नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ शुरू
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 Nov 2018 7:59 AM (IST)
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गढ़वा : आस्था का महापर्व छठ को लेकर रविवार को छठव्रतियों द्वारा नहाय खाय के साथ चार दिवसीय पर्व शुरू हो गया़ रविवार को छठव्रती स्नान के बाद कद्दू -भात खाकर इसकी शुरुआत की. सोमवार को पहला अर्घ्य के बाद खरना किया जायेगा तथा मंगलवार को 24 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ होगा. सूर्योपासना के […]
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गढ़वा : आस्था का महापर्व छठ को लेकर रविवार को छठव्रतियों द्वारा नहाय खाय के साथ चार दिवसीय पर्व शुरू हो गया़ रविवार को छठव्रती स्नान के बाद कद्दू -भात खाकर इसकी शुरुआत की. सोमवार को पहला अर्घ्य के बाद खरना किया जायेगा तथा मंगलवार को 24 घंटे का निर्जला उपवास प्रारंभ होगा.
सूर्योपासना के इस त्योहार को लेकर जिला मुख्यालय सहित सभी प्रखंडों में जलाशयों व नदी के किनारे साफ-सफाई के बाद घाटों का सजाने का काम किया जा रहा है़ लगभग सभी घाटों को सुस्सजित व संचालन के लिए छठ पूजा कमेटी का गठन किया गया है़ जिला मुख्यालय स्थित दानरो नदी के तट को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है़ छठ घाटों पर रोशनी व पानी को लेकर कमेटी द्वारा कार्य किया जा रहा है़
आस्था का महापर्व है छठ पूजा
कार्तिक महीने में मनाये जाने वाले छठ पूजा त्योहार का बेहद महत्व है. छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का पर्व है. छठ को सूर्य देवता की बहन माना जाता है. छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति व धन-धान्य से संपन्न करती हैं. सूर्य देव की आराधना का यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. चैत्र शुक्ल षष्ठी व कार्तिक शुक्ल षष्ठी. यद्यपि कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाने वाला छठ पर्व मुख्य माना जाता है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को छठ पूजा, डाला छठ, छठी माई पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा आदि कई नामों से जाना जाता है.
क्यों करते हैं श्रद्धालु छठ पूजा
छठ पूजा करने या उपवास रखने के सबके अपने अपने कारण होते हैं लेकिन मुख्य रूप से छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिए की जाती है. सूर्य देव की कृपा से सेहत अच्छी रहती है. सूर्य देव की कृपा से घर में धन धान्य के भंडार भरे रहते हैं. छठ माई संतान प्रदान करती हैं. सूर्य समान श्रेष्ठ संतान के लिये भी यह उपवास रखा जाता है. अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये भी इस व्रत को रखा जाता है.
कौन हैं देवी षष्ठी और कैसे हुई उत्पत्ति
छठ देवी को सूर्य देव की बहन बताया जाता है. लेकिन छठ व्रत कथा के अनुसार छठ देवी ईश्वर की पुत्री देवसेना बतायी गयी हैं. देवसेना अपने परिचय में कहती हैं कि वह प्रकृति की मूल प्रवृत्ति के छठवें अंश से उत्पन्न हुई हैं. यही कारण है कि इन्हें षष्ठी कहा जाता है. देवी कहती हैं यदि आप संतान प्राप्ति की कामना करते हैं, तो मेरी विधिवत पूजा करें. यह पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी को की जाती है़
कांडी में भी छठ महापर्व शुरू
कांड़ी. प्रखंड में हिन्दुओं का महान पर्व छठ नहाय खाए के साथ रविवार को शुरू हो गया़ चार दिन तक चलनेवाले इस पर्व में पहले दिन सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर तथा अरवा चावल व कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ग्रहण कर व्रतियों ने पर्व की शुरुआत की़ सोमवार को खरना व मंगलवार को निर्जला व्रत किया जायेगा़ बुधवार को सूर्य भगवान को सुबह का अर्ध्य देने के साथ व्रत संपन्न होगा़ छठ पर्व को लेकर प्रखंड के सभी गांव में छठ घाटों की सफाई कर ली गयी है़ वहां की सजावट आदि का काम अंतिम चरण में है़ छठ का पर्व प्रसिद्ध झरना तीर्थ स्थल सतबहिनी, बलियारी, बरवाडीह, सुन्डीपूर, गाड़ा खुर्द, खरौंधा, कोरगांई, लमारी, सोहगाड़ा आदि गांवों में भव्य रूप से मनाया जायेगा़
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