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Jharkhand News: यूक्रेन-रूस युद्ध बंद नहीं हुआ तो झारखंड पर पड़ेगा गहरा प्रभाव, खाद की हो सकती है किल्लत

रूस यूक्रेन युद्ध का असर झारखंड में खाद की आपूर्ति पर पड़ सकता है. केन्द्र ने इसको लेकर झारखंड को सावधान किया है. भारत सरकार कुल जरूरत का 66 फीसदी खाद देश में तैयार करती है. शेष खाद दूसरे देशों से आता है. इसमें सबसे अधिक खाद रूस और यूक्रेन से आता है. जो की अभी बंद हैं.

By Prabhat Khabar Print Desk
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Jharkhand News: खाद की हो सकती है किल्लत
Jharkhand News: खाद की हो सकती है किल्लत
Prabhat Khabar

मनोज सिंह,रांची: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का असर झारखंड में खाद की आपूर्ति पर पड़ सकता है. केंद्र ने झारखंड सरकार को भी इससे अवगत कराया है. केंद्र ने राज्य सरकार से कहा है कि इस वर्ष खरीफ के मौसम में खाद की आपूर्ति पर विशेष नजर रखने की जरूरत है. किसानों को इसके विकल्प की जानकारी देने की आवश्यकता है. इसे लेकर सोमवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर फिर राज्यों के साथ समीक्षा करनेवाले हैं.

भारत सरकार कुल जरूरत का 66 फीसदी खाद देश में तैयार करती है. शेष खाद दूसरे देशों से आता है. इसमें सबसे अधिक खाद रूस और यूक्रेन से आता है. इसके अतिरिक्त चीन से भी खाद आता है. रूस और यूक्रेन में युद्ध के कारण वहां से आयात पूरी तरह बंद है. चीन ने दूसरे देशों को यूरिया भेजने से इनकार कर दिया है. इस कमी से कैसे निपटा जाये, इसे लेकर राज्यों को निर्देश दिया गया है.

यूरिया की कालाबाजारी रोकी जायेगी : निदेशक

कृषि निदेशक निशा उरांव कहती है कि यूरिया की कालाबाजारी रोकने पर विशेष जोर होगा. कोशिश होगी कि सही किसानों को यूरिया मिल सके. इसके लिए विशेष मॉनटरिंग की जायेगी. किसानों से आग्रह है कि बिना पॉश मशीन के यूरिया की खरीद नहीं करें. बीते साल यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए विशेष अभियान चला था. 2020-21 में 1500 और 2021-22 में भी 1000 के करीब दुकानों का निरीक्षण किया गया था. दोनों साल मिलाकर 200 से अधिक लाइसेंस निलंबित किये गये थे. 20 से अधिक प्राथमिकी भी दर्ज की गयी थी.

केंद्रीय कृषि मंत्री फिर सोमवार को राज्यों के साथ करेंगे समीक्षा

कृषि मंत्री बादल ने कहा कि भारत सरकार ने आगाह किया है कि इस वर्ष खरीफ के मौसम में खाद की कमी हो सकती है. इसके मद्देनजर तैयारी करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है. अधिकारियों को खाद की आपूर्ति और किसानों को मिलने वाली सुविधा पर विशेष ध्यान देने का निर्देश है.

4000 से 4500 रुपये प्रति बैग पड़ती है लागत

खाद कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि विदेशों से जो यूरिया आता है, उसकी कीमत 4000 से 4500 रुपये प्रति बैग होती है. इसके अतिरिक्त देश में जो यूरिया कंपनी बना रही है, उसकी लागत 2900 से 3200 रुपये प्रति बैग है. यह किसानों के बीच 300 रुपये प्रति बैग बिकता है. यूरिया का जिस रॉ मैटेरियल से निर्माण होता है, उसकी कीमत बढ़ गयी है.

तीन लाख एमटी खाद देने का वादा किया है केंद्र ने

केंद्र सरकार ने झारखंड के लिए खाद का आवंटन तय कर दिया है. झारखंड सरकार ने 225000 एमटी यूरिया मांगा था. इसकी तुलना में 17000 एमटी यूरिया देने का वादा किया गया है. इसके अतिरिक्त 75000 एमटी डीएपी, 2000 एमटी एमओपी, 10000 एमटी एसएसपी, 30000 एमटी एनपीकेएस देने का वादा किया है.

Posted by: Pritish Sahay

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