बरडीहा में चल रहा आरा मशीन, जंगलों पर संकट
Published by : Akarsh Aniket Updated At : 19 Dec 2025 9:40 PM
बरडीहा में चल रहा आरा मशीन, जंगलों पर संकट
प्रतिनिधि, मझिआंव मझिआंव और बरडीहा प्रखंड क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों में अवैध रूप से आरा मशीन चलाये जा रहे हैं. ग्रामीण सूत्रों के अनुसार, मझिआंव प्रखंड के बिडंडा, टड़हे और दवनकारा गांवों में तथा बरडीहा प्रखंड के ओबरा और सरसतिया गांवों में आरा मशीनों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है. इन आरा मशीनों के संचालक जैसे ही लकड़ी काटने का काम खत्म करते हैं, मशीनों को छुपा देते हैं, ताकि प्रशासन की नजरों से बच सकें. सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, ओबरा गांव में पिछले सप्ताह भवनाथपुर उतरी वन प्रमंडल द्वारा एक आरा मशीन पर छापेमारी की गयी थी, लेकिन सरसतिया गांव में नदी किनारे चल रही आरा मशीन को नजरअंदाज कर दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि यह आरा मशीन उस स्थान पर चल रही थी, जहां संचालक पर एक फोरेस्टर की कृपादृष्टि थी, जिससे उसे कोई परेशानी नहीं हुई. स्थानीय लोगों ने बताया कि मझिआंव प्रखंड के टड़हे गांव में मुख्य मार्ग से केवल दो सौ मीटर दूर और बरडीहा प्रखंड के सरसतिया गांव में नदी किनारे आरा मशीनों का संचालन लगातार जारी है. यह आरा मशीनें स्थानीय जंगलों को नुकसान पहुंचा रही हैं और इसके कारण आसपास के पर्यावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों ने इस अवैध गतिविधि पर वन विभाग की चुप्पी को लेकर आश्चर्य जताया है. इस संदर्भ में गढ़वा उतरी वन विभाग के डीएफओ अंशुमान से संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन उनके सरकारी नंबर पर कॉल करने पर यह जानकारी मिली कि उनका नंबर अब उपयोग में नहीं है. इसके बाद रेंजर प्रमोद कुमार से बात की गयी, जिन्होंने बताया कि वह ऑपरेशन के बाद अस्पताल में भर्ती हैं. जंगलों का नष्ट होना और वैश्विक संकट इस संदर्भ में विशेषज्ञों का कहना है कि इन अवैध आरा मशीनों के संचालन से आस-पास के जंगल नष्ट होने के कगार पर हैं. इसके साथ ही ग्लोबल वार्मिंग का खतरा भी बढ़ रहा है, क्योंकि इन जंगलों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण असंतुलित हो रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है, जिसके कारण मौसम में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और आने वाले समय में यह मनुष्य के जीवन पर भी भारी संकट पैदा कर सकता है.
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