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पूर्वी सिंहभूम में सिलिकोसिस बीमारी से एक आदिम जनजाति मजदूर की मौत, अब तक 31 की जा चुकी है जान

Updated at : 28 Jul 2024 11:49 AM (IST)
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बिहार के मजदूर की ट्रेन से गिरकर मौत

बिहार के मजदूर की ट्रेन से गिरकर मौत

पूर्वी जिला प्रशासन और स्वास्थ विभाग की लापरवाही से अब तक सिलिकोसिस बीमारी से पीड़ित ग्रामीणों को कोई मुआवजा नहीं मिला है. जबकि अब 31 मजदूरों की इस बामारी से मौत हो चुकी है.

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पूर्वी सिंहभूम : पूर्वी सिंहभूम में शनिवार दोपहर को आदिम जनजाति समुदाय से आने वाले एक मजदूर की मौत हो गयी. वह चकुलिया स्थित डोमरो गांव का रहने वाला था. मृतक का नाम भोंदा सबर है. वह बीते दो वर्षों से सिलिकोसिस बीमारी से ग्रसित था. मृतक के परिवार में उनके माता पिता समेत पत्नी और चार बच्चे हैं. वह धालभूमगढ़ स्थित कृष्णा एंड कृष्णा उ‌द्योग में 2011 से 2016 तक कार्यरत था. मौजूदा समय में इस कारखाना में 600 से अधिक प्रवासी और स्थानीय मजदूर कार्यरत रहे हैं. लेकिन अब तक 31 मज़दूरों का सिलिकोसिस से असमय निधन हो चुका है. इसका खुलासा ओसाज इंडिया संस्था की आंकड़ा से हुआ है.

स्वास्थ विभाग की लापरवाही से परिवारों को कोई भी मुआबजा नहीं

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त कार्यालय पूर्वी सिंहभूम के लीगल सेल से प्राप्त सूचना को मानें तो साल 2018 में 1 से 6 दिसंबर के बीच 18 मजदूरों की सिलिकोसिस जांच की गयी थी. जिसमें जिसमे भोंदा सबर समेत लवकिशोर महतो, परिमल महतो, संतोष महतो, नियति महतो, बुनु गोप उर्फ बुलु एवं सुगी मुर्मू सिलिकोसिस संक्रमित पाये गये थे. भोंदा सबर के पहले भी कई मजदूरों की मौत सिलिकोसिस से हो गयी थी. लेकिन जिला प्रशासन और स्वास्थ विभाग की लापरवाही से अब तक उन परिवारों को कोई भी मुआवजा नहीं मिला. अब तक संस्था के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा एक्सरे प्लेट की आईएलओ वर्गीकरण जांच से 128 सिलिकोसिस संक्रमित मज़दूरों को चिन्हित किया गया हैं. इन सभी मजदूरों का एक्सरे प्लेट की डिजिटल इमेज 15 सितंबर 2023 को एमजीएम होस्पिटल के सुपरिंटेंडेंट को भेजा गया था. लेकिन सिलिकोसिस चिन्हित करने को जिस बोर्ड का गठन किया गया था उन्होंने सिर्फ मृतक कुणाल कुमार सिंह एवं जगन्नाथ पातर का प्लेट ही जांच किया. अन्य किसी का एक्सरे प्लेट का जांच नहीं किया गया.

एक ही मजदूर को मिला है मुआवजा

अब तक धालभूमगढ़ में सिर्फ मृतक कुणाल कुमार सिंह के आश्रितों को चार लाख और मजदूर जगन्नाथ पातर को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि मिली. हालांकि यह रकम प्राप्त होने के बाद ही जगन्नाथ पातर का देहांत हो गया. शेष रकम के लिए ओशाज इंडिया संस्था प्रयासरत हैं.

समित कर बोले- कारखाना सिलिकोसिस आर्थिक सहायता योजना महज एक कागज का टुकड़ा

ओसाज इंडिया के महासचिव समित कुमार कर ने बताया कि झारखंड सरकार द्वारा बनाया गया ‘कारखाना सिलिकोसिस आर्थिक सहायता योजना ‘एक ऐसा कागज का टुकड़ा है, जिससे सिलिकोसिस से मृतक मज़दूरों के आश्रितों को एवं सिलिकोसिस से संक्रिमत मजदूरों को आर्थिक सहायता कम और आर्थिक सहायता न देने का पेंच ज्यादा है. जिसमें संशोधन की जरूरत है. ताकि सिलिकोसिस से संक्रिमित मजदूरों और आश्रितों को न्याय दिलाने के लिए किसी भी संस्था को पहल न करना पड़े.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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