सत्संग दुर्लभ और सनातन धर्म सर्वोत्तम: डॉ धनंजय त्रिपाठी

सात दिवसीय यज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ रही लोगों की भीड़
सात दिवसीय यज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ रही लोगों की भीड़ प्रतिनिधि, हरिहरपुर ओपी क्षेत्र के चौबे मझिगावां गांव में सात दिवसीय यज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हो रहा है. कथा सखुईया खाला टोला में आयोजित की गयी है, जहां काशी के विद्वान कथा वाचक डॉ धनंजय त्रिपाठी श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करा रहे हैं. कथा के तीसरे दिन डॉ त्रिपाठी ने गोकर्ण जी की कथा सुनाते हुए कहा कि जीवन में अधिकांश वस्तुएं सहज रूप से प्राप्त हो जाती हैं, लेकिन सत्संग दुर्लभ होता है. उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा से ही संतों का सान्निध्य और सत्संग का अवसर मिलता है. डॉ त्रिपाठी ने सनातन धर्म को सर्वोत्तम बताते हुए कहा कि विश्व के अन्य सभी धर्म लोकधर्म हैं, जबकि सनातन धर्म अत्यंत प्राचीन और मूल धर्म है, जो अनादि काल से चला आ रहा है. उन्होंने समझाया कि यह शरीर नश्वर है, इसलिए इस पर अहंकार नहीं करना चाहिए. उन्होंने अध्यात्म के पांच विषयों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. कथा के दौरान उन्होंने ‘बिना माई के बेटा अधूरा बा’ भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया. साथ ही उन्होंने कहा कि जो पुत्र अपने माता-पिता पर अत्याचार करता है, उसे मृत्यु के पश्चात गया में पिंडदान और श्राद्ध के बाद भी मुक्ति प्राप्त नहीं होती. कथा के मुख्य यजमान श्रीकांत चौबे और अमरावती देवी हैं. यह धार्मिक आयोजन 23 अप्रैल से प्रारंभ हुआ और 29 अप्रैल तक चलेगा.
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