एक हजार से अधिक मास्टर रोल जीरो पाये गये

मनरेगा योजनाओं में अनियमितता की हुई जांच
मनरेगा योजनाओं में अनियमितता की हुई जांच प्रतिनिधि, धुरकी धुरकी प्रखंड में मनरेगा योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितता और रिश्वतखोरी के आरोप सामने आयें हैं. मास्टर रोल में हस्ताक्षर कराने व उसे स्वीकृत कराने के एवज में अवैध वसूली की शिकायत पर उपायुक्त के निर्देश पर श्री बंशीधर नगर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) प्रभाकर मिर्धा शनिवार को धुरकी प्रखंड कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले की गहन जांच-पड़ताल की. दरअसल, रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर कुछ दिन पूर्व धुरकी प्रखंड के सभी पंचायतों के मुखिया एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने उप विकास आयुक्त के समक्ष शिकायतें दर्ज करायी थी. जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि मनरेगा योजनाओं में मास्टर रोल निर्गत करने और उसे सिस्टम में दर्ज कराने के नाम पर लाभुकों से प्रति मास्टर रोल 100 रुपये की मांग की जाती है. आरोप है कि यह राशि बीपीओ नीरज पाल, कनीय अभियंता (जेई) अवलेश तिवारी तथा कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा मांगी जाती है. मुखियाओं का कहना है कि निर्धारित राशि नहीं देने पर संबंधित मास्टर रोल को जानबूझकर ‘जीरो’ कर दिया जाता है, जिससे मजदूरों की उपस्थिति अमान्य हो जाती है और उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं मिल पाता. इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एसडीओ प्रभाकर मिर्धा ने मनरेगा से संबंधित कागजातों एवं ऑनलाइन रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की. इस दौरान प्रखंड कार्यालय में मौजूद मनरेगा कर्मियों से पूछताछ कर मास्टर रोल की स्थिति का मिलान कराया गया. प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि प्रखंड में एक हजार से अधिक मास्टर रोल ‘जीरो’ किये गये हैं. इतनी बड़ी संख्या में मास्टर रोल जीरो होने से मनरेगा योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गये हैं, वहीं मजदूरों की मजदूरी भी प्रभावित हुई है. एसडीओ ने बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इतनी बड़ी संख्या में मास्टर रोल किस कारण से जीरो किये गये. इस संबंध में सोमवार को संबंधित रोजगार सेवक और पंचायत सेवकों को बुलाकर विस्तृत पूछताछ की जायेगी. आरोप निराधार : जेई कनीय अभियंता अवलेश तिवारी ने कहा कि प्रखंड में वे अकेले जेई हैं और काम का अत्यधिक दबाव रहता है. संभव है कि भूलवश देर से मास्टर रोल उनके लॉगिन में आया हो, जिसे छोड़ने के कारण वह जीरो हो गया हो. उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया. जांच में तथ्य आ जायेंगे सामने : बीपीओ बीपीओ नीरज पाल ने कहा कि रोजगार सेवक एवं पंचायत सेवक के हस्ताक्षर से जो भी मास्टर रोल प्राप्त होता है. जांच में दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जायेगा. उन्होंने कहा कि उन पर लगाये गये रिश्वत के आरोप तथ्यहीन हैं.
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