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बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह बुद्ध कहलाये

Updated at : 12 May 2025 9:33 PM (IST)
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बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह बुद्ध कहलाये

बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह बुद्ध कहलाये

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श्री बंशीधर नगर.

स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर के वंदना सभा में भारत माता, ओम्, मां शारदे तथा गौतम बुद्ध के चित्र के समक्ष आचार्य कृष्ण कुमार पांडेय और आचार्य हिमांशु झा ने दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन कर गौतम बुद्ध जयंती का शुभारंभ किया. मौके पर तृतीय कक्षा की छात्रा निदा परवीन, सप्तम-अ के छात्र अर्णव राज पांडेय, अष्टम-ब की छात्रा दिव्या रानी, सप्तम-अ के छात्र उत्कर्ष पांडेय, अष्टम-ब के छात्र शिवम गुप्ता तथा नवम-ब की छात्रा अंजलि कुमारी ने महात्मा बुद्ध का जीवनवृत्त प्रस्तुत किया. आचार्य हिमांशु झा ने संस्कृत भाषा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि शाक्यवंश के गौतम गोत्र में जन्म लेने के कारण उन्हें गौतम कहा गया एवं बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त करने के बाद वह बुद्ध के नाम से विख्यात हुए. वैशाख पूर्णिमा तिथि को ही बुद्ध का जन्म, बोधि प्राप्ति और निर्वाण हुआ है. उन्होंने अपना मुख्य संदेश पाली भाषा में दिया था.

उपस्थित लोग : मौके पर प्रभारी प्रधानाचार्य सुधीर प्रसाद श्रीवास्तव, आचार्य नंदलाल पाण्डेय, सत्येन्द्र प्रजापति, अविनाश कुमार, नीरज कुमार, सुजीत कुमार दुबे, दिनेश कुमार, उमेश कुमार, रुपेश कुमार, कृष्ण मुरारी, प्रसून कुमार, प्रदीप कुमार गुप्ता, हृषिकेश तिवारी, बिक्रम प्रसाद, आरती श्रीवास्तव, नीति कुमारी, रेनू पाठक, प्रियंवदा, सलोनी कुमारी, तन्वी जोशी, नेहा कुमारी व खुशबू सिंघल की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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