मुसलिम व इस्माइल अंसारी के भजन पर झूम उठे श्रोता
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Mar 2017 7:42 AM (IST)
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दानी विश्वकर्मा ने कव्वाली प्रस्तुत कर हिंदू-मुसलिम एकता का संदेश दिया वर्ष प्रतिपदा पर संस्कार भारती ने लोक कलाकारों को एकमंच पर लाया मुसलिम, इस्माइल व दानी विश्वकर्मा को सम्मानित किया गया गढ़वा : वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर संस्कार भारती की गढ़वा जिला इकाई ने लोक कलाकारों को सम्मानित किया. स्थानीय मेलोडी मंडप में […]
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दानी विश्वकर्मा ने कव्वाली प्रस्तुत कर हिंदू-मुसलिम एकता का संदेश दिया
वर्ष प्रतिपदा पर संस्कार भारती ने लोक कलाकारों को एकमंच पर लाया
मुसलिम, इस्माइल व दानी विश्वकर्मा को सम्मानित किया गया
गढ़वा : वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर संस्कार भारती की गढ़वा जिला इकाई ने लोक कलाकारों को सम्मानित किया. स्थानीय मेलोडी मंडप में आयोजित इस समारोह में लोक कलाकारों ने एक से बढ़कर एक अपने लोक गीतों की प्रस्तुति से उपस्थित लोगों की काफी तालियां बटोरीं. वर्ष प्रतिपदा उत्सव का उदघाटन उपस्थित अतिथियों ने भगवान नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर व पुष्प अर्पित किया गया. तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत सुरागिनी बाला ने संस्कार भारती के ध्येय गीत साधयति संस्कार भारती… से किया गया. वर्ष प्रतिपदा उत्सव का विषय प्रवेश कराते हुए संस्कार भारती के पलामू विभाग प्रमुख नीरज श्रीधर ने कहा कि संस्कार भारती उभरते कलाकारों को उचित मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को निखारने का कार्य निरंतर कर रही है.
संस्कार भारती के द्वारा मनाये जानेवाले छह उत्सवों में से वर्ष प्रतिपदा भी एक उत्सव है. इस अवसर पर लोक कलाकारों को सम्मानित किया जा रहा है. इस अवसर पर मुख्य अतिथि सीआरपीएफ 172 बटालियन के कमांडेट कैलाश आर्य ने कहा कि संस्कार भारती का उद्देश्य बड़ा ही पावन है.
इस संस्था द्वारा निरंतर ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति को पल्लवित-पुष्पित करने का कार्य किया जाता रहा है. आज भारतीय नववर्ष के शुभारंभ के अवसर पर लोक कलाकारों द्वारा लोक गायन का कार्यक्रम काफी प्रशंसनीय है. इसमें मुसलिम कलाकारों द्वारा हरिकीर्तन व दानी विश्वकर्मा द्वारा कव्वाली की प्रस्तुति समाज के लिए बहुत बड़ा संदेश है कि कलाकार किसी मजहब की सीमा में बंध कर नहीं रहते हैं. इसके पूर्व मुसलिम अंसारी और इस्माइल अंसारी के जहां भजन व हरिकीर्तन की प्रस्तुति कर वहीं दानी विश्वकर्मा ने कव्वाली प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी. इन तीनों कलाकारों को भगवान नटराज की प्रतिमा, अंगवस्त्र एवं सम्मान पत्र प्रदान किया गया. समारोह के दौरान संगीत शिक्षक पीके मिश्र के तबला संगत पर सुरागिनी बाला ने अपने पिता ब्रजेश तिवारी द्वारा रचित संस्कार भारती…गीत प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
कार्यक्रम में केंद्रीय विद्यालय के संगीत शिक्षक अलोक कुमार, बाल कलाकार पुष्पिका मिश्रा, संस्कार भारती के उपाध्यक्ष ब्रजेश तिवारी, साहित्य प्रमुख शंभू कुमार तिवारी की संस्कृत भाषा में प्रस्तुत कजरी की भी काफी प्रशंसा हुई. संस्कार भारती के लोक कला संयोजक प्रेम दिवाना के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन मातृशक्ति प्रमुख अंजली शास्वत ने तथा धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष रामविलास केसरी ने किया.
इस अवसर पर संस्कार भारती गढ़वा इकाई के परामर्श के संरक्षक मंडल के पंडित सुदर्शन मिश्र, मदन प्रसाद केसरी, कृत्यानंद श्रीवास्तव, डॉ पातंजलि केसरी, संयोजक दया शंकर गुप्ता, उपाध्यक्ष श्याम नारायण पांडेय, संगठन मंत्री अभिमन्यु पाठक, जनसंपर्क प्रमुख अरविंद कुमार मेहता, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के रासबिहारी तिवारी, भाजपा नगरमंडल अध्यक्ष चन्दन जायसवाल, आरएसएस के प्रांतीय बौद्धिक प्रमुख ज्वाला तिवारी, जिला प्रचार प्रमुख सतीश मिश्र, जिला प्रचारक सत्यप्रकाश सहित काफी संख्या में कलाकार व श्रोता उपस्थित थे.
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