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गोंड़ को साव दिखाकर जारी किया एलपीसी, मामला उजागर होने पर रद्द किया मोटेशन

Updated at : 10 Oct 2025 8:34 PM (IST)
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गोंड़ को साव दिखाकर जारी किया एलपीसी, मामला उजागर होने पर रद्द किया मोटेशन

गोंड़ को साव दिखाकर जारी किया एलपीसी, मामला उजागर होने पर रद्द किया मोटेशन

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प्रतिनिधि, गढ़वा भूमि माफिया और भ्रष्टाचार को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहनेवाले गढ़वा अंचल कार्यालय का एक नया मामला सामने आया है. यहां एक आदिवासी व्यक्ति को पिछड़ी जाति (साव) बताकर भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र (एलपीसी) निर्गत किया गया, जिसके आधार पर सीएनटी एक्ट के अंतर्गत प्रतिबंधित जमीन की रजिस्ट्रीकर दी गयी. हालांकि मामला उजागर होने पर अंचल कार्यालय ने नामांतरण (मोटेशन) वाद को रद्द कर दिया है. मामला गढ़वा शहर के सोनपुरवा मुहल्ले का है, जहां की भूमि गोंड़ समाज के नाम पर दर्ज है. चूंकि गोंड़ जाति अनुसूचित जनजाति में आती है, इसलिए सीएनटी एक्ट के तहत इस जाति की जमीन की बिक्री प्रतिबंधित है. बावजूद इसके,गढ़वा अंचल कार्यालय में एक सोची-समझी साजिश के तहत गोंड़ को साव दिखाकर एलपीसी निर्गत कर दी गयी और बाद में गढ़वा निबंधन कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री भी करा दी गयी. दस्तावेजों के अनुसार, सोनपुरवा निवासी प्रदीप कुमार, पिता विश्वनाथ साव, के नाम से खाता संख्या 50, प्लॉट संख्या 321 में 12 डिस्मिल जमीन का एलपीसी 25 जनवरी 2025 को निर्गत किया गया था. प्रदीप कुमार ने अपनी श्रेणी पिछड़ा वर्ग बताते हुए यह दर्शाया कि वह सीएनटी एक्ट के दायरे से बाहर है. इस आधार पर उन्होंने तीन डिस्मिल जमीन की रजिस्ट्री मदरसा रोड गढ़वा के एक व्यक्ति के नाम करा दी. लेकिन जब उक्त दस्तावेज नामांतरण के लिए फिर से अंचल कार्यालय में प्रस्तुत किये गये, तब तक मामला प्रकाश में आ चुका था. जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि प्रदीप कुमार वास्तव में गोंड़ जाति के हैं. इस पर नामांतरण वाद (2025/2025-26) को यह कहते हुए रद्द कर दिया गया कि विक्रेता ने अपनी जाति छुपाकर रजिस्ट्री की है. अंचल कार्यालय ने इस तथ्य की पुष्टि गोंड़ समाज के अध्यक्ष हीरालाल गोंड़ के लिखित प्रमाणपत्र और 2024 की जनगणना रिकॉर्ड के आधार पर की. इसके बाद अंचल अधिकारी ने फाइल पर टिप्पणी दर्ज करते हुए वाद को रद्द कर दिया. जांच कर दोषियों पर होगी कार्रवाई : अंचल अधिकारी इस संबंध में अंचल पदाधिकारी सफी आलम ने कहा कि एलपीसी जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति सीएनटी एक्ट के दायरे में आता है या नहीं. यदि मौरूसी जमीन का मामला हो, तो खतियान और जातीय रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय लिया जाता है. उन्होंने कहा कि सोनपुरवा में जाति छुपाकर रजिस्ट्री करने के मामले की जांच की जा रही है, दोषी पाये जाने पर कार्रवाई की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Akarsh Aniket

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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