जमीन की पेंच फंसा पांच मुसहर परिवारों का अबुआ आवास

जल मीनार और बिजली तो पहुंची, पर पक्के घर के लिए नहीं मिल रही एनओसी
जल मीनार और बिजली तो पहुंची, पर पक्के घर के लिए नहीं मिल रही एनओसी रमेश विश्वकर्मा, डंडई झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी अबुआ आवास योजना डंडई प्रखंड में जमीन की कानूनी अड़चनों के चलते ठप पड़ती नजर आ रही है. प्रखंड के मुसहर समुदाय के पांच अत्यंत गरीब परिवारों को आवास की स्वीकृति तो मिल गयी है, लेकिन जमीन के अभाव में निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है. यह परिवार जिस जमीन पर पीढ़ियों से रह रहे हैं, उसे अब वन क्षेत्र का हिस्सा बताकर निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है. लाभुक कुंती देवी, सोनाली मुसहरीन, रीना मुसहरीन, काली देवी और महेंद्र मुसहर के पास सरकार द्वारा जारी आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें इसी बस्ती का पता दर्ज है. सरकार ने ””””जल जीवन मिशन”””” के तहत जल मीनार भी बनवा दी है और बिजली के पोल भी लगाये हैं. बावजूद इसके, जब पक्का घर बनाने की बारी आयी, तो विभाग ने इस जमीन को विवादित बता दिया. श्रवण मुसहर ने कहा कि सरकार कहती है जल, जंगल और जमीन मूलवासियों की है. हम पीढ़ियों से यहां झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं, यही हमारी पहचान है. यदि हमें यही थोड़ी सी जमीन नहीं मिली, तो हम कहीं और नहीं जायेंगे. लखन मुसहर ने सवाल उठाया कि जब बिजली और पानी पहुंच सकते हैं, तो घर बनाने का अधिकार क्यों नहीं? स्थानीय मुखिया धनवंती देवी ने कहा कि यह केवल पांच परिवारों का नहीं, बल्कि पूरे टोले का भविष्य है. उन्होंने मांग की है कि बुनियादी सुविधाएं मिलने के बाद इस बस्ती को मानव बस्ती मानकर नियमित किया जाए और परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर पट्टा या विशेष अनुमति दी जाये. …………… कोट मामला संज्ञान में है. ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जायेगा. लाभुकों से आवेदन प्राप्त होने के बाद गहन जांच की जायेगी. पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में हर संभव प्रयास किया जायेगा. जयशंकर पाठक, अंचल पदाधिकारी , डंडई
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