ढिबरी के सहारे कटती हैं रातें
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Jun 2015 8:59 AM (IST)
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डंडई (गढ़वा) : डंडई प्रखंड मुख्यालय से सटा बैलाझखड़ा गांव आजादी के 68 वर्ष बीतने के बाद भी ढिबरी युग में जीने को विवश है. प्रखंड मुख्यालय से मात्र आधा किमी की दूरी पर यह गांव है. इस गांव के आसपास बिजली पहुंच चुकी है. लेकिन इस गांव को आज तक बिजली से नहीं जोड़ा […]
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डंडई (गढ़वा) : डंडई प्रखंड मुख्यालय से सटा बैलाझखड़ा गांव आजादी के 68 वर्ष बीतने के बाद भी ढिबरी युग में जीने को विवश है. प्रखंड मुख्यालय से मात्र आधा किमी की दूरी पर यह गांव है. इस गांव के आसपास बिजली पहुंच चुकी है. लेकिन इस गांव को आज तक बिजली से नहीं जोड़ा जा सका. इसके कारण गांव में रहनेवाले आदिवासियों एवं अल्पसंख्यकों में सरकार के प्रति काफी क्षोभ है. वर्ष 2011 में इस गांव को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना से जोड़ने का काम चालू किया गया. इससे लोगों में आशा की किरण जगी थी. लेकिन उक्त योजना के नाम पर सिर्फ यहां कुछ पोल लगा कर छोड़ दिये गये.
जबकि अधिकतर पोल-तार रखा रह गया. गांव में बिजली नहीं पहुंचने से गांव के लोग अपने को काफी पिछड़ा महसूस करते हैं. उनकी कृषि भी इसके कारण प्रभावित होती है. गांव की मिी काफी उपजाऊ होने के बाद भी सिंचाई के साधन के अभाव में यहां खेती नहीं हो पाती.
ग्रामीणों ने कहा, जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं देते: ग्रामीणों से इस संबंध में बात करने पर ग्रामीण विश्वेश्वर सिंह ने कहा कि जब चुनाव का समय आता है, तो सभी दल के नेता उनके गांव कोबिजली से जोड़ने का वादा करते हैं. किंतु चुनाव के बाद वे पुन: उनके गांव में चेहरा दिखाने नहीं आते.
ग्रामीण अरुण सिंह ने कहा कि उन्होंने बचपन से ही केरोसिन खरीद क र ढिबरी से पढ़ाई कर मैट्रिक तक की पढ़ाई पूरी की है. वह स्थिति आज के बच्चों के साथ भी बनी हुई है. ग्रामीण विनय सिंह, भरदुल सिंह, अनुज प्रताप सिंह आदि ने उनके गांव की उपेक्षा करने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन को जिम्मेवार बताया है.
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