71 वर्ष बाद भी ढिबरी में जीने को विवश

Updated at : 20 Feb 2018 3:36 AM (IST)
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71 वर्ष बाद भी ढिबरी में जीने को विवश

II मुकेश तिवारी II मूलभूत सुविधा से वंचित है रमकंडा का बैदेशी गांव सड़क, बिजली, पानी व स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव गांव से 20 युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं 40 लोगों का जॉब कार्ड है, पर काम नहीं रमकंडा : 24 घर और इन घरों में रहने वाले करीब 150 लोगों […]

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II मुकेश तिवारी II
मूलभूत सुविधा से वंचित है रमकंडा का बैदेशी गांव
सड़क, बिजली, पानी व स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव
गांव से 20 युवा रोजगार की तलाश में पलायन कर चुके हैं
40 लोगों का जॉब कार्ड है, पर काम नहीं
रमकंडा : 24 घर और इन घरों में रहने वाले करीब 150 लोगों की दर्द भरी कहानी को सुनने वाला कोई नहीं है. चारों तरफ घनघोर जंगलों से घिरा रमकंडा प्रखंड के सीमा पर स्थित बलिगढ़ पंचायत का बैदेशी गांव आजादी के 71 वर्षों के बाद भी अपने मूलभूत सुविधा से वंचित है.
आज भी यहां के लोग ढिबरी युग में जीने को विवश हैं. अभी तक यहां बिजली नहीं पहुंची. आवागमन के लिए इन घनघोर जंगलों के बीच पगडंडी रास्ता ही सहारा है. पंचायत मुख्यालय से करीब सात किमी दूर इस गांव में पहुंचने के लिए सड़क ही नहीं है. बरसात को छोड़ अन्य मौसम में बाइक के सहारे यहां पहुंचा जा सकता है. बरसात के दिनों में पूरा गांव पंचायत व प्रखंड मुख्यालय से कट जाता है. बरसात में लोग कई दिनों का राशन एकत्रित कर रख लेते हैं. ताकि राशन के लिए परेशानी न हो. इसके साथ ही यहां न तो स्वास्थ्य सुविधा है और न ही रोजगार के साधन. इसके साथ ही यहां पेयजल की भी घोर समस्या है. पंचायत निधि से लगा दो चापाकल पानी देना बंद कर दिया है. वहीं पेयजल के लिए गांव के विद्यालय का चापाकल ही सहारा बना हुआ है. लेकिन वो भी रुक- रुककर पानी दे रहा है.
ऐसे में यहां के लोगों के लिये गर्मी में पानी के लिए नदी ही सहारा बना हुआ है. इसके साथ ही यहां खेतों की सिंचाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. गांव के मरीजों का इलाज के लिए गांव वाले डोली खटोली का सहारा लेते हैं. तब जाकर मरीजों को बिश्रामपुर तक पहुंचाते हैं, जिसके बाद लोग वाहन से रंका अस्पताल पहुंचते हैं. रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है. गांव के करीब 20 युवा रोजगार की तलाश में इन दिनों पलायन कर चुके हैं.
ग्रामीण सोहराई यादव, बनारसी यादव, कामेश यादव, पार्वती कुंवर, रीमा देवी, पार्वती देवी, मनीता कुमारी, सुनीता कुमारी, पुनिता कुमारी आदि ने बताया कि गांव में 40 लोगों का जॉब कार्ड है. लेकिन मनरेगा से यहां कोई योजना नहीं चलने से बाहर कमाने को मजबूर हैं.
गांव के आसपास के इलाको में मोबाइल नेटवर्क नही होना यहां के लोगों की अलग परेशानी है. लोग अपने परिचितों से बात भी नही
कर सकते हैं. हां सरकार ने शिक्षा व्यवस्था के लिए एक विद्यालय खोल रखा है. जिसमें महज 15 बच्चे पढ़ाई करते हैं. लेकिन इस विद्यालय में एक शिक्षक होने की वजह से विद्यालय भी सही तरीके से संचालित नहीं होता है. ग्रामीणों ने बताया कि यहां अक्सर हाथियों का झुंड गांव में पानी व भोजन की तलाश में आता है. बीते वर्षों में गांव के ही एक युवक को हाथियों के झुंड ने मार डाला था.
सुविधा पहुंचाने का प्रयास जारी: मुखिया : इस संबंध में पूछे जाने पर बलिगढ़ पंचायत के मुखिया अनिता देवी ने कहा की यहां पंचायत निधि से मिलने वाली सुविधा पहुंचाने का प्रयास जारी है.
जल्द ही गांव में पक्की सड़क बनाया जायेगा. इसके साथ ही पेयजल के लिए चापाकल लगाया गया है. कहा कि वन विभाग की वजह से पंचायत मुख्यालय से गांव तक सड़क नही बन पा रहा है. इस संबंध में उपायुक्त को रिपोर्ट सौंपा गया है. इस संबंध में पूछे जाने पर बीडीओ रामजी वर्मा ने कहा कि गांव में मूलभूत सुविधा पहुंचाने का प्रयास किया जायेगा. वहीं गांव के हालात से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जायेगा.
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