बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन निर्माण को लेकर आंदोलन की तैयारी

Updated at : 16 Jun 2019 1:28 AM (IST)
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बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन  निर्माण को लेकर आंदोलन की तैयारी

बड़गड : बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन निर्माण की मांग को लेकर शनिवार को प्रखंड मुख्यालय स्थित हनुमान मंदिर चौक पर प्रखंड के सभी जनप्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों की बैठक हुई. बैठक में विगत 70 वर्षों से पलामू, चतरा व छत्तीसगढ़ के सरगुजा संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाली अधूरे पड़े उक्त रेल लाइन निर्माण कार्य को […]

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बड़गड : बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन निर्माण की मांग को लेकर शनिवार को प्रखंड मुख्यालय स्थित हनुमान मंदिर चौक पर प्रखंड के सभी जनप्रतिनिधियों व गणमान्य नागरिकों की बैठक हुई. बैठक में विगत 70 वर्षों से पलामू, चतरा व छत्तीसगढ़ के सरगुजा संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाली अधूरे पड़े उक्त रेल लाइन निर्माण कार्य को पुनः चालू कराने की बहुप्रतीक्षित मांग को लेकर बरवाडीह-चिरमिरी रेल लाइन जन संघर्ष समिति नामक कमेटी का गठन करने का निर्णय लिया गया.

साथ ही उक्त कमेटी के माध्यम से चरणबद्ध आंदोलन चलाने पर भी विचार-विमर्श किया गया. बैठक में उपस्थित लोगों ने सर्वप्रथम सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि उक्त परियोजना को चालू कराने हेतु केंद्र की भाजपानीत नरेंद्र मोदी की सरकार को अपने क्षेत्रीय सांसद के सहयोग से संसद में मजबूती से आवाज उठाने के लिये कहा जायेगा.
इस संबंध में सांसद को मांगपत्र सौंपने और इसको लेकर उक्त तीनों संसदीय क्षेत्र में हस्ताक्षर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. इसके आलोक में रेलवे लाइन जन संघर्ष समिति के बैनर तले शनिवार को समिति के पदाधिकारियों द्वारा पलामू सांसद बीडी राम को मांगपत्र सौंपा गया. आज जिन्होंने मांग पत्र सौंपा, उनमें समिति के अध्यक्ष प्रेमसागर जयसवाल, उपाध्यक्ष आनंद सोनी, सचिव सह जिप सदस्य रमेश सोनी, उप सचिव घनश्याम कुमार सोनी, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार राज, उप कोषाध्यक्ष रमेश गुप्ता, संदीप गुप्ता, बजरंग प्रसाद, सुभाष प्रसाद आदि के नाम शामिल हैं.
क्या है मांगपत्र में : मांगपत्र में वर्ष 1947 से अधूरे पड़े रेल मार्ग का निर्माण कार्य पुनः चालू कराने व इस क्षेत्र के लिये नये रेल गाड़ी चलाने की बात कही गयी है. इसमें दर्शाया गया है कि बरवाडीह-चिरमिरी के नाम से विख्यात रेल मार्ग की शुरुआत वर्ष 1935 में हुआ और वर्ष 1946 तक काम चला. आजादी के बाद इस रेलमार्ग को घाटे का सौदा मानकर इसे अधूरा ही छोड़ दिया गया. इस क्रम में चिरमिरी से अंबिकापुर तक रेल मार्ग का निर्माण कराया जा चुका है. इसके बाद झारखंड राज्य के बरवाडीह जंक्शन से लेकर छत्तीसगढ़ राज्य के अंबिकापुर तक रेल मार्ग निर्माण का कार्य प्रारंभ होने की बाट जोह रहा है. मांगपत्र में यह भी कहा गया है कि देश के आजादी के समय से बंद पड़ा यह रेल मार्ग असीम संभावनाओं से भरपूर है.
बरवाडीह-अंबिकापुर रेल मार्ग प्रारंभ होने से कोलकाता से मुंबई की दूरी लगभग 400 किलोमीटर कम हो जायेगी. वहीं अगर यह रेल लाइन का निर्माण हो गया, तो मुंबई से हावड़ा के बीच सीधी तीसरी रेल लाइन हो जायेगी. अंग्रेजों द्वारा चयनित यह रेल मार्ग अनेकों कोयला, बॉक्साइट, डोलोमाइट, अल्यूमीनियम आदि खदानों से होकर गुजरती है. सड़क मार्ग से खनिज ढुलाई का कार्य आज भी क्षेत्र से धड़ल्ले से जारी है.
साथ ही इसके मार्ग में कई पर्यटन स्थल व दर्शनीय स्थल भी पड़ते हैं. इस तरह इस रेलमार्ग का निर्माण हो जाने से एक ओर जहां क्षेत्र का विकास होगा, वहीं यात्रा में समय की बचत भी हो जायेगी. सड़क मार्ग पर बहुत दबाव भी घट जायेगा. गौरतलब है कि इस रेलमार्ग के बहुत सारे पुल-पुलिया एवं स्टेशन भी बने हुए हैं, जो आज भी पलामू, चतरा व छत्तीसगढ़ के सरगुजा संसदीय क्षेत्र के लोगों को मुंह चिढ़ा रही है.
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