परिवार वह पाठशाला, जहां व्यक्तित्व गढ़े जाते हैं

Author Sanjay
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परिवार वह पाठशाला, जहां व्यक्तित्व गढ़े जाते हैं

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गढ़वा.

अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर जनक विकास धारा ऑर्गेनाईजेशन, नेहरू युवा केंद्र एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मेराल के एसजीएन मॉर्डन किंडर गार्डेन उच्च विद्यालय मेराल में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के निदेशक धर्मेंद्र देव ने की. मौके पर पीएलवी रामाशंकर चौबे ने विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के संबंध में बताया. कहा कि परिवार वह पाठशाला है जहां व्यक्तित्व गढ़े जाते हैं. यह वह जगह है जहां आपका मूल्यांकन, आपकी सफलता और असफलता से नहीं होता. यहां बाहरी दुनिया की तमाम नाकामियों और हताशा के बाद सुकून का आलिंगन मिलता है. उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार का वास्तविक स्वरूप संयुक्त परिवार है, न की एकल परिवार. माता-पिता, चाचा-चाची, दादा-दादी ऐसे रिश्तों के ताने-बाने से गुथा परिवार ही सुदृढ भारतीय परिवार की पहचान है. लेकिन अब सब कुछ बदल गया है.

एकल परिवार की परिपाटी ने लोगों को बिखेर दिया : एकल परिवार की परिपाटी ने लोगों को बिखेर दिया है. उन्होंने कहा कि आज यह संकल्प लेने का दिन है कि हम संयुक्त परिवार में रहने के लिए अपने-अपने अभिभावकों को जागरूक करें. कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से स्पॉसरशिप योजना के बारे में भी बताया गया. धन्यवाद ज्ञापन पूजा कुमारी ने किया.

उपस्थित लोग : मौके पर एनवाइके के माइ युवा भारत के जिला अधिकारी पमीर सिंह, रमना प्रखंड के पीएलवी राम इकबाल चौबे ने भी विचार रखा. इस मौके पर विद्यालय के शिक्षक संजय कुमार गुप्ता, पूजा कुमारी, अजीत कुमार पांडेय व करण कुमार कौशल मौजूद थे.

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