32 साल से जीर्णोद्धार का इंतजार कर रहा ऐतिहासिक भीता बांध, 300-400 एकड़ जमीन की सिंचाई प्रभावित
टुटा हुआ भीता बांध | Prabhat Khabar Network
भवनाथपुर में अंग्रेजों के जमाने का भीता बांध 32 साल से टूटा पड़ा है, जिससे सैकड़ों एकड़ जमीन बंजर हो गई है। किसान सिंचाई के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं।
भवनाथपुर,गढ़वा: भवनाथपुर प्रखंड की भवनाथपुर पंचायत के बुका गांव में अंग्रेजों के जमाने में बना ऐतिहासिक ‘भीता बांध’ पिछले 32 वर्षों से टूटा हुआ है. बांध टूटने के बाद से गांव की सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि बंजर हो गयी है, लेकिन अब तक इसका जीर्णोद्धार नहीं हो सका है. नतीजतन किसान सिंचाई के अभाव में खेती करने को मजबूर हैं.
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वर्ष 2025 में विधायक अनंत प्रताप देव के निर्देश पर लघु सिंचाई विभाग के अधिकारी ने भवनाथपुर अंचल से भीता बांध के डूब क्षेत्र, रैयती जमीन और सरकारी जमीन से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद विभाग के अधिकारियों ने बांध का सर्वे कर जीर्णोद्धार के लिए प्राक्कलन तैयार किया था. विभाग के अनुसार, करीब एक करोड़ रुपये की लागत से बांध का जीर्णोद्धार किया जाना था, जिसमें पइन का निर्माण भी शामिल था.
हालांकि, अब विधायक और ग्रामीणों के प्रयास पर भी ग्रहण लगता दिख रहा है. भीता बांध का डूब क्षेत्र रैयती जमीन में पड़ रहा है, जिस कारण जीर्णोद्धार में बाधा उत्पन्न हो रही है. कनीय अभियंता पंकज कुमार ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि भीता बांध का डूब क्षेत्र रैयती जमीन में पड़ रहा है, जिस कारण परेशानी हो रही है.
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स्थानीय लोगों के अनुसार, यह बांध अंग्रेजों के शासनकाल में बुका के राउत परिवारों ने वर्ष 1914 में अपने निजी खर्च से गांवों की खेती के लिए बनवाया था. लगभग 112 वर्ष पुराना यह बांध कभी क्षेत्र की लाइफलाइन हुआ करता था. हर साल मानसून में बांध में पानी जमा होता था, जिससे रबी और खरीफ दोनों फसलों की सिंचाई आसानी से हो जाती थी.
ग्रामीणों ने बताया कि उनके दादा-परदादा बताते थे कि इस बांध से पूरे इलाके में धान की अच्छी उपज होती थी. करीब 32 वर्ष पहले तेज बारिश और रखरखाव के अभाव में बांध का एक बड़ा हिस्सा टूट गया. इसके बाद से इसमें पानी का ठहराव नहीं हो पा रहा है.
बांध टूटने से 300-400 एकड़ जमीन की सिंचाई प्रभावित
बांध टूटने के बाद बुका, भवनाथपुर और आसपास के गांवों की करीब 300-400 एकड़ जमीन की सिंचाई प्रभावित हुई है. पहले जहां साल में दो फसलें होती थीं, वहीं अब किसान सिर्फ बारिश के भरोसे एक फसल की खेती कर पा रहे हैं.
ग्रामीणों के अनुसार, भीता बांध करीब 32 वर्ष पूर्व टूट गया था. वर्ष 2004 में तत्कालीन विधायक सह जल संसाधन मंत्री रामचंद्र केशरी ने पहली बार लघु सिंचाई विभाग से 37.36 लाख रुपये की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया था. इसके बाद करीब 14 वर्ष पूर्व फिर से बांध टूट गया और ग्रामीण इसके पुनर्निर्माण का इंतजार कर रहे हैं.
किसान सुनील यादव और प्रदीप राउत ने बताया कि बांध दुरुस्त हो जाए तो इलाके में सब्जी और गेहूं की खेती भी की जा सकती है. फिलहाल ट्यूबवेल और डीजल पंप से सिंचाई करना महंगा पड़ता है. छोटे किसान इस वजह से खेती छोड़ने को मजबूर हैं.
कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से लगा चुके हैं गुहार
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले 14 वर्षों में कई बार जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से बांध के जीर्णोद्धार की मांग की गयी है. वर्ष 2025 में विधायक अनंत प्रताप देव से भी बांध के जीर्णोद्धार की मांग की गयी थी, जिसके बाद पहल शुरू हुई थी.
भवनाथपुर पंचायत की मुखिया बेबी देवी ने कहा कि बांध के जीर्णोद्धार के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि रैयती जमीन से जुड़ी समस्या का समाधान कर जल्द बांध का जीर्णोद्धार कराया जाएगा, ताकि क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके.
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By Prabhat Khabar News Desk
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