Giridih News :बच्चों को संस्कारों से जोड़ना, समय की आवश्यकता : प्रमाण सागर

Published by : PRADEEP KUMAR Updated At : 17 May 2026 11:15 PM

विज्ञापन

Giridih News :बच्चों को पढ़ाना-लिखाना आज की आवश्यकता है, लेकिन पढ़ाई-लिखाई के साथ जो भटकाव बढ़ रहा है वह हमारी संस्कृति के लिए बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है. उपरोक्त उद्गार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने सांयकालीन शंका समाधान कार्यक्रम में एक प्रश्न के उत्तर में व्यक्त किये.

विज्ञापन

मुनि श्री ने कहा कि युवाओं के भटकाव का प्रमुख कारण केवल शिक्षा नहीं है, बल्कि बहुत कम उम्र में को-एजुकेशन, मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों का बाहरी दुनिया से अत्यधिक जुड़ाव भी है. आज स्थिति यह है कि बच्चे अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने लगे हैं और माता-पिता को केवल सहमति की मोहर लगानी पड़ती है.

10 वर्षों में परिवर्तन काफी तेज हुआ

उन्होंने कहा कि एक समय था, जब जीवन के बड़े निर्णय परिवार और बड़ों की सलाह से लिए जाते थे. माता-पिता जो तय कर देते थे, वही स्वीकार होता था, किंतु पिछले 20-25 वर्षों में समाज में व्यापक परिवर्तन आया है. विशेष रूप से पिछले 10 वर्षों में यह परिवर्तन अत्यधिक तेज हुआ है. फाइव जी के बाद की पीढ़ी, जेन-जी और अब अल्फा-बीटा पीढ़ी तक लोगों की मानसिकता पूरी तरह बदल चुकी है. मुनि श्री ने कहा कि प्रश्न यह नहीं है कि बदलाव को स्वीकार करें या उसका विरोध करें. हर परिवर्तन का विरोध करने से समाज रुढ़िवादी बन जायेगा और समय के साथ आगे नहीं बढ़ पायेगा.

समय-समय पर हुए हैं सामाजिक परिवर्तन

मानव समाज के इतिहास में समय-समय पर बड़े सामाजिक परिवर्तन हुए हैं, जीवनशैली और व्यवस्थाएं बदली हैं, लेकिन हमारे शाश्वत मूल्य सदैव स्थिर रहने चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि सामाजिक बदलाव के साथ शाश्वत मूल्यों को छोड़ दिया जाये, तो वही बदलाव भटकाव बन जाता है, परिणामस्वरूप व्यक्ति का निजी जीवन और सामाजिक व्यवस्था दोनों अस्त-व्यस्त होने लगते हैं. आज बदलाव के साथ भटकाव बहुत तेजी से बढ़ रहा है और कुछ बातों को कानूनी मान्यता मिलने के बाद स्थिति और गंभीर हो गयी है.

पहले बड़े-बुजुर्ग समझा-बुझाकर समाधान निकालते थे

मुनि श्री ने कहा कि पहले परिवारों में समस्या आने पर बड़े-बुजुर्ग समझा-बुझाकर समाधान निकाल लेते थे. क्योंकि, लोग एक-दूसरे पर निर्भर थे. आज पति-पत्नी दोनों आर्थिक रूप से स्वतंत्र हैं, उनकी सोच, जीवनशैली और प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं, इसके कारण परिवारों में दूरियां बढ़ती जा रही हैं. मुनि श्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाली संतति, हमारी संस्कृति, परिवार व्यवस्था और सामाजिक जीवन का क्या होगा? यह अत्यंत गंभीर चिंतन का विषय है. इसका समाधान केवल एक ही है, बदलाव को स्वीकार करते हुए बच्चों और युवाओं को धर्म व संस्कृति से जोड़ना. मुनि श्री ने अभिभावकों से आग्रह किया कि बच्चों को बचपन से ही पाठशालाओं, धर्म और गुरुजनों से जोड़ें. जब बच्चे धर्म, संस्कृति और गुरुजनों से जुड़ते हैं, तब वे आधुनिकता और उच्च शिक्षा के बीच रहकर भी भटकते नहीं हैं.

विज्ञापन
PRADEEP KUMAR

लेखक के बारे में

By PRADEEP KUMAR

PRADEEP KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola