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East Singhbhum News : सुरदा फेस टू का भविष्य अधर में, मशीनरी कबाड़ में तब्दील

Updated at : 26 Jul 2025 12:02 AM (IST)
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East Singhbhum News : सुरदा फेस टू का भविष्य अधर में, मशीनरी कबाड़ में तब्दील

एचसीएल की सुरदा फेस टू का भविष्य अधर में लटका हुआ है. परियोजना को वर्ष 2017 तक पूरा करना था, पर आठ वर्ष बाद भी दो तिहाई शाफ्ट निर्माण का कार्य अधूरा है.

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मुसाबनी.

एचसीएल की सुरदा फेस टू का भविष्य अधर में लटका हुआ है. परियोजना को वर्ष 2017 तक पूरा करना था, पर आठ वर्ष बाद भी दो तिहाई शाफ्ट निर्माण का कार्य अधूरा है. एचसीएल और सुरदा फेस टू की ठेका कंपनी श्री राम इपीसी के बीच भुगतान के मुद्दे को लेकर पिछले 5 वर्ष से परियोजना बंद है. परियोजना स्थल झाडियों से घिर गया है. माइनिंग व मशीनरी कबाड़ में बदल रही है. फेस टू के मजदूर पिछले 5 वर्षों से बेरोजगारी झेल रहे हैं. ठेका मजदूर आंदोलन के बाद पिछले माह से सुरदा माइंस में 6 दिन के रोटेशन पर रोजगार के सहारे परिवार चला रहे हैं. सुरदा फेस टू बंद होने से बेरोजगार ठेका मजदूरों का परिवार बदहाली में जीने को मजबूर हैं. सुरदा फेस टू के तहत सोहदा में एक नया 600 मीटर गहरा शाफ्ट के निर्माण के साथ सुरदा माइंस को 18 लेवल तक विकसित कर सुरदा माइंस की वर्तमान स्थापित उत्पादन क्षमता को 4 लाख टन वार्षिक से बढ़कर 9 लाख टन करने का ग्लोबल टेंडर चेन्नई की ठेका कंपनी श्री राम ईपीसी को 2011 में मिला था. इस परियोजना की लागत 209 करोड़ थी व इसे 2017 तक पूरा करना था. ठेका कंपनी ने 2012 में शाफ्ट निर्माण का कार्य शुरू किया. एचसीएल ने आगे चलकर ठेका कंपनी को माइनिंग डेवलपमेंट से अलग कर दिया ठेका कंपनी को केवल शाफ्ट निर्माण की जिम्मेदारी दी गयी.

मामला आर्बिट्रेशन में लंबित

फेस टू में शाफ्ट निर्माण करने वाली ठेका कंपनी और एचसीएल के बीच मामला आर्बिट्रेशन में चल रहा है. दोनों पक्ष समाधान के लिए पिछले एक साल के अंदर कई बार बैठक कर चुके हैं. एचसीएल के सीएमडी के रूप में संजीव कुमार सिंह के पदभार ग्रहण करने के बाद वर्षों से जारी गतिरोध के जल्द समाधान होने की उम्मीद है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. भुगतान के मुद्दे को लेकर मामला अब भी फंसा है. सुरदा फेस टू में अब तक करीब 50 करोड़ एचसीएल खर्च कर चुकी है. सुरदा फेस टू एचसीएल की महत्वाकांक्षी परियोजना है. इसके पूरा होने से सुरदा माइंस की उत्पादन क्षमता दोगुनी हो जाती. इसके साथ सुरदा माइंस में रोजगार के अवसर बढ़ते. देश में तांबा की बढ़ती मांग को पूरा करने में सुरदा माइंस योगदान करता. लेकिन परियोजना के पूरे होने की अवधि बीत जाने के बावजूद कब पूरी होगी यह कहने लायक स्थिति में कोई नहीं है. खबर है कि जुलाई माह के अंत तक बंद पड़े सुरदा फेस टू के मुद्दे पर कोई निर्णय होने की उम्मीद है.

सुरदा खदान का लीज नवीकरण नहीं होने से काम बंद रहा

सुरदा खदान का लीज नवीकरण समय पर नहीं होने व कोविड के कारण मार्च 2020 से सुरदा फेस टू का शाफ्ट सिंकिंग का कार्य बंद रहा. सितंबर 2020 से ठेका कंपनी और एचसीएल के बीच सॉफ्ट से पानी निकासी व रख रखाव के कार्य के भुगतान के मुद्दे पर विवाद से फेस टू में पानी निकासी का कार्य बंद है. पिछले 5 वर्षों से सुरदा फेस 2 में काम ठप है. कई माइनिंग व मशीनरी शाफ्ट के अंदर पानी में डूब गयी. निर्माण के साइट पर सन्नाटा पसरा है. अब तक 395 मीटर गहराई तक शाफ्ट का निर्माण हुआ है बाकी लगभग 200 मीटर शाफ्ट निर्माण का कार्य अभी भी अधूरा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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