बुधवार तक 42 मरीज इलाज के लिए आये हैं. मातृत्व केंद्र में रोजाना करीब आठ से दस प्रसव : डॉ उपेंद्रचैताडीह स्थित मातृत्व एंव शिशु कल्याण केन्द्र में गर्भवती महिलाओं के आने की संख्या में भी भारी गिरावट आयी है. सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डाॅ उपेन्द्र दास ने बताया कि तालाबंदी से पूर्व यहां रोजाना 30 से पैतीस महिलाओं का प्रसव होता था पर अब यह संख्या आठ से दस रह गयी है. उन्होंने बताया कि महिलाओं का प्रसव इमरजेंसी सेवा में आती है पर आवागमन के साधन उपलब्ध ना होने के कारण संख्या में कमी आयी है. सदर अस्पताल में आठ दिनों में 584 मरीजों का इलाजतालाबंदी के दौरान गत आठ दिनों में सदर अस्पताल में कुल 584 मरीजों का इलाज किया गया है.

उपाधीक्षक डाॅ दास ने बताया कि आम दिनों में रोजाना मरीजों की संख्या 350 के करीब रहती थी, कभी- कभी यह चार सौ तक भी पहुंच जाती थी. इधर, तालाबंदी के बाद औसतन करीब 75 मरीज ही सदर अस्पताल में आ रहे हैं. जानकारी के अनुसार 16 अप्रैल को 100, 17 को 70, 18 को 89, 19 को 59, 20 को 92, 21 को 100, 22 को 94 तथा 23 को 80 मरीज इलाज के लिए आये. इनमें अधिकतर मरीज मारपीट, बर्न, जहरखुरानी व कुता बिल्ली काटने का है. पैथोलॉजी टेस्ट में 200 के स्थान पर 20 से 25 मरीज जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल स्थित जांच घर में जांच कराने वालो की संख्या में भी भारी गिरावट आयी है. तालाबंदी से पूर्व यहां जांच कराने वालो की संख्या डेढ़ से दो सौ के करीब रहती थी, लेकिन तालाबंदी के बाद यह संख्या 20 से 25 रह गयी है.

जांच घर के कर्मी ने बताया कि फिलहाल जिन्हें बहुत जरूरी है, वैसे लोग ही जांच के लिए आ रहे है. बता दें कि स्वास्थ्य विभाग ने पूर्व में ही रूटीन जांच के लिए फिलहाल सदर अस्पताल ना आने की अपील की थी. संभवत: इसका भी असर है. ओपीडी सेवा है बंद, मरीजों की संख्या में कमी : सिविल सर्जनसिविल सर्जन डाॅ सिन्हा ने बताया कि फिलहाल ओपीडी सेवा बंद कर दी गयी है.

यही कारण है कि मरीजों की संख्या में गिरावट आयी है. कहा कि प्रावाधान के तहत केवल इमरजेंसी सेवा ही बहाल रखना है पर साधारण मरीज भी आते है तो उन्हें सेवा दी जा रही है. कहा कि जब मुख्यालय से ओपीडी सेवा बहाल करने का निर्देश मिलेगा तो सारी व्यवस्था बहाल कर दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अभी सारा फोकस कोरोना पर है. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सचिव के निर्देश के बाद कोरोना को लेकर सभी प्रकार के टीकाकरण का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया है.

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Pritish Sahay

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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