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आउटसोर्सिंग कंपनी के इंचार्ज की हत्या में दो को आजीवन कारावास

Updated at : 23 Aug 2019 8:02 AM (IST)
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आउटसोर्सिंग कंपनी के इंचार्ज की हत्या में दो को आजीवन कारावास

गिरिडीह : आउटसोर्सिंग कंपनी के शिफ्ट इंचार्ज की हत्या के मामले दो दिनों पूर्व दोषी करार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चिलगा के संतोष दास एवं गोविद यादव को जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय कुमार दिनेश की अदालत ने गुरुवार को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. गोविंद मजदूर नेता भी रहा था. इस घटना […]

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गिरिडीह : आउटसोर्सिंग कंपनी के शिफ्ट इंचार्ज की हत्या के मामले दो दिनों पूर्व दोषी करार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चिलगा के संतोष दास एवं गोविद यादव को जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय कुमार दिनेश की अदालत ने गुरुवार को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. गोविंद मजदूर नेता भी रहा था.

इस घटना में सीसीएल बनियाडीह के कबरीबाद माइंस में आउटसोर्सिंग से कोयला उत्खनन का करने वाली मां प्यारी इंटरप्राइजेज के शिफ्ट इंचार्ज (बिहार के जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र के धनवे निवासी) दयानंद सिंह के हत्या की गयी थी.
अदालत ने भादवि की धारा 302/34 में सश्रम आजीवन कारावास की सजा दी है. इसके अलावा 40-40 हजार रुपये जुर्माना किया है. जुर्माना नहीं भरने पर एक साल अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी. इसी प्रकार भादवि की धारा120 (बी) में तीन साल कारावास की सजा सुनायी है. इसके अलावा 10 हजार रुपया का जुर्माना किया गया है.
बतातें चलें कि 20 अगस्त को ही अदालत ने इन दोनों को दोषी करार दिया था तथा न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारा गिरिडीह भेज दिया था. साथ ही सजा पर सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तिथि निर्धारित की थी. यह हत्यकांड 28 नवंबर 2013 के रात की है. इस संबंध में मुफस्सिल थाना में मामला (कांड संख्या 593/13) 29.11.2013 को दर्ज किया गया था.
क्या है मामला : मामले की प्राथमिकी मृतक दयानंद सिंह के भतीजा पंकज सिंह के फर्द बयान पर मुफस्सिल थाना में दर्ज की गयी थी. पंकज ने कहा था कि वह मां प्यारी में सुपरवाइजर का काम करता है, जबकि उसके चाचा शिफ्ट इंचार्ज के रूप में काम करते हैं.
28 नवंबर 2013 को सवा आठ बजे रात उसके चाचा दयानंद कबरीबाद माइंस में सभी कर्मी को ड्यूटी बांटने के लिए बनियाडीह सीसीएल गेस्ट हाउस से निकले थे. वह सीसीएल गेस्ट हाउस के सामने मेस में था. रात लगभग पौने नौ बजे वह अपने चाचा दयानंद के मोबाइल पर बात की तो बोले कि आ रहे हैं, जब आधा घंटा बीत गया और वे नहीं आये तो उनके मोबाइल पर वह पांच बार फोन लगाया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया.
इसके बाद वह अपने सहकर्मी महबूब अंसारी एवं ड्राइवर व एक अन्य को लेकर बोलेरो से माइंस की तरफ चाचा को देखने जा रहे थे कि माइंस घुसने से पहले रास्ते पर चाचा की बाइक गिरी पड़ी थी, जबकि चाचा खून से लथपथ गिरे पड़े थे. उनकी पीठ से खून बह रहा था.
इसके बाद वह अपने साथ के कर्मी के साथ चाचा की बोलेरो से सीसीएल अस्पताल ले आये, जहां से चिकित्सक ने तुरंत सदर अस्पताल भेज दिया. सदर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया.
गार्ड की नौकरी से हटाने के कारण हुई थी दुश्मनी
प्राथमिकी में कहा गया था कि उसके चाचा की हत्या का कारण गार्ड की नौकरी से हटाने के कारण हुई दुश्मनी थी. उसके चाचा कंपनी में शिफ्ट ड्यिूटी इंचार्ज थे. क्षेत्र के लोग बराबर नौकरी देने हेतु दबाव डालते थे. कुछ दिन पूर्व कोपा के संजय दास, संतोष दास, भवरिया दास गार्ड का काम करता था, जिसे किसी कारणवश दो ढाई माह पहले गार्ड के नौकरी से हटा दिया गया था. विश्वकर्मा पूजा के पहले संजय दास का भाई कंपनी का गाड़ी रोकता था तथा डीजल चोरी करता था जिसे गार्ड ने पकड़ा था, तथा उसे हल्का मारपीट भी की गयी थी.
इसी बात को लेकर संजय दास, संतोष दास, भवरिया दास माइंस में आया तथा उसके चाचा को गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी दी थी. बाद में गेस्ट हाउस में आकर भी गाली-गलौज एवं जान से मारने की धमकी दी थी.
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