निजी विद्यालयों की मान्यता से जुड़ा मामला नीतिगत

निजी विद्यालयों की मान्यता से जुड़ा मामला नीतिगत
प्रतिनिधि, गढ़वा निजी विद्यालयों की मान्यता से जुड़ा मामला नीतिगत है, जिस पर निर्णय सचिव स्तर, राज्य कैबिनेट अथवा न्यायालय द्वारा लिया जाता है. जिला शिक्षा कार्यालय को केवल इन निर्णयों का अनुपालन करना होता है, लेकिन वर्तमान में जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा भ्रम की स्थिति उत्पन्न की जा रही है. यह आरोप निजी विद्यालयों के संगठन पासवा के महासचिव एसएन पाठक ने एक बयान जारी कर लगाया है. उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा कार्यालय स्वयं को नीतिगत निर्णय लेने वाला समझ रहा है, जिससे निजी विद्यालय संचालकों में भ्रम और आक्रोश की स्थिति है. एसएन पाठक ने बताया कि आरटीइ कानून के बाद झारखंड सरकार ने वर्ष 2011 में मान्यता नियमावली बनायी थी, जिसके तहत विद्यालयों ने आवेदन किया. कुछ विद्यालयों को मान्यता मिली, जबकि कई विद्यालय आज भी 15–16 वर्षों से मान्यता की प्रतीक्षा कर रहे हैं. निरीक्षण के बाद कई फाइलें निदेशालय में लंबित हैं. वर्ष 2019 में रघुबर दास सरकार द्वारा लायी गयी नयी नियमावली को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी थी. उस मामले में सरकार के सचिव ने शपथ पत्र देकर कहा था कि 2019 की नियमावली पूर्ववर्ती विद्यालयों पर लागू नहीं होगी.
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